25 साल बाद जैश-ए-मोहम्मद ने फिर बनाया सहारनपुर को अपना ठिकाना

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25 साल बाद जैश-ए-मोहम्मद ने फिर बनाया सहारनपुर को अपना ठिकाना

ढाई दशक बाद जैश-ए-मोहम्मद ने एक बार फिर से सहारनपुर को अपना ठिकाना बनाया है। यहां से वह पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी गतिविधियों को संचालित कर रहा था। जैश का कमांडर सहारनपुर के साथ मेरठ और अलीगढ़ का भी दौरा कर चुका था। जिसका खुलासा होने के बाद से सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ गई है और यहां उनका आपरेशन तेज हो गया है। एटीएस के साथ एनआईए और अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी जुट गई हैं।

जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर की आहट 25 साल बाद एक बार फिर सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में सुनाई दे रही है। 21 फरवरी की रात एटीएस ने देवबंद में चल रहे जैश-ए-मोहम्मद के भर्ती कैंप का खुलासा करते हुए यहां से जैश के दो आतंकियों शाहनवाज तेली और आकिब अहमद मलिक को गिरफ्तार किया गया है। इनके द्वारा मदरसे में पढ़ाई की आड़ में  आतंकी संगठन के लिए युवाओं को भर्ती करने का कार्य किया जा रहा था। यह कश्मीर में पुलवामा और कुलगांव के रहने वाले हैं।

इनसे तभी से पूछताछ चल रही है और इस पूछताछ में सबसे अहम खुलासा हुआ है कि जैश का कमांडर भी इनसे मिलने देवबंद आ चुका था और उसने मेरठ, अलीगढ़, लखनऊ के साथ अन्य शहरों का दौरा भी किया था। जैश के कमांडर द्वारा सहारनपुर के देवबंद में रुकने और यहां के अन्य शहरों का दौरा करने का खुलासा होने के बाद से हड़कंप मच गया है। एटीएस अब इस कमांडर के बारे में जानकारी जुटाने में लगी है और इसके लिए जम्मू कश्मीर पुलिस से भी संपर्क किया गया है। यह कमांडर शाहनवाज के संपर्क में था और माना जा रहा है कि जैश प्रदेश में किसी बड़ी घटना की साजिश में लगा है और इसके लिए स्थानीय युवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिनका ब्रेन वॉश करने में टीमें लगी हैं। ऐसे ही भर्ती कैंप अन्य शहरों में होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। अब जहां एटीएस ने अपना आपरेशन जैश तेज कर दिया है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में उनके द्वारा ऐसे ही भर्ती कैंप स्थापित किए जाने की भी संभावना से भी इंकार नहीं किया जा रहा है। एनआईए और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसिया भी यहां जांच में जुट गई है। इन आतंकी संगठनों के तार पुलवामा वाली घटना से भी जोड़कर देखे जा रहे हैं।

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1994 में सहारनपुर में अपहरण कर रखे गए थे विदेशी नागरिक

जैश-ए-मोहम्मद को लेकर सहारनपुर इससे पहले 1994 में चर्चाओं में आ चुका है। भारत के लिए सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका जैश-ए-मोहम्मद का चीफ मसूद अजहर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी खासा सक्रिय रहा है। कांधार विमान अपहरण कांड से पहले मसूद अजहर को रिहा कराने के लिए उसके साथियों ने एक और बड़ा प्लान बनाया था। वर्ष 1994 में पांच ब्रिटिश नागरिकों और एक आस्ट्रेलिया के नागरिक का अपहरण कर लिया था। आस्ट्रेलिया के नागरिक की हत्या कर उसकी फोटो प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दी थी।

इसके बाद तमाम सुरक्षा अधिकारी जांच में जुट गए थे और गाजियाबाद के डासना में रह रहे अहमद उमर सईद शेख को हिरासत में लिया गया था। उसकी निशानदेही पर साहिबाबाद के तत्कालीन इंस्पेक्टर ध्रुव लाल यादव 2 नवंबर 1994 को दबिश देने के लिए सहारनपुर के मौहल्ला खत्ताखेड़ी में पहुंच गए थे। जहां हुई मुठभेड़ में इंस्पेक्टर ध्रुव लाल यादव और उनका साथी सिपाही राजेश यादव शहीद हो गए थे और एक आतंकी मारा गया था। यहीं से इन सभी विदेशी नागरिकों को मुक्त करा लिया गया था। इसके बाद अहमद उमर सईद शेख को मेरठ के जिला कारागार में रखा गया था और वह करीब डेढ़ साल तक मेरठ जेल में रहा था। उसके बाद उसे मेरठ कारागार से दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया था। 24 दिसंबर 1999 को कांधार विमान अपहरण कांड में जिन तीन आतंकियों को भारत सरकार ने मुक्त किया था। उसमें मसूद अजहर के साथ अहमद उमर सईद शेख और मुश्ताक अहमद जरगर थे।

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