शव पहुंचते ही मचा कोहराम, रोने के लिए परिवार में नहीं बची एक भी महिला

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एक ही परिवार के 10 लोगों की दर्दनाक मौत; सुबह 4 बजे बड़े भाई ने कहा- एक घंटे में घर पहुंचेंगे…4 घंटे बाद पुलिस ने बताया- एक साथ सभी की मौत हो गई है…आप पहुंचिए

शव पहुंचते ही मचा कोहराम, रोने के लिए परिवार में नहीं बची एक भी महिला

रामगढ़/रांची (झारखंड). रामगढ़ फोरलेन बाईपास पर पैंकी गांव के पास शनिवार तड़के 4:20 बजे इनोवा और ट्रक के बीच भीषण टक्कर में 10 लोगों की मौत हो गई। इनमें नौ लोग एक ही परिवार के हैं। रांची के हेसाग निवासी सत्यनारायण सिंह नाती का मुंडन कराकर बक्सर से लौट रहे थे। साथ में एक बेटा, दो बेटी, दो दामाद, दो नतिनी और एक नाती थे। पैंकी गांव के पास इनोवा की ट्रक से आमने-सामने की टक्कर हो गई। इनोवा के परखच्चे उड़ गए। इस हादसे में गाड़ी में सवार सभी 10 लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

मुंडन में जीतेंद्र भी गया था आरा, पर लौटते वक्त बोला- काफी लोग कार में हो गए हैं… दिक्कत होगी, ट्रेन से आ जाऊंगा, बच गई जान
जीतेंद्र की उम्र लंबी थी, इसलिए ऐन वक्त पर उसकी मति फिर गई। मुंडन के बाद जब गांव से सभी लौट रहे थे तो जीतेंद्र ने कहा- कार में काफी लोग हो गए हैं। आप लोग जाइए। मैं ट्रेन से आ जाऊंगा। वह कार में नहीं आया और बच गया। यह बात यहां पारिवारिक दोस्ताें ने बताईं। घटना की सूचना मिलते ही आरा से जीतेंद्र भी रांची के लिए रवाना हो गया। दोस्तों के अनुसार वह सदमे में है। इधर, देर रात ही मृतकों का अंतिम संस्कार धुर्वा स्थित सीठियो में हो गया। मृतक अजीत के बहन-बहनाेई व बच्चों का अंतिम संस्कार उनकी बहन के ससुराल वाले आरा में करेंगे। वे भी देर रात रांची पहुंचे और शव लेकर आरा चले गए।

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मोबाइल बंद होने पर चिंता, पर जब रंजीत को फोन आया तो उजड़ गई दुनिया
घटना से एक घंटे पहले सुबह चार बजे रंजीत उठा और अजीत को फोन किया। पूछा कि आपलोग कहां हैं… अजीत ने कहा कि रामगढ़ पहुंच गए हैं। एक घंटे में रांची पहुंचेंगे। रंजीत फिर सो गया। सुबह छह बजे अचानक नींद खुली तो फिर भाई को फोन लगाया। लेकिन, मोबाइल स्विच ऑफ बता रहा था। बहन-बहनोई और ड्राइवर का भी फोन स्विच ऑफ मिला। उसे चिंता हो गई। इधर-उधर फोन घुमाने लगा। सुबह आठ बजे रामगढ़ पुलिस का फोन रंजीत के मोबाइल पर आया और बताया गया कि एक्सीडेंट हो गया है। कोई नहीं बचा है।

रंजीत की चीत्कार से रो पड़े लोग
बदहवास स्थिति में अपने दोस्त रेलवे के आॅफिसर क्लब के ब्वॉय प्रवीण को फोन किया। अपने दोस्तों के साथ तुरंत रामगढ़ रवाना हुआ। मुहल्ले के बाल भगवान ने कहा कि रंजीत एक साथ अपने पिता, भाई, बहन, बहनोई और उनके बच्चों का शव देखकर चीत्कार मारकर रो पड़ा। वह बार-बार कह रहा था-हे भगवान क्या हो गया… ऐसी क्या गलती हुई जो इतनी बड़ी सजा दे दी मुझे। अब मेरा क्या होगा…।

6 शव पहुंचते की मची चीख-पुकार, रोने के लिए परिवार में नहीं बची एक भी महिला
शनिवार की दोपहर जब एक साथ छह लोगों का शव हेसाग पहुंचा तो पूरा मुहल्ला रो पड़ा। सत्यनारायण सिंह के घर के बाहर मौजूद महिलाएंं बिलख रही थीें। जबकि मृतक के परिवार में रोने के लिए कोई महिला नहीं बची। सत्यनारायण सिंह की पत्नी का तीन वर्ष पहले ही देहांत हो चुका है। फ्लैट में शव आने की सूचना पर काफी संख्या में मोहल्ले की महिलाएं-पुरुष जमा हो गए। सभी हतप्रभ शांत खड़े थे। मोहल्ले के कुछ युवक ही अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे थे।

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इनकी हुई मौत
सत्यनारायण सिंह (73) बेटा अजीत कुमार सिंह (28) बेटी सरोज सिंह दामाद मंटू कुमार सिंह (32) नतिनी कली कुमारी (13) नाती रौनक कुमार (4) बेटी रिंकू कुमारी दामाद सुबोध कुमार सिंह (30) नतिनी रूही कुमारी (7) ड्राइवर अंचल पांडेय

श‌व देख चीत्कार में डूबा धुर्वा इलाका
रामगढ़ से पोस्टमार्टम के बाद सुबोध सिंह व उनकी पत्नी रिंकू देवी और बेटी रूही का शव सीधे धुर्वा के टंकी साइड स्थित उनके घर पहुंचा। यहां पहले से मोहल्ले के लोग मौजूद थे। शव पहुंचते ही महिलाएं दहाड़ मारकर रोने लगीं। सुबोध सिंह के कई सहकर्मी भी पहुंचे हुए थे।

एक बेटा रांची, दूसरा बिहार में घर देखने रुका
सत्यनारायण सिंह के परिवार में अब उनके दो बेटे बचे हैं। दोनों कुंवारे हैं। छोटा बेटा रंजीत सिंह रांची में घर देखने रुका था, जबकि दूसरा बेटा जीतेंद्र कुमार सिंह मुंडन के बाद बिहार में गांव।

असम से छुट्टी लेकर बेटे का मुंडन कराने आए मंटू
सत्यनारायण सिंह के दामाद मंटू सिंह आर्मी में थे और असम में पोस्टेड थे। छुट्टी लेकर वे अपने बेटे रौनक का मुंडन कराने के लिए ही आए थे। मुंडन के बाद रांची में घूमने का प्लान था।

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