बेटी ने मौत से पहले मां को बताई थी उसे मारने की वजह, 4 साल बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला

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शादी के 9 महीने बाद ही 7 माह की प्रग्नेंट पत्नी को दे दी थी दर्दनाक मौत, हत्या कर उसी कमरे में सो गया पति और कोर्ट में बयान दिया-मुझे पता ही नहीं चला, मौत से पहले महिला ने मां को बताई उसे मारने की वजह

4 साल बाद आया फैसला : जिंदगी भर जेल में रहेंगी पति और सास-ससुर

सीकर (राजस्थान)। चार साल बाद दहेज हत्या का दोषी मानते हुए कोर्ट ने पति, सास-ससुर को आजीवन कारावास व 50 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। अपर सेशन न्यायाधीश क्रम संख्या-4 सुरेंद्र कुमार पुरोहित ने आरोपी बलबीर सिंह, सुखवंत पत्नी बलबीर सिंह व पुत्र अभिमन्यु उर्फ सेठी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अपर लोक अभियोजक रमेश पारीक व वकील राजेंद्र हुड्डा, सुरेंद्र सिंह काजला ने मुकदमे की पैरवी की।

पीड़ित पक्ष के वकील राजेंद्र हुड्डा ने बताया कि 27 नवम्बर 2014 को लक्ष्मण सिंह बाटड़ पुत्र जगन सिंह बाटड़ पूर्व विधायक दांतारामगढ़ ने उद्योगनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने बताया कि पुत्री रेणु का विवाह 24 फरवरी 2014 को दीनारपुरा निवासी हाल हाउसिंग बोर्ड कालोनी सीकर निवासी अभिमन्यु पुत्र बलबीर सिंह के साथ किया था। उन्होंने शादी में दहेज, रुपए व स्विफ्ट डिजायर कार भी दी। शादी के बाद से ही रेणु को पीहर भेजना बंद कर दिया। जब भी पीहर जाने के लिए कहा तब एक-दो बार ही एक-दो दिनों के लिए पीहर भेजा था। रेणु ने उनको फोन पर परेशान करने की बात बताई थ। सास-ससुर, पति व देवर उसे अक्सर मारपीट कर परेशान करते थे। वह दहेज लाने की मांग करते थे। 27 नवम्बर 2014 को रेणु के ससुर ने बलबीर सिंह को आठ बजे फोन कर बताया कि रेणु ने फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली। तब बड़े भाई रामकुमार बाटड़ के साथ पहुंचे तो रेणु बैडरूम में पंखे के फंदे से लटकी हुई थी। उसके घुटने बैड पर टिके हुए थे और कमरा खुला हुआ था। अभिमन्यु ने बताया कि वह घटना के समय उसी कमरे में मौजूद था। उन्होंने बताया कि उसके सिर के पीछे चोट का निशान भी था। रेणु को रात के समय में सास-ससुर पति व देवर ने हत्या कर फंदे से लटका दिया है और उसे आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु की।

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दोनों पक्ष शिक्षित और प्रतिष्ठित : हत्या की रात उसी कमरे में सो रहा था पति, कोर्ट में बयान दिया-मुझे पता ही नहीं चला
जांच में सामने आया कि रेणु की घटना से 9 महीने पहले शादी हुई थी और वह 7 माह की गर्भवती थी। घटना के समय अभिमन्यु कमरे में ही सो रहा था। कोर्ट ने माना कि कमरे में सोने के बावजूद अभिमन्यु को पता कैसे नहीं चला। वहीं कोर्ट में बलबीर सिंह ने गवाही दी कि वह अपने कमरे में रात को 1.42 मिनट पर चैस खेल रहे थे। उन्हें घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अभिमन्यु ने भी माना कि वह कमरे में ही सो रहा था उसे कुछ पता हीं नही लगा। रेणु ने घटना की रात को मां को फोन कर बातचीत की थी। तब मां ने कहा कि तुम आराम से सो जाओ, सुबह वहीं पर आकर बात करेंगे। पीड़ित पक्ष के वकील राजेंद्र हुड्डा ने बताया कि आरोपी पक्ष शादी, फेरे व रक्षाबंधन के मौके पर भी दहेज की मांग करते रहे। उन्होंने 20 लाख रुपए और प्लॉट देने की मांग की थी। मरने से पहले 10.52 मिनट तक उन्होंने फोन कर रुपए की डिमांड की थी। आरोपी पक्ष अभिमन्यु के पिता बलबीर सिंह अहमदाबाद के बीएसएनएल में डिप्टी डायरेक्टर जनरल साइबर सैल के पद पर कार्यरत है। उनके पिता रामदेव सिंह भी सीकर कोर्ट में वकील थे। मृतका रेणु के दादा जगन सिंह बाटड़ दांतारामगढ़ से 1962 में विधायक रह चुके हैं। वह पेशे से वकील थे।

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पहले पुलिस ने जांच में सास-ससुर को आराेपी नहीं माना था
एएसपी प्रकाशचंद शर्मा ने मामले की जांच कर अभिमन्यु को दोषी मानते हुए कोर्ट में चालान पेश किया। पुलिस ने जांच के दौरान सास-ससुर को दोषी नहीं माना। अभियोजन पक्ष ने सास-ससुर को भी ट्रायल के दौरान दहेज हत्या में दोषी मानते हुए शामिल करने की अपील पेश की। इसके बाद अपर सेशन न्यायालय क्रम संख्या 2 ने बलबीर सिंह और पत्नी सुखवंत के खिलाफ प्रसंज्ञान लेते दहेज हत्या का आरोपी माना। तब आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों की अपील को खारिज करते हुए सेशन कोर्ट के प्रसंज्ञान को सही माना। प्रकरण में सही मानते हुए फाइल वापस लौटा दी। इसके बाद प्रकरण न्यायालय अपर सेशन क्रम संख्या 4 में आया। मामले की जांच डीएसपी सिटी मदन दान ने भी की। अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में 26 मुख्य गवाहों के मौखिक बयान कराए गए। इसके अलावा 53 साक्ष्यों के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। वहीं बचाव पक्ष ने भी 9 गवाहों की मौखिक बयान और 32 साक्ष्य दिए।

जज की टिप्पणी : शिक्षित परिवार का समाज के प्रति अधिक दायित्व होता है
आरोपी पक्ष शिक्षित परिवार की श्रेणी में आता है ऐसे में इनका दायित्व समाज के प्रति और अधिक हो जाता है। लोग उनसे प्रेरणा लें किंतु इस प्रकार की घटना अपने आप में अभियुक्त गण के प्रति किसी प्रकार की नरमी का रुख अपनाने की ओर ध्यान आकर्षित नहीं करते है। इसीलिए प्रकरण के तथ्यों, परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी अभिमन्यु सिंह उर्फ सेठी, बलबीर सिंह एवं सुखवंत देवी उर्फ सुखदेवी को दंडित किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। (जैसा कि अपर सेशन न्यायाधीश-4, सुरेंद्र पुरोहित ने फैसले में लिखा।)

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