नवजात को कंपाउंडर ने इतने जोर से खींचा कि कोख में हो गए उसके दो टुकड़े, इस मां को अब तक पता ही नहीं कि दुनिया में आने से पहले उसके बच्चे को कितना दर्द दिया

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जैसलमेर(राजस्थान)। चिकित्साकर्मियों के इस कृत्य से बच्चे की हालत क्या रही होगी, इसकी कल्पना करने से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। रामगढ़ अस्पताल के चिकित्साकर्मियों ने हैवानियत की हद पार कर दी और प्रसव के दौरान बच्चे के पैरों को इतना जोर से खींचा कि धड़ बाहर आ गया और सिर कोख में ही रह गया। सिर्फ भास्कर ने ही इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया। असर यह हुआ कि चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने घटना को निंदनीय बताते हुए तत्काल जांच करने के आदेश दे दिए। सुबह आदेश जारी हुए और देर शाम रामगढ़ सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के डॉक्टर को एपीओ व दो चिकित्सा कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया।

गुरुवार को आज तक लाइव ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की तह तक जाने का प्रयास किया। रिपोर्ट की सच्चाई चिकित्साकर्मियों की बेरहमी की हद बताने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चे को बाहर निकालने के लिए चिकित्साकर्मियों ने इतना जोर लगाया कि नवजात के पैरों की हड्डियों में फ्रेक्चर आ गए और उसका लीवर फट गया। इस मामले में पुलिस ने चिकित्साकर्मी अमृतराम व जूंझार सिंह के खिलाफ लापरवाही से मृत्यु कारित करने का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने धारा 304ए व 336 के तहत मामला दर्ज किया है। सूत्रों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अनुसंधान के बाद धाराएं बदल भी सकती हैं। जानकारों के अनुसार इस मामले में 304 यानी गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए।

परिजनों ने नवजात का नहीं किया अंतिम संस्कार
नवजात के पिता ने इस घटना के मुख्य आरोपी लापरवाह चिकित्साकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और अब तक नवजात का अंतिम संस्कार नहीं किया गया है। नवजात के पिता तिलोकसिंह का कहना है कि लापरवाह चिकित्साकर्मी के खिलाफ शीघ्र कोई कार्रवाई नहीं की गई तो नवजात के शव के साथ धरना प्रदर्शन किया जाएगा। सुबह जब लोगों ने इस खबर को पढ़ा तो हर किसी के आंख से आंसू निकल आए। कमजोर दिल वालों ने यहां तक बताया कि वे इस खबर को पूरा पढ़ भी नहीं पाए। किसी के रोंगटे खड़े हो गए तो कोई इस घटना की कल्पना करके कांपने लगा।

दो कंपाउंडर ने मिलकर किया यह अपराध

इस मामले में गुरुवार को नया मोड़ आया। कंपाउंडर अमृतराम ने बताया कि परिजनों के कहने पर प्रसव कराने का प्रयास किया, लेकिन हो नहीं पाया, तब अन्य चिकित्साकर्मी जूंझार सिंह को बुलाया और फिर से प्रसव कराने का प्रयास किया तो बच्चे का धड़ बाहर आ गया, लेकिन सिर अंदर ही रह गया। अमृतराम ने बताया कि रेफर करने के बाद परिजनों नवजात का धड़ ले जाने का कहा तो उन्होंने बाद में ले जाने कहा। गुरुवार को ही प्रसूता के पति तिलोकसिंह ने चिकित्साकर्मी जूंझार सिंह पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उसी ने ही ज्यादा जोर लगाकर बच्चे को खींचा था।

50 मीटर दूर था डॉक्टर का मकान, बुलाया नहीं
अमृतराम कंपाउंडर है और जूंझार सिंह संविदा पर कार्यरत है। अमृतराम ने पहले प्रयास किया, लेकिन प्रसव नहीं होने पर उसने जूंझार सिंह को बुलाया। दोनों ने मिलकर प्रयास किया, लेकिन अस्पताल से केवल 50 मीटर की दूरी पर डॉक्टर का घर था उन्हें बुलाया नहीं।

और ये कार्रवाई
डॉ. निखिल शर्मा को संयुक्त सचिव पारस जैन ने एपीओ कर दिया, वहीं दूसरे आदेश में कंपाउंडर अमृतराम व जूंझारसिंह को अतिरिक्त निदेशक राकेश शर्मा ने सस्पेंड कर दिया।

इस मां को अब तक पता ही नहीं कि दुनिया में आने से पहले उसके बच्चे को कितना दर्द दिया
बच्चा खेलते-खेलते जब जमीन पर गिर जाता है और उसे मामूली खरोंच आती है, तो मां की सांसें तक थम जाती हैं, हाथ में कुछ भी कितना ही कीमती या जरूरी ही क्यों न हो, सबकुछ फेंक कर वो बच्चे को संभालने के लिए दौड़ पड़ती है और उसे अपने सीने से लगा लेती है। बच्चे के दर्द को देख मां के आंसू निकल आते हैं, वहीं इस रामगढ़ अस्पताल में एक मां के बच्चे के प्रति जन्म के दौरान बरती गई असंवेदन शीलता और बच्चे की ऐसी मौत के बारे में जब उस मां को पता चलेगा तो उस पर क्या बीतेगी। दुखों का पहाड़ टूट पड़ेगा। दिल दहल जाएगा, वह कांप उठेगी। उसकी चीख से धरती अंबर सब एक हो जाएंगे और आंसुओं को रोकना आसान नहीं होगा। हैवानियत करने वाले चिकित्साकर्मियों के लिए बरबस ही उसके दिल से हजारों बददुआएं निकलेंगी।

शायद… यह दृश्य इस मां के परिजन देखना नहीं चाहते, इसलिए अब तक किसी ने उस मां को यह बताने की हिम्मत नहीं जुटाई कि उसकी कोख में पले बच्चे को दुनिया देखने से पहले ही इतना दर्द दे दिया कि वह सांस भी नहीं ले सका। प्रसूता दीक्षा कंवर के पति तिलोक सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी जोधपुर में जिंदगी व मौत के बीच जंग लड़ रही है, अभी तक वह अचेतावस्था में है और हम में इतनी हिम्मत नहीं है कि उसे पूरा सच बता सकें।

दुनिया भी नहीं देखी और बेरहमी सहन कर ली
कहते हैं न दुनिया में सब कुछ ठीक नहीं है। कहा जाता है कि इंसानियत अब रही नहीं। उस बच्चे ने तो किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा था तो उसके साथ इतनी हैवानियत भरी हरकत क्यों की गई। जिस बच्चे ने अपनी आंखें तक नहीं खोलीं, खुली हवा में पहली सांस भी नहीं ली और इससे पहले उसे दुनिया की बेरहमी ने हमेशा के लिए मौत की नींद में सुला दिया।

अस्पताल में मां अभी भी अचेत, स्थिति नाजुक
जोधपुर के अस्पताल में दीक्षा कंवर अभी भी अचेतावस्था में है। उसकी नाजुक स्थिति बनी हुई है। उनके घर की महिलाएं वहां पर मौजूद हैं। परिजनों की बेबसी भी इस हद तक है कि वे अपने कुल के चिराग को खोकर रो भी नहीं सकते हैं क्योंकि मां से यह सच जो छिपाना है।

रामगढ़ के सरकारी अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात के प्रति बरती गई असंवेदनशीलता को  पुरजोर तरीके से उठाया तो शासन-प्रशासन में हड़कंप मच गया। सीएमएचओ से होता हुआ यह मामला चिकित्सा मंत्री तक भी पहुंचा। लेकिन, सरकारी सिस्टम व चिकित्सा मंत्री ने इस प्रकरण को सामान्य मानते हुए जांच बिठाने और दोष सिद्ध होने पर सजा देने की बात कही है। जांच के आदेशों के साथ ही डॉक्टर को एपीओ करने और दो चिकित्साकर्मियों को केवल निलंबित कर मामले को शांत करने का प्रयास किया है। चिकित्सकीय तर्क-वितर्क देकर इस केस को पेचीदा बताया जा रहा है। हर कदम पर सिर्फ जांच का आश्वासन, हर बार लीपा-पोती का प्रयास, हर तरह से इस मामले को दबाने की कवायद इस बात की ओर इशारा कर रही है कि असंवेदनशीलता पूरे चरम पर है। हालांकि स्थानीय थाने में मामला दर्ज हो चुका है। मुआवजा और अन्य प्रलोभन भी दिए जाएंगे ताकि इस मामले को दबाया जा सके। इधर, प्रशासन ने आदेश भी दे दिए हैं, सरकारी जांच कब तो शुरू होगी, कैसी होगी और क्या परिणाम आएंगे? यह सवाल अब काफी पीछे छूट गया है, एक मां का दर्द प्रशासनिक नियमावली के फेर में फिर दफन करने की यह गहरी साजिश है, यह रवैया बदलना होगा, दोषी को तुरंत कड़ी सजा देनी होगी, तभी एक मां को और इस दुनिया में आने से पहले मौत के घाट उतार दिए गए नवजात को न्याय मिलेगा।


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