मां के कलेजे से लिपटी बेटी के शव को देख दहाड़े मारकर रोने लगा पिता

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बेटी को सीने से लगाए जलती बस में इधर-उधर भागती रही महिला डॉक्टर, मदद के लिए चीखती रही लेकिन आग इतनी भयानक थी कि कोई हिम्मत न जुटा सका

मां के कलेजे से लिपटी बेटी के शव को देख दहाड़े मारकर रोने लगा पिता

लखनऊ. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर हुए भीषण बस हादसे में मां-बेटी की मौत हो गई। घटना में 4 लोग जिंदा जले, सभी ने बचने की कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं हो सके। प्रत्यदर्शियों के अनुसार, ज्योति 6 साल की बेटी को सीने से लगाए मदद की लिए चीखती-चिल्लाती रही, लेकिन कोई आग का गोला बनी बस से उन्हें बचाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। आखिर में मां-बेटी ने दम तोड़ दिया। मां के कलेजे से लगी मासूम बेटी के शव को जिसने भी देखा उसकी आंखें भर आईं। बीच सड़क जलती बस को देख कई लोग मौके पर पहुंचे थे, लेकिन भीषण आग देखकर कोई भी अंदर नहीं जा सका।

मेरा सब कुछ चला गया…
पत्नी व मासूम बेटी की मौत की खबर सुनकर डॉ. निशांत बदहवास हो गए। थोड़ी देर बाद जब दोनों के शव घर पहुंचे तो वो फूट-फूटकर रोने लगे। इस दौरान वो कहते रहे- ‘मैं बर्बाद हो गया। मेरा सब कुछ चला गया।’ बाकी परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल था। पीड़ित परिवार से मिलने राज्यपाल राई नाइक पहुंचे। उनके सामने भी डॉ. निशांत हाथ जोड़े खड़े रहे।

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सेमिनार में हिस्सा लेने गई थीं
डॉ. ज्योति की शादी दिसंबर, 2011 में निशांत निर्वाण से हुई थी। ज्योति 23 मार्च को बेटी के साथ पिता के नए घर में गईं थीं। इसके अगले दिन दिल्ली में एक रिसर्च सेमिनार में हिस्सा लिया था। इसके बाद वो बस से दिल्ली से लखनऊ के लिए निकली थीं।

एक साथ हुआ पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार
– घटना के बाद जब बस से शव निकाले गए तो बेटी मां के सीने से चिपकी हुई थी। उसी स्थिति में जलकर दोनों की मौत हो गई। चिपकी स्थिति में ही शव घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। चिपकने के कारण दोनों के शव अलग नहीं किए जा सके। इसलिए दोनों का पोस्टमार्टम साथ हुआ। इसके बाद एक ही अर्थी सजी और मां-बेटी का अंतिम संस्कार भी एक साथ ही हुआ।

डॉक्टर फैमिली से थीं ज्योति
– मृतका का नाम डॉ. ज्योति निर्वाण है। वो एसजीपीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ मॉलीक्यूलर मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी विभाग में सीनियर डिमॉन्स्ट्रेटर थीं। 38 साल की ज्योति अपनी 6 साल की बेटी के साथ बस में सवार थीं। ज्योति के पति डॉ. निशांत निर्वाण आयुर्वेदिक कॉलेज में बाल रोग विशेषज्ञ हैं। निशांत के बड़े भाई डॉ अनिल निर्वाण राजभवन में चिकित्सक और उनकी पत्नी डॉ विनीता रेसक्रॉस अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। ज्योति लखनऊ में पति-बेटी और सास-ससुर के साथ रहती थीं।

हादसे में जिंदा जले ड्राइवर-कंडक्टर भी
– हादसे में 4 लोग जिंदा जल कर मर गए थे। इसमें मां-बेटी के अलावा एक ड्राइवर और कंडक्टर भी शामिल हैं। हादसे के वक्त बस में 7 लोग सवार थे, इसमें से 4 की मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल दो लोगों का इलाज चल रहा है।

ऐसे हुआ था हादसा
– दिल्ली से लखनऊ के लिए वॉल्वो बस रात करीब 10 बजे रवाना हुई और रात 2 बजे के करीब मैनपुरी के पास हादसा हुआ। दरअसल, इस बस के पीछे एक और बस चल रही थी, जिसका अचानक टायर फट गया। जिससे पीछे से उस बस ने वॉल्वो बस में टक्कर मारी। टक्कर से बस डिवाइडर से टकरा गई और उसके एसी में आग लग गई। आग बस में इतनी तेजी से फैली कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला। रात होने के कारण बस में मौजूद सभी लोग सो रहे थे। मौके पर पहुंची दमकल की दो गाड़ियों ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था।

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