मां की कुर्बानी से बच गई बच्‍चे की जान, भिवंडी में गिरी इमारत

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child life saved by mother

भिवंडी कहते हैं कि दुनिया में मां से बढ़कर कोई नहीं होता है। यह मां की ममता की छांव ही है, जिसमें पलकर बच्‍चा जिंदगी की जंग लड़ने के काबिल बनता है। नौ महीने तक अपने गर्भ में बच्‍चे की हर खतरे से सुरक्षा करने वाली मां की महानता एक बार फिर साबित हो गई। अपने मासूम बच्‍चे की जान बचाने के लिए मुंबई में एक मां ने मौत को गले लगा लिया।

मुंबई के भिवंडी में महानगर पालिका की सीमा से लगे खाड़ीपार खोनी ग्राम पंचायत के रसूलाबाद में मंगलवार की रात एक तीन मंजिला इमारत ढह गई। मात्र सात वर्ष पुरानी इस इमारत के मलबे में 9 लोग दब गए थे। उन्‍हें निकालने के बाद आईजीएम उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से खैरुन्निशा इस्माइल सैय्यद (25) को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि हादसे में अपने बेटे को बचाते हुए खैरुन्निशा की मौत हो गई।

इमारत का पूरा मलबा अपने ऊपर आने दिया
बचाव दल ने पाया कि हादसे के दौरान खैरुन्निशा ने अपने दो साल के बेटे उमर की जान बचाने के लिए उसे गोद में भर लिया और इमारत का पूरा मलबा अपने ऊपर आने दिया। मां के इस ‘बलिदान’ से उमर आश्‍चर्यजनक रूप से बच गया। मासूम उमर को जिंदा पाकर बचावकर्मियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस हादसे में खैरुन्निशा की सास खातून को हल्‍की चोट आई है जबकि उनके ससुर अयूब को सिर में गहरी चोट लगी है।

अयूब को इलाज के लिए एक निजी अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। खैरुन्निशा के पति इस्‍माइल शेख ने बताया कि घटना के समय वह काम के सिलसिले में घर से बाहर था। इस्‍माइल ने कहा, ‘मेरी पत्‍नी ने अपनी जान की कुर्बानी देकर मेरे बेटे जान की बचा ली।’ इस बीच हादसे के समय सार्वजनिक शौचालय गए उनके पड़ोसी साफिया सरदार ने मरियम शेख को बचा लिया। मरियम के पैर में चोट लगी है।

‘3 घंटे तक मलबे के नीचे दबे रहे’
इमारत का एक हिस्‍सा सार्वजनिक शौचालय पर गिरा था और उस समय साफिया और मरियम शौचालय के अंदर थे। शौचालय के बाहर खड़ी मरियम की मां ने उसे बचाने का प्रयास किया लेकिन उन्‍हें सिर में चोट लग गई। साफिया ने कहा, ‘जब हमारे ऊपर इमारत गिरी तो एक बड़ी सी दीवार मरियम के पैर पर जा गिरी। किसी तरह से मैंने उसे बाहर निकाला। हम करीब 3 घंटे तक मलबे के नीचे दबे रहे।’

गुलाम महमूद मियां नाखुदा के घर नंबर 70 पर डिवेलपर फैजान अब्दुल हमीद सुसे ने सात साल पहले ही यह इमारत बनाई थी। आरोप है कि फैजान सुसे ने इमारत बनाने में निम्न दर्जे की सामग्री इस्तेमाल की थी। पांच साल बाद से ही इमारत के खंभों एवं बीम में दरारें आने लगी थीं और प्लास्टर टूटकर गिरने लगा था। इमारत में रहने वाले लोगों ने इसकी शिकायत ग्राम पंचायत से लेकर तहसीलदार, जिलाधिकारी एवं एमएमआरडीए से की थी, लेकिन जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। लोगों ने इस दुर्घटना के लिए एमएमआरडीए को जिम्मेदार बताया है।