महिला एसआई और बिजनेसमैन की शादी में न दहेज लिया, न रिश्तेदारों के गिफ्ट किए स्वीकार

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महिला एसआई और बिजनेसमैन की शादी में न दहेज लिया, न रिश्तेदारों के गिफ्ट किए स्वीकार

चंदाना रोड स्थित कलश गार्डन में ब्राह्मण परिवार में हुई शादी ने दिया सामाजिक संदेश

देवास. चंदाना रोड स्थित कलश गार्डन में बुधवार को ब्राह्मण परिवार में हुई एक शादी ने सामाजिक संदेश दिया। मैनाश्री काॅलोनी निवासी पराग दुबे और प्रेमनगर काॅलोनी निवासी एसआई साक्षी जोशी की यह शादी दहेजमुक्त तो थी ही, समारोह में आए किसी भी रिश्तेदार से गिफ्ट व लिफाफे भी स्वीकार नहीं किए। खर्च बचाने के लिए शादी भी दोपहर में की।

बुधवार को हुआ विवाह समाज में उदाहरण बन गया। शादी में दोनों परिवार वालों ने अपने रिश्तेदारों, मिलने वाले शुभचिंतकों से कोई गिफ्ट नहीं लिए। शादी में लगभग 1500 लोग शामिल हुए। धार्मिक रीति रिवाज से दोनों विवाह बंधन में बंधे। दूल्हे पराग ने इंजीनियरिंग की है। खुद का बिजनेस करते हैं। पिता अमरनाथ दुबे बीएनपी से रिटायर हो चुके हैं। मां मीनाक्षी दुबे गृहिणी हैं। पराग इनका इकलौता बेटा है। साक्षी प्रेमनगर देवास की निवासी हैं। पिता का निधन हो चुका है। मां शरद जोशी गृहिणी है। साक्षी ने एमबीए किया है। सब इंस्पेक्टर हैं और वर्तमान में एसपी कार्यालय देवास में पदस्थ हैं। डेढ़ साल पहले उनके पिता कैलाशचंद्र जोशी का निधन हो गया था। उनके स्थान पर अनुकंपा नौकरी मिली है।

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दहेज लेने वालों से बहुत चिढ़ती थी : साक्षी ने बताया समाज में माता-पिता बेटियों की शादी के लिए परेशान होते हैं क्योंकि लोग दहेज बहुत मांगते हैं। मैं दहेज लेने वालों से बहुत चिढ़ती थी। जब मेरा पराग से रिश्ता हुआ और मेरी मां से जानकारी लगी कि दुबे परिवार है और वह दहेज नहीं लेंगे। मुझे खुशी हुई। जब मेरी पराग से बात हुई उन्होंने दहेज न लेने की बात कही। मैं लोगों से कहना चाहूंगी कि दहेज की मांग न करें ताकि एक पिता अपनी बेटी की शादी को लेकर चिंतित न रहे।

दहेज और व्यवहार प्रथा बंद करने का संदेश देना चाहते हैं 
पराग की मां मीनाक्षी दुबे ने बताया मेरे परिवार में हमेशा से कुछ अलग ही काम किया है। हमने शादी में दुल्हन के सुहाग के जेवर बनवाए। कोई मांग, मामेरा नहीं। हम दोनों परिवार ने शान शौकत में कोई पैसा खर्च नहीं किया। मेहमानों का भोजन दोनों परिवार ने संयुक्त रूप से दिया। जो भी खर्च हुआ समान रूप से किया। दोपहर में शादी खर्च बचाने के लिए की। समाज में दहेज व व्यवहार प्रथा बंद करने का संदेश देना चाहते हैं।

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