इंटरव्यू में हुआ सवाल- सवर्णों को 10% आरक्षण देना सही है ? जानिए क्या दिया जवाब

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आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि PSC की तैयारी कर सके; घरवालों का भी सपोर्ट नहीं मिला, लेकिन पति बने प्रेरणा और 1st अटैम्प्ट में ही क्रैक किया MPPSC

इंटरव्यू में हुआ सवाल- सवर्णों को 10% आरक्षण देना सही है ? जानिए क्या दिया जवाब

भोपाल (मध्यप्रदेश). एमपीपीएससी से सीईओ जनपद पंचायद के लिए सिलेक्ट हुईं शिवपुरी जिले की रहने वालीं पूजा गुप्ता के लिए ये राह आसान नहीं थी। आर्थिक स्थिति इतनी ठीक नहीं थी कि इसकी तैयारी कर पाए। बाद में प्राइवेट जॉब भी लगी, तो सिविल सर्विसेज को लेकर कोई प्रॉपर गाइडेंस नहीं मिला। लेकिन 2017 में शादी के बाद पति नकुल गुप्ता उनकी प्रेरणा बनें। उन्होंने उनसे प्राइवेट जॉब छोड़कर अपने को सपना पूरा करने के लिए इन्सपायर किया। आज नतीजा सामने है। पूजा ने पहले ही प्रयास में पीएससी क्रैक कर लिया। इसी साल 8 जनवरी को उनका इंटरव्यू हुआ था। लगभग 20 मिनट चले इस इंटरव्यू में तीन लोगों के पैनल ने उनसे कई सवाल किए।

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Q. सवर्णों को 10% आरक्षण देना सही है, आपको क्या लगता है ?

A. ये बेहद सकारात्मक पहल है। लेकिन इसका ग्राउंड रियलटी चेक तभी होगा, जब संविधान में संशोधन कर सही जनता को इसका लाभ पहुंचे। इसके लिए समय-समय पर रिव्यू होते रहना चाहिए। वहीं, वर्तमान आरक्षण प्रणाली का भी समय-समय पर रिव्यू होना चाहिए। तभी टारगेटेड जनता इससे लाभान्वित हो पाएगी।

Q. आपको डिप्टी कलेक्टर बना दिया जाए और होम डिस्ट्रिक्ट में पोस्टिंग दें, तो वहां क्या करेंगी?

A. शिवपुरी में पानी की किल्लत, लो वुमन लिट्रेसी और कुपोषण जैसी समस्याएं हैं। इन्हें प्राथमिकता में रखकर इंटीग्रेटेड अप्रोच के साथ काम करूंगी। साथ ही जो सरकारी पॉलिसीज चल रही हैं, उन पर फोकस करूंगी।

Q. फार्मासिस्ट, केमिस्ट और ड्रगिस्ट में क्या अंतर होता है ?

A. फार्मासिस्ट, एक बैचलर होता है जो फार्मेसी में ट्रेंड होता है। वहीं केमिस्ट, केमिस्ट्री फील्ड का एक्सपर्ट होता है। ड्रगिस्ट फार्मासिस्ट का ही एक नाम है, लेकिन इस टर्म का इस्तेमाल अमेरिकन फार्माकूपियल स्टैंडर्ड्स में होता है।

Q. ब्रांडेड और जेनरिक दवाओं में क्या अंतर है ?

A. ऐसी दवाइयां जो ऑफ पेटेंट हो जाती हैं और उन्हें बिना किसी मार्केटिंग व पैकेजिंग कॉस्ट के बाजार में लाया जाता है, उसे जेनरिक मेडिसिन कहा जाता है।

Q. लगता है आपको इन दोनों की गलत जानकारी है?

A. नो सर। जहां तक मुझे पता है, मैं सही बता रही हूं। ब्रांडेड में केवल दवाओं को उनका टैग मिल जाता है। जिससे वे महंगी बिकती हैं। (इसके बाद पैनल ने पूजा की तारीफ की।)

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ये सवाल भी पूछे गए

इसके अलावा पूजा ने बताया कि इंटरव्यू के दौरान उनसे करंट अफेयर्स, कंडिशन बेस्ड और ग्रेजुएशन से संबंधित सवाल किए गए। जैसे, फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री के लिए सरकार अभी कौन से कदम उठा रही है। ड्रग और मेडिसिन में क्या अंतर होता है। जन औषधि केंद्र का क्या कॉन्सेप्ट है।

शिवपुरी से हुई स्कूलिंग, 3 साल प्राइवेट कंपनी में की नौकरी

2012 में पूजा ने एलएनसीटी, भोपाल से बी.फार्मा में ग्रेजुएशन किया। फिर 2014 नाइपर हैदराबाद से फार्मा मैनेजमेंट में एमबीए किया। इसके बाद अहमदाबाद में तीन साल जर्मन फार्मा कंपनी बोरिंगर इंगलहेम में जॉब की। पूजा ने बताया कि मई 2017 में उन्होंने जॉब क्विट कर सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी थी।

ऐसे पूरा किया सिविल सर्विसेज में जाने का सपना

पूजा ने बताया, शुरुआत से ही सिविल सर्विसेज में जाना चाहती थी। लेकिन आर्थिक स्थिति इतनी ठीक नहीं थी कि मैं इसकी तैयारी कर सकूं। इसके अलावा मुझे प्रॉपर गाइडेंस भी नहीं मिला। घरवालों का भी उतना सपोर्ट नहीं था। उनके पिता सुरेश कुमार मंगल का एक छोटा सा बिजनेस है। वहीं, मां हाउस वाइफ हैं। पूजा ने बताया कि जैसे-तैसे आगे की पढ़ाई करती गई। जॉब के भी कई मौके मिले। लेकिन शादी के बाद मेरे पति नकुल गुप्ता मेरे इन्सपिरेशन बने। उन्होंने मेरी जॉब छुड़वाकर कहा, आप पूरा ध्यान सिविल सर्विसेज की तैयारी में लगाइए। क्योंकि ये आपका सपना है और आप इसे फुलफिल कीजिए। इसके बाद मैं पूरी तरह से सिविल सर्विसेज की तैयारियों में जुट गई।

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