पत्नी से फोन पर बोला- फायरिंग हो रही है, कल बात करूंगा…वो कल अब नहीं आएगा

144
aajtaklives news, hindi news,news,surgical strike commander sandeep singh lost life in tangdhar

गुरदासपुर (पंजाब)। गुरदासपुर जिले के ब्लॉक धारीवाल के गांव कोटला खुर्द के रहने वाले पैरा स्पेशल फोर्स-4 के लांस नायक संदीप सिंह शुरू से ही लीड करते थे। शहीद होने वाले दिन तक वह लीडर की ही भूमिका में रहे। शनिवार को सेना ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के तंगधार सेक्टर में आतंकियों को घुसपैठ करते देखा तो आपरेशन शुरू किया। आतंकी फायरिंग करने के बाद एलओसी के पास जंगल में छिप गए तो पैरा कमांडोज को बुलाया गया। इस दस्ते को संदीप सिंह लीड कर रहे थे। रविवार को पहले दिन दो आतंकियों को मार गिराया गया। सोमवार को संदीप सिंह अपनी टीम के साथ जंगल में आतंकियों के पांवों के निशान देखकर आगे बढ़ रहे थे कि आतंकियों से सामना हो गया। फायरिंग हुई और एक आतंकी ढेर हो गया। उसके दो साथियों ने फायरिंग शुरू कर दी। संदीप अपने जवानों को छिपने के लिए कहकर खुद अकेले आतंकियों की लोकेशन देखने आगे बढ़े, ठीक उसी समय आतंकियों की एक गोली उनके सिर में आ लगी। इस तरह शहादत का जाम पीने से पहले संदीप ने दो आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया।

शहीद की अर्थी को बहन ने भी दिया कांधा

मंगलवार को संदीप सिंह के जद्दी गांव कोटला खुर्द में पूरे सैन्य सम्मान के साथ जब उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा था तो उस समय तंगधार आपरेशन से जुड़े सूत्रों से बातचीत के आधार पर पता चली उनकी वीरता की यह गाथा याद की जा रही थी। शहीद की बहादुर माता कुलविंदर कौर शहीद बेटे की अर्थी को कंधा देकर श्मशानघाट तक लेकर गईं। आंखों में आंसू भरकर बोलीं, मुझे अपने बेटे के जाने का दुख तो बहुत है, लेकिन इस बात का गर्व भी है कि संदीप ने शहादत देकर मुझे एक शहीद की मां होने का गौरव प्रदान किया है। शहीद की अर्थी को उनकी बहन ने भी कंधा दिया।

पत्नी से फोन पर बोला- फायरिंग हो रही है, कल बात करूंगा…वो कल अब नहीं आएगा
शहीद की पत्नी गुरप्रीत कौर ने बताया कि शनिवार को उनकी उनके पति से फोन पर बात हुई थी। थोड़ी देर बात करने के बाद उन्होंने कहा था कि फायरिंग चल रही है, इसलिए कल बात करूंगा मगर उसके बाद उनका कोई फोन नहीं आया। लेकिन सोमवार को आई उनकी शहादत की खबर आई। हम इस सदमे से शायद ही कभी उबर पाएं। शहीद की पत्नी गुरप्रीत कौर ने कहा, मेरे पति एक बहादुर सैनिक थे, जो पीठ पर नहीं सीने पर गोली खाकर बहादुरी का परचम फहरा गए इसलिए वह अपने इकलौते बेटे अभिनव को भी सेना में भेजेंगी ताकि वह उसमें वह हमेशा अपने शहीद पति का अक्स देखती रहें।

बहन ने कलाई पर राखी बांधकर दी विदाई…

शहीद की इकलौती बहन खुशमीत कौर ने शहीद भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसे अंतिम विदाई दी। बहन का रुदन देखकर वहां मौजूद लोग यहां तक कि शहीद की यूनिट के मेजर मुकुल शर्मा भी अपने आंसू नहीं रोक पाए।

गरीबों की मदद को गांव में बनाया था ग्रुप
शहीद के भाई ने यह भी बताया कि संदीप ने अपने दोस्तों के साथ गांव के लड़कों को लेकर एक ग्रुप बनाया हुआ था, जो गरीब लोगों के लिए दवाइयां और अन्य सामान इकट्‌ठा किया करते थे और वह गांव में किसी धार्मिक प्रोग्राम होने पर दोस्तों को इकट्‌ठा करके गांव के लिए लंगर लगाया करता था और गांववासियों को धार्मिक फिल्में भी दिखाया करता था।

बटालियनों से चुनकर बनाए जाते हैं पैरा कमांडो
सेना की विभिन्न बटालियनों से बहादुर जवान चुन-चुनकर पैरा कमांडो बनाए जाते हैं। चयन के बाद इनके धैर्य, संयम और कठिन परिस्थिति झेलने की क्षमता का परीक्षण किया जाता है। इस टेस्ट में जो जवान पास होते हैं, वही पैरा कमांडो दस्ते का हिस्सा बन पाते हैं। चयन के बाद 90 दिनों की स्पेशल ट्रेनिंग होती है जो आतंकी आपरेशनों में बेहद कारगर साबित होती है। कठिन से कठिन हालात में भी दुश्मन को नाकों चने चबवा देना पैरा कमांडो की पहचान है।