इन्हें आज भी है एक बात का मलाल, सुनाई पाकिस्तान की टॉर्चर की कहानी

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अभिनंदन की तरह 48 साल पहले PAK में जा गिरा था ये पायलट; पाकिस्तानी आर्मी ने पूछा था- तुम्हारी स्क्वॉड्रन का बेस्ट पायलट कौन है? तन कर कहा था- सामने बैठा है

इन्हें आज भी है एक बात का मलाल, सुनाई पाकिस्तान की टॉर्चर की कहानी

चंडीगढ़. भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान शुक्रवार रात सकुशल लौट आए। 48 साल पहले युद्ध के दौरान अभिनंदन की ही तरह एयर कोमोडोर जेएल भार्गव भी जेट क्रैश होने के बाद पाक के हाथ लग चुके थे। लेकिन इस दिलेर से पाकिस्तान कुछ भी नहीं उगलवा पाया। पाकिस्तानी रेंजर्स ने भार्गव से जब सवाल किया था कि तुम्हारी स्क्वॉड्रन का सबसे बेस्ट पायलट कौन है, तो तन कर कहा था- सामने बैठा है। वतन वापसी के बाद उन्हें सिर्फ एक बात का मलाल है कि वे फिर कभी जहाज नहीं उड़ा पाए। उन दिनों को याद करते हुए उन्होंने जेल में हुए टॉर्चर की दास्तां को भी बयान किया।

फ्लैशबैक
5 दिसंबर, 1971। राजस्थान के बाड़मेर से प्लेन एचएफ-24 ने उड़ान भरी। इसे फ्लाइट लेफ्टिनेंट जेएल भार्गव उड़ा थे। पाकिस्तानी सीमा में दाखिल होने के बाद नीचे से हुई फायरिंग में जेट क्रैश हो गया। हालांकि, भार्गव प्लेन से सुरक्षित निकल चुके थे। उन्होंने फौरन सर्वाइर किट निकाला और अपने यूनिफॉर्म को पास की झाड़ियों के नीचे गाड़ दिया। फिर घड़ी को पाकिस्तानी समय के हिसाब से सेट कर लिया। बता दें कि 12 घंटे तक भार्गव को कोई भी पाकिस्तानी पहचान नहीं पाया था। इस दौरान वे अपना नाम मंसूर अली बताते थे। वहीं सबूत के तौर पर पाकिस्तानी करंसी दिखाते थे।

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और फिर पहचान सामने आ गई
उस दिन का याद करते हुए भार्गव बताते हैं, जिस गांव में मैं गिरा था। वहां के एक स्कूल टीचर को मुझ शक हो गया। उसने मुझसे घर का पता पूछा। मैंने कहा- रावलपिंडी। फिर पूछा वहां कहां रहते हो। मैंने कहा- माल रोड। मैं उसे उलझाने में कामयाब हो गया था, लेकिन तब तक पाकिस्तानी रेंजर्स वहां आ चुके थे। उन्होंने मुझसे कलमा पढ़ने को कहा। यहीं मेरा पर्दाफाश हो गया। मुझे गिरफ्तार कर पाकिस्तानी आर्मी के हवाले कर दिया गया। गौरतलब है कि इसके एक महीने के बाद पाकिस्तान ने अपने कब्जे में भार्गव के होने की बात स्वीकारी। जिसके बाद इंटरनेशनल दबाव बढ़ा। हालांकि, पाकिस्तानी जेल में एक साल बिताने के बाद भार्गव की वतन वापसी हुई थी।

‘आपके सामने बैठा है बेस्ट पायलट’
लेफ्टिनेंट भार्गव का कहना है कि अगर विंग कमांडर अभिनंदन की फोटो सामने नहीं आई होती, तो यह साबित करना मुश्किल हो जाता कि वह जिंदा पाकिस्तान में गिरे थे। उन्होंने कहा, पाकिस्तानी अफसर रात में ही पूछताछ करते थे। जब सोने जाता, तभी पहुंच जाते और पूछने लगते कि प्लान क्या था। उनके हर सवाल पर ना कहना बेहद मुश्किल होता था। मुझसे मेरी स्क्वॉड्रन के पायलट्स के बारे में पूछते थे, तो मैं अपने भाई-बहनों के नाम बताता था। जब मुझसे पूछा था कि मेरी स्क्वॉड्रन का बेस्ट पायलट कौन है, तो मैंने कहा था कि सामने बैठा है।

स्पाइन इंजरी के शिकार हो गए
उन्होंने बताया कि कैद में रहने के दौरान वे स्पाइन इंजरी का शिकार हो गया। दर्द की वजह से चलना तक मुश्किल हो गया था। हालांकि, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। लेकिन उनका कहना है कि वतन वापसी के बाद वे दोबारा जहाज नहीं उड़ा पाए। आज भी उनके दिल में इस बात का मलाल है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने उन्हें इस आस पर छोड़ा था कि इंदिरा गांधी पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों को रिहा करेगी। उस दौरान पाकिस्तान ने भारत के 12 पायलटों, 6 आर्मी अफसरों सहित 600 जवानों को रिहा किया था।

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