दुल्हन बोली- वो बहुत यातनाएं देते थे, जानवरों जैसा व्यवहार करते थे…अब सुकून मिला

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बचपन में माता-पिता की मौत, अपनों ने दिखाया नर्क, मानसिक संतुलन बिगड़ा तो भगवान बनकर आया ये शख्स, ठीक होने तक दिनरात की सेवा…अब उसी ने थामा हाथ

दुल्हन बोली- वो बहुत यातनाएं देते थे, जानवरों जैसा व्यवहार करते थे…अब सुकून मिला

श्रीगंगानगर( राजस्थान)सीमा के लिए मकर संक्रांति का यह दिन सबसे यादगार बन गया। कारण, उसकी शादी अपनी पसंद के लड़के से हुई। ये खास इसलिए भी क्योंकि कल तक जो बेटी लावारिस थी, उसे अपना परिवार मिल गया। पति, सास-ससुर के रूप में मां-बाप भी। तीन साल पहले तक सीमा की कहानी बेहद दर्दभरी थी। अपने खून के रिश्तेदारों से सताई मानसिक रूप से बीमार होकर भटकती हुई वो रायसिंहनगर स्टेशन पर मिली थी। उसके माता-पिता का बचपन में ही देहांत हो गया था। तब से चाचा-चाची के पास रहती थी। उन्होंने इस पर इतने जुल्म ढहाए कि मासूम सी बच्ची का मानसिक संतुलन ही बिगड़ गया। घर से निकाली सालों तक भटकते-भटकते हरप्रभ आसरा आश्रम पहुंच गई। जिस लड़के प्रेम से शादी की है, उसी ने उसकी सेवा कर उसे ठीक किया। बीमारी से उबरी तो नया जीवन भी मिल गया।

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इस कहानी में दर्द, अमानवीयता, बिछुड़ना है… लेकिन सबसे सुखद है इसका END

”मैं मूल रूप से उत्तरप्रदेश की रहने वाली हूं। बचपन में ही मां-बाप का देहांत हो गया था। उसके बाद मैं अपने चाचा-चाची के साथ रहने लग गई थी। वह मुझे बहुत तंग-परेशान करते थे और घर का सारा काम मुझसे ही करवाते थे। न मुझे घर के बाहर निकलने देते और न ही कभी स्कूल भेजा। मुझे यातनाएं देते, मैं सह लेती। भूखी-प्यासी रखते…मुझसे जानवरों जैसा व्यवहार करते…और एक दिन मैं घर से भाग आई।”

”मुझे पता नहीं चला, कब मेरा मानसिक संतुलन बिगड़ गया। मैं कभी इस शहर तो कभी दूसरे शहर ट्रेनों में भटकती रही और कब रायसिंहनगर पहुंची पता नहीं चला..। आश्रम में सबका स्नेह, प्यार और उपचार पाकर ठीक हो गई। आश्रम में सबसे ज्यादा मेरी देखभाल प्रेम करता था। उससे कब प्यार हुआ, पता ही नहीं चला…और आज हमारी शादी हुई तो ऐसा लगा कि मानों दुनिया की सारी खुशियां मिल गईं।”

सीमा की हालात देख लगाव हुआ..और प्यार हो गया, पता ही नहीं चला
प्रेम ने कहा, ”सीमा एक अच्छी और समझदार लड़की है। मानसिक संतुलन ठीक नहीं होने के बावजूद उसका व्यवहार कभी खराब नहीं रहा। मैं भी तीन साल से आश्रम में ड्राइवर के तौर पर सेवा कर रहा हूं। उसे नजदीक से देखा है इसलिए उसके हालात देखकर उससे लगाव हो गया। सीमा भी जब ठीक होने लगी तो मुझे पसंद करने लगी। हमने आश्रम के मुख्य सेवादार दलजीत खालसा को बताया। फिर परिजनों की सहमति लेकर शादी का निर्णय लिया। अब मैं भी बहुत खुश हूं।”

आश्रम के सेवादार बने माता-पिता और कन्यादान किया…
आश्रम के सेवादार दलजीतसिंह खालसा और उनकी पत्नी जसप्रीत कौर ने दुल्हन सीमा के माता-पिता बनकर आशीर्वाद दिया। इस अनूठे विवाह में आश्रम में रह रहे 142 बेसहारा पुरुष, 70 महिलाएं और 8 बच्चे घराती बने। प्रेम कुमार मेघवाल बारात लेकर आश्रम पहुंचे और फिर हिंदू रीति से शादी संपन्न हुई।

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