500 मीटर के दायरे में सबकुछ जमींदोज, 100 लोग लापता

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हिंडाल्को फैक्ट्री में रेड मड तालाब की दीवार ढही, कीचड़ की नदी में बदला मलबे का 85 फीट का पहाड़ सबकुछ बहा ले गया

500 मीटर के दायरे में सबकुछ जमींदोज, 100 लोग लापता

मुरी/रांची. यहां मुरी स्थित हिंडाल्को कंपनी के रेड मड कॉस्टिक पॉन्ड (तालाब) की दीवार मंगलवार को धंस गई। इस वजह से पॉन्ड की 35 फीट ऊंची दीवार के सहारे लगाया गया मलबे का करीब 85 फीट का पहाड़, कीचड़ की नदी में बदल कर आस-पास के गांवों में पहुंच गया। मलबे का बहाव मुरी-टाटा रेलवे लाइन तक पहुंच गया। इससे 5 घंटे तक ट्रेनों का संचालन बाधित रहा। कई डंपर, हाइवा व अन्य वाहन मलबे में दब गए। आस-पास के गांववालों का कहना है कि 100 से अधिक लोगों का पता नहीं चल रहा है। ग्रामीण आशंका जता रहे हैं कि इन सभी की मलबे में दबकर मौत हो गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हिंडाल्को फैक्ट्री को सील कर दिया है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं।

कई जगह जमीन दरकी, गांवों के तालाबों तक मलबा, लोग भागे
– घटना के बाद रेलवे लाइन के आस-पास के कई इलाकों, यहां तक कि मुरी रेलवे स्टेशन के निकट भी जमीन में दरार आ गई। आस-पास के ग्रामीण पलायन कर रहे हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि लापता हुए करीब 100 लोगों की मलबे में दबने से मौत हो चुकी है।

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कंपनी बोली-सिर्फ 4 लोग घायल हुए
हिंडाल्को के यूनिट हेड नित्यानंद रॉय ने कहा है कि घटना के बाद काम बंद कर दिया गया है। इसमें जान-माल या पर्यावरण की कोई हानि नहीं हुई है। सिर्फ 4 लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं।

डीसी-एसएसपी बोले-अब तक किसी का शव नहीं मिला
– कोई शव नहीं मिला है। 4-5 लोग घायल हैं, सही कैजुएल्टी अभी बताना मुश्किल है। राय महिमापत रे, डीसी, रांची

– पूरे इलाके का सर्वे किया, एक भी बॉडी नहीं मिली है। एनडीआरएफ को इक्यूपमेंट दे दिए गए हैं। सर्च के बाद स्थिति साफ होगी। अनीश गुप्ता, एसएसपी, रांची

सीपीसीबी ने 2017 में बंदकरवाई थी फैक्ट्री, आईआईटी रुड़की और मुंबई ने जांच कर कहा था-मलबे से दुर्घटना की आशंका नहीं

– सीपीसीबी ने रेड मड पॉन्ड में अनियमितता की वजह से 1 जनवरी, 2013 को हिंडाल्को प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस दिया था। इसके बाद सीपीसीबी की टीम ने निरीक्षण में अनियमितताएं देखते हुए ही 7 नवंबर, 2017 को फैक्ट्री को सील करने का आदेश दे दिया था। प्रदूषण नियंत्रण परिषद के सचिव आर.एल. बख्शी ने बताया कि हिंडाल्को को स्वतंत्र एजेंसी से अपने काम की जांच करवानी थी। कंपनी ने आईआईटी मुंबई और आईआईटी रुड़की से जांच करवाई और दोनों ही संस्थानों ने कहा कि मलबे से किसी दुर्घटना की आशंका नहीं है। इसके बाद फैक्ट्री को दोबारा चालू किया गया था।

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