अंतिम सेल्यूट में बोला जुड़वा सैनिक भाई- मैं पाकिस्तान से बदला जरूर लूंगा

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हर कोई रोक रहा था लेकिन बार-बार भाई का चेहरा छूना चाहती थी बहन, कोई पेड़ पर चढ़कर-कोई छत पर जाकर अपने वीर का अंतिम दर्शन करना चाहता

अंतिम सेल्यूट में बोला जुड़वा सैनिक भाई- मैं पाकिस्तान से बदला जरूर लूंगा 

मकराना/नागौर (राजस्थान)पुंछ के शाहपुरा सेक्टर में देश की रक्षा करते हुए रविवार तड़के करीब साढ़े 3 बजे मकराना तहसील के जूसरी गांव निवासी हरि भाकर (21) शहीद हो गए। सोमवार को सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया गया। शहीद के जुड़वां भाई हरेंद्र ने कहा, ‘हरि मेरे जुड़वां भाई थे और मुझसे दो मिनट बड़े भी। मैं अभी जीआरसी जबलपुर में नौ माह की ट्रेनिंग पर हूं। उनका चयन 2016 में हो गया था। वे मुझे बहुत प्यार करते थे। उनमें बचपन से ही देशभक्ति का जज्बा था इसलिए वे पुलिस व सेना की वीरता से जुड़ी फिल्में ही देखते थे और मुझे भी प्रेरित करते थे। पाकिस्तान की नापाक करतूतें सुनकर उनका खून खौल उठता था। भाई से प्रेरित हो मैंने भी सेना में जाने का मन बनाया। 8-9 बार भर्ती रैलियों में शामिल हुआ मगर किसी न किसी कारण रिजेक्ट होता रहा। मैंने उम्मीद छोड़ दी तो भाई ने कहा- तुम्हें सैनिक ही बनना है। सफलता के टिप्स दिए और मेरा चयन हो गया। उस दिन सबसे ज्यादा खुशी अगर किसी को थी तो वे मेरे भाई हरि थे। वे अकसर कहते थे, देश की खातिर मर मिटने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता। जब भी मौका मिले, देश सेवा सर्वोच्च रखना। मेले भी उन्हीं की चिताओं पर लगते हैं। आज भी वही देखा। सही में भाई की चिता पर मेले सा माहौल था। भाई से बिछुड़ने का दुख तो है ही मगर उनकी शहादत पर गर्व भी है। भाई शरीर से पैर अलग होने के कारण खून से लथपथ थे मगर रॉकेट लांचर से गोले दागते रहे और दुश्मन को पटखनी भी दी। आज उन्होंने जो नाम कमाया है, वह बहुत बड़ी संपदा है। पूरे देश को उनके भाई पर नाज है। लेकिन मैं भी बता हूं, जब भी मौका मिला, बदला जरूर लूंगा। भारत मां के हर एक वीर शहीद की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। मैं इन युवाओं से कहना चाहता हूं, कि शहादत का बदला लेने के लिए सेना में भर्ती हों।’

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बर्फीले पहाड़ों पर ऑक्सीजन की भी होती है कमी
शहीद हरि की पार्थिव देह के साथ आए नायब सूबेदार चैनाराम ने बताया कि हरि की ड्यूटी जहां थी वो 10 हजार फीट ऊंचाई पर थी जहां बर्फीले पहाड़ हैं। वहां ऑक्सीजन की भी कमी रहती है मगर हरि में हौसला बहुत था। शहादत से पहले घायल होने के बावजूद दुश्मनों को ललकारते रहे। इतना ही नहीं, लांचर से गोले दाग दुश्मन को नुकसान भी पहुंचाया।

तीन किमी का सफर दो घंटे में किया तय…
हीद हरि भाकर की अंत्येष्टि सोमवार को उनके पैतृक गांव जूसरी स्थित भाकरों की ढाणी में सैन्य सम्मान के साथ हुई। लोगों ने शहीद हरि भाकर और भारत माता के जयकारे लगाए। मुखाग्नि शहीद हरि भाकर के जुड़वां भाई सैनिक हरेंद्र ने दी। तीन किमी लंबी अंतिम यात्रा में दो घंटे का समय लगा। अंतिम यात्रा में आसपास के गांवों के हजारों लोग शामिल हुए। इससे पहले सुबह 9:30 बजे जैसे ही सेना के ट्रक से शहीद हरि की पार्थिव देह उनके घर लाई गई, मौजूद सबकी आंखें नम हो गई। शहीद की बहन भाई का चेहरा बार-बार छूना चाह रही थी। लोग उसे संभालने की कोशिश करते रहे लेकिन वो भाई के ताबूत को नहीं छोड़ना चाहती थी। हरि के छोटे भाई हरेंद्र, पिता पदमाराम, माता कमला, बहन मनोजा सहित परिवार के सभी सदस्यों ने शहीद के अंतिम दर्शन किए। अंत्येष्टि घर के पास ही खेत में देवस्थान के नजदीक किया गया।

शहीद की एक झलक पाने के लिए पेड़ों तक पर चढ़ गए लोग
अंत्येष्टि के समय हर किसी की आंखें नम थी। जैसे ही भाई हरेंद्र ने मुखाग्नि दी, मौजूद हजारों लोगों की भुजाएं फड़क उठीं। मानो दुश्मन को ललकार रही हों और कह रही हों, देख लीजिए, यहां एक नहीं हर घर में हरि पल रहे हैं। बदला लेकर रहेंगे। लोगों के चेहरों पर दुश्मन के प्रति गुस्सा स्पष्ट झलक रहा था। शहीद के परिजनों ने कहा- शहादत पर गर्व है लेकिन सरकार बदला जरूर ले।

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पाकिस्तान की ओर से एक ही जगह दागे गए थे 28 गोले
पुंछ के शाहपुरा सेक्टर में देश की रक्षा करते हुए रविवार तड़के करीब साढ़े 3 बजे मकराना तहसील के जूसरी गांव निवासी हरि भाकर (21) शहीद हो गए। सोमवार को सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया गया। शहीद हरि पिछले माह ही अपने गांव आया था। तब उनकी बहन मनोजा की 9 फरवरी को शादी थी। इसके पांच दिन बाद 14 फरवरी को पुलवामा आतंकी घटना सुनकर उसी दिन शाम को ही वो वापस पुंछ निकल गए।

नायब सूबेदार चैनाराम ने बताया कि शनिवार शाम सवा 6 बजे पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी हुई तो इधर से भी जवाबी कार्रवाई की गई। करीब सवा 1 घंटे तक फायरिंग चलती रही। इस दौरान पाकिस्तान की ओर से एक ही जगह 28 गोले दागे गए। तभी एक गोला दीवार से टकरा कर हरि के लेफ्ट पैर पर गिरा था। हरि रॉकेट लॉन्चर चलाते थे। घायल होने के बावजूद हरि ने गोले दागने शुरू कर दिए और दुश्मन सेना के 4 जवान घायल कर दिए। इसके बाद वे बेहोश हो गए। उपचार के दौरान तड़के साढ़े तीन बजे हरि वीर गति को प्राप्त हो गए।

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