4 दिन बाद घर आई बेटी, पिता की फोटो पर हार चढ़ देख बिलख-बिलख कर रोई

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बीमार पिता के गले लगकर वो बोली- पापा! मुझे आप ही विदा करना, नियति ने खेला ऐसा खेल-विदाई के दिन पिता की मौत; लाडो की खुशियां देख भाइयों ने बंद रखा मुंह, रिसेप्शन में भी शामिल हुए लेकिन…

4 दिन बाद घर आई बेटी, पिता की फोटो पर हार चढ़ देख बिलख-बिलख कर रोई

जोधपुर. दो साल से ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे पीटीआई सुभाषचंद्र कटेवा के मन में भी अपनी लाडली की शादी को लेकर कई अरमान थे। 22 जनवरी को बेटी की शादी थी। इसी बीच सुभाष की तबीयत बिगड़ी और वे हॉस्पिटलाइज हो गए। 21 जनवरी को बेटी की शादी देखने की इच्छा के बाद उन्हें झुंझुनूं बख्तावरपुर स्थित घर लाया गया। जब घर पहुंचे, तो बेटी लिपटकर रोते हुए उनसे बोली- पापा! मुझे आप ही विदा करना। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस दिन लाडली विदा हुई, उसी दिन सुभाष की मौत हो गई।

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बेटी-समधियों को नहीं बताया

घर में इस अनहोनी के बावजूद दोस्तों ने परिवार से हिम्मत रखने को कहा। वहीं, सुभाष की बेटी रीतू और उसके ससुराल वालों को इसके बारे में कुछ नहीं बताया। कारण, 25 जनवरी को जोधपुर में लड़के वालों की ओर से रिसेप्शन था। एक ओर सुभाष के अंतिम संस्कार और रिवाज हो रहे थे। वहीं, दूसरी ओर इस बात से अनजान बेटी का रिसेप्शन हुआ।

पगफेरे के लिए तो पता चला पिता नहीं रहे

26 जनवरी को रीतू पगफेरे के लिए पीहर बख्तावरपुर आई तो उसका हृदय चीत्कार उठा। घर में आते ही जब उसने पिता की माला लगी तस्वीर देखी तो सुध-बुध खो बैठी। सीने को चीरती उसकी रुलाई सुनकर हर कोई बिलख पड़ा। अपने पापा के हाथों से विदा होने का सपना देखने वाली रीतू के सामने दिवंगत पिता की तस्वीर थी। एक पिता बेटी की शादी अपने हाथों से करने का आखिरी अरमान दिल में लिए ही विदा हो चुका था।

जोधपुर में सेटल होना चाहते थे लेकिन…

सुभाष ने जोधपुर में घर बनाने के लिए बनाड़ में प्लॉट भी लिया। पत्नी इंद्रावती अध्यापिका हैं। बेटी एलआईसी में मंडोर ब्रांच में डबल एओ हैं। बेटा अमित सिंडिकेट बैंक जोधपुर जेएनवीयू ब्रांच में पीओ है। सुभाष ने ब्रेन ट्यूमर होने पर 1 वर्ष पूर्व पैतृक गांव ट्रांसफर करवा लिया और वहां रहने लगे। परिवार जोधपुर में रह रहा था। दामाद पवन जालंधर में एलआईसी में डबल एओ हैं।

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