10 साल बाद घर में गूंजने वाली थी किलकारी, देवर के एक कॉल ने खुशियों पर लगाया ग्रहण

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pregnant woman suicide on jumped from fourth floor in bhopal

भोपाल . देवर के एक फोन कॉल के बाद परिवार की खुशियों पर ग्रहण लग गया। निमोनिया से पीड़ित पति की हालत बिगड़ने का पता चलने के बाद सोमवार को 7 महीने की प्रेग्नेंट महिला ने चौथी मंजिल से छलांग लगा दी। पड़ोसियों ने उसे हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां खून से लथपथ हालत में उसने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया और खुद दम तोड़ दिया। तीन घंटे बाद दोनों मासूम बगैर आंख खोले इस दुनिया से चले गए। उनके कुछ देर बाद वेंटिलेटर पर चल रहे पति की भी मौत हो गई। महिला के भाई का कहना है कि उसे लगा कि पति की सांसें थम चुकी हैं। इसलिए उसने यह कदम उठा लिया।

दोनों ने 10 साल पहले की थी लव मैरिज
दिल दहला देने वाली यह घटनाक्रम सोमवार दोपहर करीब दो बजे कोलार के स्वरूप साईंनाथ नगर में हुई। यहां मुलताई के रहने वाले 37 वर्षीय मनोज गोहे पत्नी गायत्री के साथ रहते थे। मनोज कार फाइनेंस का काम करते थे। दोनों ने 10 साल पहले प्रेम विवाह किया था।

पत्नी ने पत्नी को अस्पताल आने के लिए किया था मना
12 नवंबर को मनोज खांसी और बुखार का चैकअप कराने बंसल अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने तकलीफ ज्यादा बढ़ने का हवाला देकर उन्हें भर्ती कर लिया। गायत्री को 7 महीने का गर्भ था, लिहाजा मनोज ने उन्हें अस्पताल आने के लिए मना कर दिया। सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे गायत्री ने अस्पताल में मौजूद देवर तरुण को फोन किया। पति का हाल पूछा तो देवर ने कहा कि भाभी आप अस्पताल आ जाओ।

करीब 40 फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई
गायत्री को अस्पताल लाने के लिए तरुण ने मनोज के पड़ोसी को कार निकालने के लिए कहा था। घर पर अमूमन गाउन पहनकर रहने वाली गायत्री ने सलवार सूट पहना और फ्लैट से बाहर निकल आईं। हल्के-हल्के चलते हुए वह कॉलोनी के गेट से बाहर निकली और तीन प्लॉट छोड़कर एक निर्माणाधीन बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर जा पहुंची और करीब 40 फीट की ऊंचाई से छलांग लगा दी। पहले वह कॉलोनी की बाउंड्रीवॉल पर लगी ग्रिल पर गिरीं फिर सड़क पर आकर गिरीं।

10 साल बाद घर में किलकारी का इंतजार था
गायत्री के बड़े भाई नरेश ने कहा- शादी के 10 साल बाद भी बहन को कोई संतान नहीं थी। शहर और उसके बाहर शायद ही कोई ऐसा स्पेशलिस्ट डॉक्टर बचा हो, जहां मनोज और गायत्री न गए हों। किसी रिश्तेदार ने जानकार बाबा की सलाह दी तो बच्चे की चाह में दोनों उससे भी मिलने पहुंच गए। घर में बेहद खुशियों का माहौल था। गायत्री को 7 महीने का गर्भ था, वो भी जुड़वां। दोनों के परिवारों को इस खुशी का बेसब्री से इंतजार था। भाई ने रोते हुए कहा- कोई इस तरह से जाता है क्या।

भैया, अभी जुड़वा बच्चों के बारे में किसी को भी मत बताना
सालभर पहले भी गायत्री गर्भवती हुई थी। इससे बेहद खुश हुए बड़े भाई नरेश ने नाते-रिश्तेदारों को इसके बारे में बता दिया। कुछ महीने बाद ही गायत्री को मिसकैरेज हो गया। इस बार वह नहीं चाहती थी कि गर्भ में पल रहे दोनों बच्चों के बारे में किसी को बताया जाए। उसने नरेश से कहा था कि भैया दोनों बच्चों के जन्म के बाद सारे नाते-रिश्तेदारों को बुलाकर एक बड़ा सेलिब्रेशन करेंगे। अभी किसी को मत बताना। इस बात का पता केवल गायत्री और मनोज के परिवार को ही था। नरेश ने बताया कि वर्ष 1996 में मम्मी की डेथ हो गई। उस वक्त गायत्री 17 साल की थी। वर्ष 2002 में पापा ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हम दो भाइयों की गायत्री इकलौती बहन थी। उसे कोई अफसोस न रहे इसलिए शादी उसकी पसंद के लड़के से करवाई थी। घर में खुशियां आने वाली थीं, इसलिए मनोज ही गायत्री की पूरी देखरेख करते थे।

हंसों के जोड़े के बारे में सुना था…
रविवार को गायत्री का जन्मदिन था। दोस्त और परिजन फोन और फेसबुक पर बधाई देते रहे। सोमवार रात जैसे ही दोस्तों को गायत्री की मौत की जानकारी मिली, वैसे ही एक दोस्त ने लिखा हंसो के जोड़े के बारे में सुना था, आप दोनों को उनके रूप में देख लिया…

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में हमेशा बच्चे को लेकर डर बना रहता है। इस बीच अगर किसी महिला का पति अस्पताल में भर्ती हो और वह उसकी देखभाल भी नहीं कर पाती तो वह वैसे ही परेशान रहती है। ऐसे में जब महिला को अचानक अस्पताल पहुंचने का संदेश मिलता है तो एक्यूट डिप्रेशन में जाने की आशंका रहती है। शायद इन्हीं परिस्थितयों के कारण यह घटना हुई।

– डॉ. आरएन साहू, एचओडी साइकेट्री डिपार्टमेंट, जीएमसी