सरकारी स्कूल में पढ़े, उस दौरान गांव में कोचिंग भी नहीं थी

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3 नौकरी मिलीं लेकिन सबको ठुकरा दिया क्योंकि कर रखी थी एक जिद…सिर्फ IAS बनना था, ऐसे की तैयारी कि 1st अटेंप्ट में ही IAS बन गया यह शख्स

सरकारी स्कूल में पढ़े, उस दौरान गांव में कोचिंग भी नहीं थी

सोलापुर (महाराष्ट्र) देश आज 70वां गणतंत्र दिवस (Republic Day 2019) मना रहा है। इस मौके पर सक्सेस स्टोरी सीरीज में हम आपके लिए लाए हैं एक ऐसे IAS अफसर शिवप्रसाद मदन नकाते की कहानी, जो महाराष्ट्र के एक गांव से आते हैं। इन्होंने 3 नौकरियां ठुकराने के बाद 1st अटेंप्ट में IAS के लिए एग्जाम क्लीयर किया। आइए जानते हैं इनके बारे में….

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किसान परिवार में हुआ जन्म

– महाराष्ट्र में सोलापुर जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर गांव माडा के साधारण किसान परिवार में शिवप्रसाद मदन नकाते का जन्म हुआ था। वहीं बचपन गुजरा।

– वे बताते हैं कि उनके पिता मदन नकाते एक सामान्य किसान और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। बचपन में पिताजी को लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों में जाते देखा था। इससे प्रेरणा मिली।
– ठेठ ग्रामीण परिवेश में माडा गांव के सरकारी स्कूल में मराठी मीडियम में 10वीं तक पढ़ाई की तो इसी दौरान यूपीएससी का सिविल सर्विसेज का एग्जाम क्लीयर कर आईएएस बनने का सपना देखा।

अखबार पढ़ने की आदत बनी मददगार…

– वे बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान एक बार बीडीएस और दूसरी बार एमटेक करने के लिए आईआईटी में एंट्रेस टेस्ट पास किया। पैरेंट्स की इच्छा थी कि मैं डॉक्टर बनूं। ताकि गांव के पास किसी शहर में रह कर डॉक्टरी करने के साथ अपनी पुश्तैनी खेती करवा सकूं।
– आईएएस बनना था तो न तो बीडीएस में एडमिशन लिया और न ही आईआईटी में। गांव से होने की वजह से कभी कोचिंग करने का मौका नहीं मिला। आत्मविश्वास के साथ ही सेल्फ स्टडी पर जोर दिया।
– इस दौरान फोन से भी दूर रहा, ताकि तैयारी पर फोकस कर सकूं। हां, स्कूल टाइम में पिताजी द्वारा अखबार पढ़ने की सिखाई आदत मेरे लिए कंपीटिशन फाइट करने में मददगार बनी।

पहले ही प्रयास में बने IAS अफसर

– वे बताते हैं कि समाचार पत्र और पत्रिकाओं के अलावा रोज 10 घंटे तक सिलेबस की किताबों को पढ़ता था। 2010 में महाराष्ट्र प्रशासनिक सेवा, राज्य वन सेवा और सेंट्रल पुलिस फोर्स में असिस्टेंट कमांडेंट पद पर सिलेक्शन हुआ।
– उन्होंने कहा कि पर मेरा लक्ष्य आईएएस बनना ही था। इस वजह तीनों में से कोई नौकरी ज्वाइन नहीं की। इसी दौरान महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाए 50 अभ्यर्थियों के बैच के साथ रहकर सेल्फ स्टडी के साथ सिविल सर्विसेज की तैयारी की।
– साल 2010 में एग्जाम दिया और पहले प्रयास में ही पास कर 2011 में सिविल सर्विस ज्वाइन की। शिवप्रसाद मदन नकाते वर्तमान में राजस्थान के श्रीगंगानगर में कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट पद पर हैं।

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