वापस लौटकर देखा तो ट्रैक के दोनों साइड 50 मीटर तक बिखरे पड़े थे दोस्तों के अंग

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4 youths jump to death in front of train because of unemployment depression

अलवर (राजस्थान)। 4 जिगरी दोस्तों ने मंगलवार देर रात सामूहिक रूप से ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। ट्रेन से कटकर 3 युवकों 24 वर्षीय मनोज मीणा, 22 वर्षीय सत्यनारायण उर्फ ड्यूटी मीणा, 17 वर्षीय रितुराज उर्फ ऋषि मीणा के चीथड़े उड़ गए, जबकि गंभीर घायल 22 वर्षीय अभिषेक मीणा को जयपुर रैफर किया गया है। मृतक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। यह घटना अलवर-जयपुर रेलवे ट्रैक पर शहर में एफसीआई गोदाम-शांतिकुंज के बीच की है। सामूहिक आत्महत्या के लिए 6 युवक रेलवे ट्रैक पर पहुंचे थे, इनमें से 4 ने ट्रेन के आगे छलांग लगाई और 2 युवक राहुल और संतोष डर के कारण भाग खड़े हुए।

नग्न होकर पहुंचे दादा, कहा- ‘अब मैं बुड्डा हो गया हूँ ज्यादा दर्द नहीं होगा…

एक दोस्त ने कहा- नौकरी नहीं मिल रही, हम तो मरेंगे…, जिंदा बचे दोस्त ने इसे मजाक समझा…

घटना से बच गए युवक राहुल मीणा ने बताया, ”शाम करीब 6.30 बजे मेरे मोबाइल पर सत्यनारायण का फोन आया। उसने मुझे शांतिकुंज के पास रेलवे ट्रैक पर बुलाया। मैं वहां पहुंचा। वहां सत्यनारायण, मनोज, रितुराज, अभिषेक व संतोष मीणा सिगरेट पीते मिले। सत्यनारायण ने मुझसे कहा- हम जीवन से हताश और ऊब चुके हैं। न तो हम खेती कर सकते हैं और न हमारी नौकरी लग सकती है। मैंने पूछा- फिर क्या करना चाहता है। उसने जवाब दिया- हम तो मरेंगे। मैंने कहा- मजाक मत करो यार। मैंने टोकते हुए कहा- हम जिस ट्रैक पर बैठे हैं, इस पर ट्रेन आने वाली है। इसके बाद सभी पास में दूसरे निर्माणाधीन ट्रैक पर जाकर बैठ गए। सिगरेट पीने के साथ मजाक करने लगे। बातों में करीब आधा घंटा गुजर गया। मैंने कहा- सुबह से कुछ खाया नहीं। इस पर अभिषेक बोला- मेरे पास एटीएम कार्ड है। हम होटल में खाना खाएंगे। इसी दौरान ट्रेन के हॉर्न की आवाज सुनाई दी। इसी बीच सत्यनारायण ने मोबाइल पर अपनी बहन से बात की। मनोज, रितुराज व अभिषेक दूर खड़े होकर मोबाइल पर बात करने लगे। मैं और संतोष बैठे थे। जैसे ही ट्रेन पास आई सत्यनारायण, मनोज, रितुराज व अभिषेक ने एकसाथ भागकर ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। उनके चीथड़े उड़ गए। यह देखकर मैं और संतोष डर गए। दोनों वहां से भाग खड़े हुए। मैं अभिषेक के कमरे पर पहुंचा और उसके भाई नरेश को पूरी घटना बताई। इसके बाद बाइक से हम लोग रेलवे स्टेशन पहुंचे। आरपीएफ थाने से पूछा तो उन्होंने ऐसी किसी घटना के बारे में अनभिज्ञता जताई। हमने अन्य दोस्तों को कॉल करके बुलाया और चारों दोस्तों की तलाश की। 50 मीटर तक 3 दोस्तों के शव बिखरे पड़े मिले। अभिषेक रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों में घायल मिला। इसके बाद हमने रात करीब 11.20 बजे पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी।”

रात 11.30 बजे पुलिस को मिली सूचना

पुलिस को इस घटना की जानकारी मंगलवार रात करीब 11.30 बजे मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने रेलवे ट्रैक पर क्षतविक्षत हालत में पड़े मृतक मनोज, सत्यनारायण, रितुराज के शव मोर्चरी में भिजवाए जबकि गंभीर घायल अभिषेक को एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया, बाद में उसे जयपुर रैफर कर दिया गया।

50 फुट दूर तक मिले मृतकों के अंग

पुलिस ने बताया कि अंधेरा होने के कारण मृतकों के शरीर के अंग ढूंढ़ने में काफी देर लगी। मौके से करीब 50 फुट दूर तक रेलवे ट्रैक के दोनों साइड मृतकों के अंग पड़े मिले। अभिषेक घायल अवस्था में ट्रैक के पास झाड़ियों में मिला।

डॉक्टर बोले- डिप्रेशन में आने पर पैदा होती है सुसाइड की भावना

राजीव गांधी सामान्य अस्पताल की क्लीनिकल साइक्लॉजिस्ट डॉ. निहारिका सैनी का कहना है कि डिप्रेशन में आने पर सुसाइड की भावना पैदा होती है। ऐसा लगता है कि जिंदगी में अब कुछ नहीं बचा। हर तरफ जीवन जीने का तरीका गलत नजर आने लगता है। भविष्य के प्रति भी निगेटिव सोचने लगते हैं। डर की भावना से ग्रसित हो जाते हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवक जब कुछ नंबरों से रह जाते हैं या उनके मुताबिक- परिणाम नहीं मिलता तो वे अपने प्रति हीन भावना से ग्रसित हो जाते हैं। स्वयं आंकलन शुरू कर देते हैं और डिप्रेशन में आ जाते हैं।

उपाय : कोई व्यक्ति डिप्रेशन में है या अकेला महसूस कर रहा है। या फिर वो जिंदगी के प्रति बार-बार निगेटिव नजरिया बताता हैं, तो ऐसे लोगों को मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। ये समस्या निगेटिव सोच से पैदा होती है। सोचने का नजरिया पॉजिटिव रखना चाहिए। जिंदगी से हार मान लेना किसी समस्या का हल नहीं है। खुद को काम में व्यस्त रखें और परिवार के साथ बैठकर बातचीत के जरिए पॉजिटिव सोच रखेंगे तो इससे उबर जाएंगे।