लड़कियों के कपड़े उतारकर चेक किया कि किसे पीरियड्स हैं

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मध्य प्रदेश का सागर जिला. आपने व्यापमं के सिलसिले में इसका नाम सुना होगा. हम आपको ये जगह याद रखने की नई वजह दे रहे हैं. यहां डॉक्टर हरि सिंह गौर यूनिवर्सिटी है. यूनिवर्सिटी का एक गर्ल्स हॉस्टल है. रानी लक्ष्मीबाई हॉस्टल. यहां हॉस्टल के बाथरूम में एक यूज्ड सैनेटरी पैड मिला. सैनेटरी पैड, जिसका इस्तेमाल माहवारी के दौरान खून सोखने के लिए किया जाता है. किसी लड़की ने पैड इस्तेमाल करने के बाद उसे वहां फेंक दिया था. साथ में फर्श पर खून के धब्बे भी थे. जो शायद पैड बदलने के दौरान उस लड़की की योनि से नीचे टपके होंगे. वॉर्डन को इसके बारे में पता लगा. वो भड़क गईं. उन्होंने केयरटेकर को बुलाकर सारी लड़कियों की तलाशी लेने का फरमान दिया. ताकि पता लगाया जा सके कि किस लड़की को माहवारी हो रही है. ताकि बाथरूम में इस्तेमाल किया हुआ पैड छोड़ने वाली लड़की को खोजा जा सके. और जिम्मेदारी तय की जा सके.

ये तलाशी कैसे हुई?

हॉस्टल के उस विंग की सारी लड़कियों के कपड़े उतरवाए गए. तलाशी ली गई कि किस-किस को माहवारी हुई है.

केयर टेकर को निकाला, वॉर्डन के खिलाफ जांच बिठाई
ये शुक्रवार की घटना है. हॉस्टल की लड़कियां दो दिन तक चुप रहीं. रविवार को करीब 30-35 लड़कियां यूनिवर्सिटी के कुलपति आर पी तिवारी के घर पहुंचीं. उन्होंने अपने साथ हुई बदसलूकी की शिकायत की. वॉर्डन और केयर टेकर की शिकायत की. केयर टेकर को नौकरी से निकाल दिया गया. लेकिन वॉर्डन फिलहाल बची हुई हैं. उनके खिलाफ जांच बिठाई गई है. उनका कहना है कि जो हुआ, वो उन्होंने नहीं कराया.

हैरेसमेंट सेल की चेयरमैन भी हैं ये वॉर्डन
रानी लक्ष्मीबाई हॉस्टल में करीब 187 लड़कियां रहती हैं. वॉर्डन हैं चंदा बेन. हिंदी विभाग की प्रफेसर हैं. और तो और, यूनिवर्सिटी की महिला उत्पीड़न कमिटी की चेयरमैन भी हैं. जिसके वॉर्डन रहते हॉस्टल में ऐसा घिनौना काम हुआ हो, उसे महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़े मामलों में न्याय दिलाने का जिम्मा सौंपा हुआ है. हैरेसमेंट सेल की जिम्मेदारी उठाने वाली की नाक के नीचे लड़कियों का इस तरह हैरेसमेंट हो रहा है. लानत है. यूनिवर्सिटी को ‘बधाई’ पहुंचे.

कैसे पता चलता कि बाथरूम में मिला खून किस लड़की का है?
हमको वॉर्डन से सवाल करना है. कि जब वो केयर टेकर को लड़कियों की तलाशी लेने को कह रही थीं, तो उनकी मंशा क्या थी? तलाशी कैसे होती है? क्या कोई स्कैनिंग मशीन है वहां. जो देखकर बता दे कि फलां लड़की को पीरियड्स हुए हैं. या वो चाहती थीं कि केयर टेकर लड़कियों की सलवार और पैंट टटोले. आगे-पीछे छूकर पता लगाए कि किसने सैनेटरी पैड लगाया हुआ है और किसने नहीं. या फिर खून देखकर पता लग जाता. कि वो किसकी योनि से निकलने वाले खून जैसा है?

आप लड़कियों को जागरूक कर सकते हैं. उन्हें समझा सकते हैं कि साफ-सफाई क्यों जरूरी है. उन्हें बता सकते हैं कि इस्तेमाल किए गए पैड्स को इधर-उधर फेंकना उनकी सेहत पर असर डाल सकता है. लेकिन आप उनके कपड़े कैसे उतरवा सकते हैं? इतना कूड़ा दिमाग कैसे हो सकता है किसी का.

एक से ज्यादा लड़कियों को साथ माहवारी हो रही होगी, तो?
एक और सवाल है. एक से ज्यादा लड़कियों को माहवारी हो रही होगी, तो फैसला कैसे होगा? कि बाथरूम में मिला सैनेटरी पैड जिस कंपनी का है, उस कंपनी का पैड किस लड़की ने लगाया हुआ है? और अगर यहां भी एक से ज्यादा लड़कियां मिलतीं, तो? तो उनके खून की जांच कराई जाती? यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर दिए गए नंबरों पर हमने फोन मिलाया. 15 मिनट तक कोशिश की, लेकिन फोन नहीं मिला. इसीलिए कोई जवाब भी नहीं मिला.

इतनी बेहूदगी कहां से आती है दिमाग में?
गर्ल्स हॉस्टल में लड़कियां होती हैं. इस नाम पर महिला वॉर्डन को उनके साथ मनचाही बदसलूकी करने का लाइसेंस मिल जाता है? कि एक औरत ही तो चेकिंग कर रही है! औरत ने ही तो कपड़े उतरवाए! यूज्ड पैड को ऐसे नहीं फेंकना चाहिए. डस्टबिन में डिस्पोज करना चाहिए. साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए. लड़कियों को ये सब समझाने के लिए इतना बेहूदा तरीका? कोई इतना जाहिल कैसे हो सकता है? सच में, संवेदनशीलता कॉमन सेंस से भी ज्यादा दुर्लभ है.

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