ब्रेकिंग न्यूज़- अब नाबालिग लड़कियों से रेप मामले में होगी ऐसी सज़ा, जानिए कैबिनेट मीटिंग की अहम बातें

0
135
Posco Act

देश में आए दिन हो रहे नाबालिग बच्चियों से बलात्कार को लेकर आज यानि शनिवार को एक अहम बैठक हुई जिसमें कुछ अहम फैसले लिए गए। ये बैठक पीएम मोदी के नेतृत्व में हुई और इस बैठक में पाक्सो यानि protection of children against sexual offences एक्ट में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
Advertisement





बैठक में हुए अह्म फैसले
कठुआ से लेकर सूरत, एटा, छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों में हर रोज़ बच्चियों के साथ बलात्कार के जो दिल दहला देने वाले मामले आ रहे हैं, इस तरह की घटनाओं के बाद पूरे देश में जो गुस्सा है उसे देखते हुए केंद्र सरकार आज 12 साल से कम उम्र के बच्चियों से रेप के मामले में मौत की सज़ा के प्रावधान को मंज़ूरी दे दी है। मोदी सरकार ने फांसी की सजा दिए जाने के लिए उस अध्यादेश को मंजूरी दे दी है जिसके तहत पॉक्सो एक्ट में संशोधन कर इसे कानूनी अमली जामा पहनाया जाएगा। इसके लिए जल्द ही अध्यादेश जारी होगा। इसे मंजूरी के लिए अब राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। कैबिनेट ने रेप के मामलों में तेज जांच और सुनवाई की समयसीमा भी तय कर दी है।
Posco Act
निर्भया केस के बाद बदलाव की मांग
16 दिसंबर को निर्भया रेप और मर्डर केस में बाद देश में संसद से सड़क तक पर रेप कानून में बदलाव के लिए लोगों ने आवाज उठाई थी, तब रेप कानून में सख्त सजा का प्रावधान किया गया था और इसके तहत रेप विक्टिम मरनासन्न अवस्था में पहुंच जाए तो फांसी की सजा का प्रावधान किया गया था।
विदेश से आते ही बैठक
नाबालिगों के साथ वारदातें बढ़ने से पूरे देश में उबाल था और मामले का गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ही लंदन के दौरे से लौटकर आए तो आते ही कैबिनेट बैठक बुला ली। प्रधानमंत्री आवास पर यह बैठक करीब 2 घंटे तक चली और उसके बाद अहम फैसला लिया गया।
Advertisement





जानिए बैठक की कुछ अहम बातें और बदलाव

कानून में बदलाव?
16 साल या उससे कम उम्र की लड़की से रेप करने वाले के लिए 10 साल की सजा का प्रावधान था मगर न्यूतम सजा में इसे बढ़ाकर 20 साल कर दिया गया है। दोषी को उम्रकैद भी दी जा सकती है। इतना ही नहीं, अध्यादेश में यह भी प्रावधान किया गया है कि 12 साल से कम उम्र की लड़की से रेप के दोषी को न्यूनतम 20 साल की जेल या उम्रकैद या मौत की सजा दी जाएगी।
new Child abused rule
न्यूतम सज़ा के मुताबित जैसी ही अध्यादेश जारी हो जाएगा 12 साल से कम उम्र के बच्चों से रेप के दोषी को अदालतें मौत की सजा दे सकेंगी।

गौरतलब है कि इस तरह का प्रवाधान बनाना अब समय और जनता की मांग बन चुकी थी। कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी और उसके बाद लगातार बढ़ते नाबालिगों के साथ रेप मामले से केंद्र सरकार कटघरे में खड़ी हो गई थी। देश में कई जगहों पर इसको लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं।

कैबिनेट के फैसले की कुछ खास बातें-

Criminal Law (Amendment) Ordinance, 2018 के जरिए सरकार रेप के मामलों में सख्ती के साथ महिलाओं और खासतौर से देश की बेटियों में सुरक्षा की भावना पैदा करना चाहती है। कैबिनेट मीटिंग में रेप की हालिया घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कैबिनेट ने अध्यादेश लाने का फैसला किया है।

महिलाओं से रेप के मामले में सजा 7 साल तक थी जो अब बढ़ाकर 10 साल तक कर दी गई है, इसे उम्र कैद में भी बदला जा सकता है।
16 साल से कम उम्र की लड़की से गैंगरेप की सजा को निरपवाद रूप से ताउम्र जेल किया गया है।

वहीं, 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ हैवानियत पर नई सजा के मुताबिक 20 साल या ताउम्र जेल या मौत की सज़ा दी जा सकती है। वहीं इसी मामले में गैंगरेप पर ताउम्र जेल या मौत की सजा दी जाएगी।
Child abused rule
फास्ट ट्रैक सुनवाई
बैठक में एक और अहम फैसला लिया गया जिसमें ये तय किया गया है कि रेप के सभी मामलों में जांच जल्द से दल्द होगी। केंद्र सरकार ने अब एक समयसीमा तय कर दी है जिसके अनुसार मामले की सुनवाई और जांच 2 महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
Advertisement





अग्रिम ज़मानत का प्रावधान नहीं

16 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप या गैंगरेप के आरोपी के लिए अग्रिम जमानत का कोई प्रावधान नहीं होगा। हाई कोर्ट और राज्यों से चर्चा के बाद नई फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी। सभी थानों और अस्पतालों को रेप के मामलों के लिए स्पेशल फरेंसिक किट्स दिए जाएंगे।

राजस्थान सरकार ने इसी साल मार्च में 12 साल तक की बच्चियों के साथ दुष्कर्म के दोषियों को मौत की सजा वाले कानून को मंजूरी दी थी। इससे पहले मध्यप्रदेश ऐसा कानून बनाने वाला पहला राज्य था। वहीं, हरियाणा में इससे जुड़े प्रावधान को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

गौरतलब है कि दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल पिछले नौ दिनों से अनशन पर थी और उनकी यही मांगे थी कि नाबालिग बच्चियों के साथ रेप मामले में फांसी की सज़ा हो और साथ ही रेप की सुनवाई और जांच की पूरी प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो।