बेटी बोली- मां-बाप जीवित थे तो सब आते थे, अब संबंधियों ने भी नाता तोड़ लिया

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दौसा (राजस्थान)। कुछ समय पहले भरा पूरा परिवार था, लेकिन नियती की ऐसी क्रूर मार हुई कि पिता की मौत के बाद ही मां ने मौत को गले लगा लिया। ऐसे में तीन बेेटियां अनाथ हो गईं। जीवन यापन का कोई सहारा नहीं होने के कारण रोजाना तीनों बहनें दिन की भूख तो स्कूल में पोषाहार खाकर मिटा लेती हैं, लेकिन सायं को आसपास के घरों से रोटी मांगकर एक वर्ष से अपने पेट की आग बुझा रही हैं।

कमलेश कुमार शर्मा, अणत राम, कैलाश शर्मा ने बताया कि ग्राम पंचायत गोठड़ा के ब्राह्मणों का बास बैरवा ढाणी निवासी श्रवणलाल बैरवा की टीबी की बीमारी से डेढ़ वर्ष पहले मौत हो गई थी। उसकी पत्नी ललिता देवी भी टीबी से पीड़ित थी। गरीबी के कारण बच्चों की परवरिश करने में असमर्थ होने के कारण उसने चाकू से अपना गला रेत कर जीवन लीला समाप्त कर ली। सभी समाजों के लोग जनसेवा के लंबे दावे तो करते हैं लेकिन आज तक इन अनाथ बेटियों की किसी ने सुध नहीं ली। गांव के लोग ही जो कुछ सहायता बनती है वो कर देते हैं।

व्यथा : माता-पिता की मौत के बाद सगे संबंधियों ने भी मुंह मोड़ा
बड़ी बेटी रेखा बैरवा ने बताया कि मां-बाप जीवित थे तब तो मामा-मामी सगे संबंधी सब आते-जाते रहते थे। मां-बाप की मौत होने के दिन से आज तक न तो मामा-मामी आए और न ही रिश्तेदार। रहने के लिए एक कमरा तो है लेकिन खाने-पीने के लिए कोई सहारा नहीं है।

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पढ़ाई के लिए नहीं, भूख शांत करने को जाती है तीनों बहनें स्कूल
गरीबी में पढ़ाई तो नहीं होती है पर क्या करें पेट भरने के लिए रोजाना तीनों बहनें स्कूल जाती हैं। दिन में वहां बनने वाले मिडडे मिल से भूख मिटा लेते हैं और सायं आस-पड़ोस में जाकर रोटी मांग कर ले आते हैं। उसी को खाकर रात बिता लेते हैं।

स्कूल में छुट्‌टी तो दिन में रहना पड़ता है भूखे
रेखा (12) अनिता (8) व प्रीती (4) ने बताया कि स्कूल में पढ़ने वाला हर बच्चा छुट्टियां आने की इंतजार में खिलखिलाता है, लेकिन हम तीनों बहनों को एक ही चिंता सताती है कि स्कूल में छुट्टी होगी तो भूखे ही दिन गुजारना पड़ेगा। दूसरे बच्चों को देखकर ही जता लेते हैं खुशी : तीनों बहिनों ने बताया कि गांव के सभी बच्चे त्योहारों परने नए कपड़े पहनते हैैं। उन्हें पड़ोसियों के दिए पुराने कपड़े पहन कर ही संतोष करना पड़ता है।

पालनहार योजना में नाम के लिए कई बार आवेदन किया, लेकिन नहीं मिला लाभ
पड़ौसी महेन्द्र कुमार ने बताया कि मां-बाप की मृत्यु के बाद तीनों बच्चियों की पालनहार योजना में नाम जुड़वाने के लिए 9-10 बार प्रधानाध्यापक से फार्म भरवाकर समाज कल्याण विभाग में जमा करा आए लेकिन इन्हें पालनहार योजना का लाभ नहीं मिला।

मामला मेरी जानकारी में नहीं है। जांच कराकर योजना का लाभ देंगे।

– डॉ. गोवर्धनलाल शर्मा, एसडीएम

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