डॉ. नहीं थे तो नर्स ने ही दे दिया इंजेक्शन, तुरंत बाद खून की उल्टियां करता हुआ…

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सूरत। पांडेसरा के हरिओम नगर में भाजपा पार्षद डॉ. डीएम वानखेड़े के साई क्लीनिक में सीने में दर्द लेकर आए एक मरीज की मौत हो गई। उस समय क्लीनिक पर कोई डॉक्टर नहीं था। ऐसे में वहां मौजूद नर्स ने ही उसे एक इंजेक्शन दे दिया। इसके तुरंत बाद मरीज खून की उल्टियां करता हुआ बाहर भागा और वहीं फर्श पर गिर गया। कुछ देर में ही उसकी मौत हो गई। यह देख परिजनों ने वहां हंगामा कर दिया। पुलिस भी पहुंच गई।

गुस्से में लोगों कोे डॉक्टर को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा
बचाव में आए एक डॉक्टर को लोगों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इतना ही नहीं, मामले को दबाने के लिए डॉ. वानखेड़े ने 108 एंबुलेंस को बुला लिया और मरीज महेश को उसमें लिटा दिया। लेकिन, उसे देखते ही एंबुलेंस कर्मियों ने बता दिया कि इसकी मौत हो चुकी है। इसके बावजूद डॉक्टर ने फिर उसे जिंदा बताते हुए एंबुलेंस में लिटा दिया। इस पर फिर कर्मियों ने मरीज को मृत बताया और शव को वहीं छोड़कर चले गए। करीब 4 घंटे तक इलाके में हंगामा चलता रहा। पुलिस ने लोगों को वहां से हटाने के लिए लाठियां भी फटकारीं। सिविल अस्पताल में हुए पोस्टमार्टम में यह साफ हो गया है कि मृतक को हार्ट अटैक आया था और उसके हार्ट की नसें ब्लॉक हो चुकी थीं, जिससे उसकी मौत हुई। हालांकि अभी तक पुलिस ने किसी के भी खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया है।

नर्स ने डाइक्लोफेनिक इंजेक्शन देकर कोई गलती नहीं की
नर्स नई नहीं है। उसके पास डिग्री है और वह 20 साल से इलाज कर रही है। उसने मरीज को डाइक्लोफेनिक इंजेक्शन देकर कोई गलती नहीं की। एंबुलेंस बुला दी थी, परिजन उसे बड़े अस्पताल ले जाते तो वह बच जाता।
-डॉ. डीएम वानखेड़े, क्लीनिक मालिक, भाजपा पार्षद

स्ट्रोक तक हो सकता है हार्ट पेशेंट को डाइक्लोफेनिक से
दुनियाभर में हुई दर्जनों स्टडीज में यह साबित हो चुका है कि दर्द निवारक डाइक्लोफेनिक कंटेट की दवा या इंजेक्शन हार्ट और किडनी मरीजों के लिए सुरक्षित नहीं है। इससे हार्ट अटैक और हार्ट स्ट्रोक जैसे रिएक्शन हो सकते हैं। लंबे समय तक या ज्यादा डोज की ऐसी दर्द निवारक दवा लेने से खतरा और बढ़ सकता है। 100 एमजी से ज्यादा का डोज खतरनाक हो सकता है।

हार्ट अटैक से हुई मौत, इंजेक्शन का पता एफएसएल से चलेगा

शव का सिविल अस्पताल में फॉरेंसिक पोस्टमार्टम किया गया। शव से विसरा लेकर एफएसएल भेज दिया गया। पीएम में प्राथमिक जांच में पता चला कि मौत हार्ट अटैक से हुई है। अब हार्ट अटैक इंजेक्शन के कारण से आया या किसी और और कारण से, इसका एफएसएल की रिपोर्ट से पता चलेगा। इसमें साफ होगा कि दवा से शरीर में क्या साइड इफेक्ट हुए। हार्ट पर कैसा प्रभाव पड़ा। दवा से अटैक आया या फिर पहले ही अटैक आ चुका था। सिविल के फॉरेंसिक विभाग के प्रोफेसर डॉ. चंद्रेश ने बताया कि हार्ट की नसें ब्लॉक हो गई थीं, जिसकी वजह से अटैक आ गया।

एफएसएल से पता चलेगा
– पहले से तो कोई केमिकल और दवा तो नहीं थी
– किडनी, लीवर, लंग्स और ब्लड में इंजेक्शन का क्या प्रभाव हुआ
– डॉ. वानखेड़े ने अपना भाजपा पार्षद संपर्क कार्यालय भी क्लीनिक को ही बना रखा है।
– इंजेक्शन से क्या एलर्जी हुई
– हार्ट पर इंजेक्शन का क्या प्रभाव पड़ा
– इंजेक्शन से अटैक आया या फिर पहले ही अटैक आ चुका था

डायक्लोफेनिक से बढ़ता है ब्लड प्रेशर हो सकती है एलर्जी : कार्डियोलॉजिस्ट
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण कहाले ने बताया कि डायक्लोफेनिक इंजेक्शन से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। एक डोज में हार्ट अटैक आ जाए यह कहना मुश्किल है। लेकिन, एलर्जी हो सकती है। अब वह एलर्जी कितनी घातक है, यह उसके शरीर पर निर्भर करता है। लगातार कई दिन से यह डोज देने पर हार्ट अटैक में हुए घाव जल्दी नहीं भरता, पेट में अल्सर होने लगता है। अटैक में हीलिंग कम हो जाती है। किडनी फेल हो सकती है। इसलिए हार्ट के मरीज को बिना डायग्नोस किए कोई भी इंजेक्शन और दवा देना ठीक नहीं है। यह रिस्की हो सकता है। वहीं शहर के मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जसवंत पटेल ने बताया कि हार्ट अटैक के मामले में पेन किलर भी देना ठीक नहीं है, यह कोई काम नहीं करती। दो दिन से सीने में दर्द होता है तो अटैक आने का चांस कम ही है, लेकिन ऐसे केस भी हो सकते हैं जब यह स्थिति बनी हो। हार्ट अटैक में बिना जांच कोई भी दवा ठीक नहीं है।

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