जिस जिन्ना की तस्वीर ने मचाया है बवाल उन्हीं से जुड़ी कुछ बातें

0
137
muhammad-ali-jinnah

AMU का कैम्पस 2 मई, 2018 को “एएमयू के ग़द्दारों को, जूते मारों **** को, भारत में जिन्ना का ये सम्मान…नहीं चलेगा-नहीं चलेगा, जय श्री राम-जय श्री राम, भारत में यदि रहना होगा, वंदे-मातरम कहना होगा” ऐसे नारों से गूँज रहा था।” छात्रों के बीच बढ़ती हिंसा को देख पुलिस को वहां लाठी चार्ज करना पड़ा। इसमें कई विरोध प्रदर्शक घायल हो गए।भारत को अभी तक कृषि प्रधान देश कहा जाता है मगर यही आलम रहा तो कुछ दिनों में इसे विरोध प्रधान देश कहा जाने लगेगा। अब आप सोच रहे होंगे कि माजरा क्या है? तो जनाब मामला बिल्कुल किसी स्कूल के बच्चों की लड़ाई जैसा है। एक तस्वीर है जिसे आधे स्टूडेंट्स अपने कॉलेज में लगाए रखना चाहते हैं और आधे उसे हटाना चाहते हैं। दौर हीरो बनने का चल रहा है तो कोई किसी की बात सुनने को तैयार नहीं है। बच्चे आपस में लड़े जा रहे हैं और सोशल मीडिया पर देश उनका तमाशा देख रहा है।

जिस तस्वीर पर ये पूरा झगड़ा चल रहा है वो तस्वीर मोहम्मद अली जिन्ना की है। जिन्ना वही इंसान थे जिन्हें आधे लोग भारत-पाकिस्तान बंटवारे का विलन मानते हैं और आधे लोग हीरो। आपने भी ये नाम कई बार सुना होगा। बहरहाल हम यहां किसी को हीरो या विलन नहीं बता रहे। केवल आपके लिए लाए हैं जिन्ना से जुड़ी कुछ बातें।

मामला अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का

jinnahs-portrait

जिन्ना की फोटो का ये मामला उत्तरप्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का है। बीजेपी सांसद सतीश गौतम को जब ये बात पता चली कि छात्रसंघ हॉल में 1938 से आज 2018 तक मोहम्मद अली जिन्ना की फोटो लगी हुई है तो उनका खून खौल उठा। उन्होंने कॉलेज के VC से उसे हटाने की मांग कर दी।

आपस में भिड़ने वाले बच्चे

amu protest

इसके बाद जिन्ना की फोटो की खबर युवा वाहिनी सेना को लगी और वे भी यूनिवर्सिटी के बाहर विरोध जताने के लिए जमा हो गए। विरोध के दौरान यूनिवर्सिटी के छात्र तस्वीर को लगाए रखने के लिए उनसे भिड़ गए। छात्रों का कहना है कि जिन्ना हमारे लिए आर्दश भले ही ना हों लेकिन भारतीय इतिहास का हिस्सा हैं।

Advertisement



गूंजे ऐसे नारे

aligarh university

AMU का कैम्पस 2 मई, 2018 को “एएमयू के ग़द्दारों को, जूते मारों **** को, भारत में जिन्ना का ये सम्मान…नहीं चलेगा-नहीं चलेगा, जय श्री राम-जय श्री राम, भारत में यदि रहना होगा, वंदे-मातरम कहना होगा” ऐसे नारों से गूँज रहा था।” छात्रों के बीच बढ़ती हिंसा को देख पुलिस को वहां लाठी चार्ज करना पड़ा। इसमें कई विरोध प्रदर्शक घायल हो गए।

लग गई धारा 144

aligarh university

शुक्रवार को भी हजारों की संख्या में छात्र AMU सर्कल के बाहर जमा हो गए थे। इतने लोगों को साथ देखकर पुलिस प्रशासन ने अलीगढ़ में धारा 144 लगा दी है। इंटरनेट को भी 5 मई तक के लिए बंद कर दिया है। बहरहाल फिलहाल बात जिन्ना की।

पाकिस्तान के ‘कायदे आजम’

aligarh university

जिस तरह हमारे देश नोटों में गांधी जी छपे होते हैं। उसी तरह पाकिस्तान के नोटों में पाए जाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना का जन्म 25 दिसंबर 1876 को कराची के एक बड़े व्यापारिक घराने में हुआ था। उस दौर में पढ़े-लिखे लोगों की बहुत इज्जत हुआ करती थी इसलिए जब जिन्ना इंग्लैंड से कानून की पढ़ाई करके 1896 में वकालत करने मुंबई (बंबई) लौटे तो कम वक्त में ही उन्होंने खूब नाम कमा लिया था।

मॉडर्न ख़यालात के थे जिन्ना

amu protest

जिन्ना नमाज नहीं पढ़ते थे और अंग्रेजी कपड़े पहनते थे। उनकी लाइफस्टाइल कतई मुस्लिम समाज के जैसी नहीं थी। आलम ये था कि उन्हें देखने वाले को यकीन नहीं होता था कि वे मुस्लिम हैं। उन्होंने इस्लाम की तरफ कोई झुकाव नहीं दिखाया था।

1896 में रखा राजनीति में कदम

muhammad ali jinnah

पाकिस्तान नामक देश को जन्म देने वाले जिन्ना ने 1896 में राजनीति में कदम रखा था। तब वे इंडियन नेशनल कांग्रेस से जुड़े थे। उन्हें 1906 में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग में जुड़ने का ऑफर मिला था मगर उन्होंने ये ऑफर ठुकरा दिया। इसके बाद वे 1913 में इससे जुड़े और उन पर मुस्लिम विचारधारा असर दिखाने लगी। 1916 में वे मुस्लिम लीग के अध्यक्ष चुने गए और 1920 में उन्होंने कांग्रेस से टाटा बाय-बाय कह दिया।

1946 में भड़के दंगे

amu protest

“मैं सबसे पहले और सबसे अंत में भारतीय हूं, और भारतीय रहूंगा।” 1925 में ऐसा बयान देने वाले जिन्ना का 1940 में बयान था कि “हिन्दू और मुस्लिम कभी साथ नहीं रह सकते। दोनों की संस्कृति अलग है। रीति-रिवाज अलग हैं। दोनों एक-दूसरे से विवाह नहीं करते, साथ खाना नहीं खाते। ऐसे में दोनों यदि साथ रहे तो घर्षण होगा। किसी राष्ट्र में एक बहुमत में हो एक अल्पमत में तो संघर्ष होता है और राष्ट्र का पतन होता है। हम ऐसा नहीं चाहते, हम मुसलमानों के लिए पाकिस्तान चाहते हैं।” 1940 में लाहौर अधिवेशन के दौरान उन्होंने पाकिस्तान बनाने का प्रस्ताव पारित किया था। 1946 में सीधी कार्यवाही का आदेश दे दिया, जिससे देशभर में दंगे भड़क उठे।

1947 में हुआ बंटवारा

amu protest

1947 में जब भारत, पाकिस्तान से अलग हुआ तब जिन्ना पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति चुने गए। तब जिन्ना ने कहा था कि “हमारे महान राष्ट्र पाकिस्तान को खुशहाल बनाने के लिए हमें आम लोगों, खासकर गरीबों पर ध्यान देना होगा। पाकिस्तान आपका है और आप स्वतंत्र हो। आप अपने मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या कहीं भी जा सकते हो। आप किसी भी धर्म, जाति के हों उससे राष्ट्र को कोई लेना देना नहीं है। आप हिन्दू हैं या मुसलमान, राजकीय तौर पर आप एक राष्ट्र का हिस्सा हैं।”

1948 में कहा दुनिया को अलविदा

aligarh university

तो ये थी जिन्ना की संक्षिप्त कहानी जो 11 सितम्बर 1948 को इस दुनिया से जा चुके हैं मगर आज भी कभी-कभी ही सही मगर उनके नाम से विवाद खड़े हो जाते हैं। जिन्ना अच्छे आदमी थे या बुरे, यह फैसला हम आप पर छोड़ते हैं। अगर आपको ये आर्टिकल पसंद आया तो इसे अपने करीबियों के साथ शेयर करना ना भूलें।