चिंपाजी से वेश्यावृत्ति करा रही थी महिला, बेहद खौफनाक है ये कहानी

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Prostitute orangutan chained to bed, shaved daily and forced to have s-ex with men

बोर्नियो. इंडोनेशिया में कुछ साल पहले एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया था। जिसमें एक महिला पिछले कई सालों से एक ओरांगुटान (एक तरह के चिंपाजी) से वेश्यावृत्ति करा रही थी। वो महिला उसके लिए कस्टमर्स लेकर आती थी और बदले में उनसे पैसे लेती थी। गलत काम कराने के लिए वो उसका मेकअप करने के अलावा उसे ज्वैलरी भी पहनाकर रखती थी। इस ओरांगुटान को फरवरी 2003 में बचाया गया था। तब उसकी मानसिक हालत बेहद खराब थी और वो पुरूषों के करीब जाने से भी डरती थी। हालांकि अब वो पूरी तरह ठीक हो गई है, जिसके बाद उसे हाल ही में मीडिया के सामने लाया गया था।

मेकअप करके, परफ्यूम लगाकर करते थे पेश
– ये स्टोरी ‘पोनी’ नाम की एक मादा ओरांगुटान (एक तरह के चिंपाजी) की है। जिसे फरवरी 2003 में इंडोनेशिया के करेंग-पंगी गांव से बचाया गया था। ये गांव वेश्यावृत्ति के लिए बदनाम है और इस जानवर से भी यहां पर यही काम कराया जा रहा था।
– करीब 200 रुपए देकर लोग इस जानवर के साथ गंदा काम करने के लिए आते थे। ‘पोनी’ को जिस कमरे में रखा गया था, वो बेहद गंदा था और वहां उसे एक दीवार के साथ जंजीरों से बांधकर रखा गया था। वो जिस बिस्तर पर सोती थी वो भी बेहद गंदा था। इसी गंदे बेड पर उसे सजा-धजा कर कस्टमर्स के सामने पेश किया जाता था।
– ‘पोनी’ को उसकी मां से तब छीनकर यहां लाया गया था, जब उसकी उम्र बेहद कम थी। उससे ये गंदा काम कराने वाली महिला हर दूसरे दिन उसकी शेव करते हुए उसकी बॉडी के बाल भी साफ करती थी। इसके साथ ही वो उसका मेकअप करते हुए उसे ज्वैलरी और परफ्यूम लगाकर कस्टमर्स के सामने पेश करती थी।
– ओरांगुटान को कस्टमर्स की डिमांड पर सेक्स एक्ट करने की ट्रेनिंग भी दी गई थी। पूर्व टीचर और बोर्नियो ओरांगुटान सरवाइवल फाउंडेशन यूके की डायरेक्टर लोन ड्रोशर नील्सन ने साल 2003 में पोनी को उस नर्क से निकालकर उसकी जान बचाई थी।

पुरूषों को करीब देखते ही डर जाती थी वो
– नील्सन के मुताबिक, जब उसे वहां से निकाला गया था तो उसकी बॉडी पर काटने के कई निशान भी मिले थे। उससे पिछले 6 साल से यही काम कराया जा रहा था। जब NGO के मेंबर्स ने उसे वहां से निकालने की कोशिश की तो महिला ने पोनी को देने से इनकार कर दिया, उसकी नजर में पोनी एक कैश मशीन और लक का सोर्स था।

– जब कई बार समझाने के बाद भी गांव की महिला पोनी को देने के लिए तैयार नहीं हुई थी तो उसे बचाने के लिए पुलिस को एक्शन लेना पड़ा था। गांव में करीब 35 हथियारबंद पुलिसवालों के पहुंचने के बाद ही पोनी को हासिल किया जा सका था।
– नीलसन का कहना है कि ‘जब मुझे उसकी हालत के बारे में पता चला तो मैं शॉक्ड रह गई थी। ये काफी डरावना था, वे उसका इस्तेमाल एक सेक्स स्लेव (गुलाम) की तरह कर रहे थे। वो बहुत तकलीफ में थी। उसने जिन हालातों का सामना किया है, उसके बारे में सोचकर ही डर लगता है।’
– जब पोनी को उस ब्रोथल से बचाया गया था, तब उसकी मानसिक हालत बेहद खराब थी और वो अनजान पुरुषों को अपने करीब देखते ही डरने लगती थी। जिसके बाद अगले कई सालों बाद तक पुरुषों को उसके करीब नहीं जाने दिया गया।
– वहां से बचाने के बाद उसे बोर्नियो के न्यारू मेन्टेंग सेंटर लाया गया, जहां अगले 10 साल उसे नॉर्मल होने में लग गए। वहीं अब करीब 15 साल बाद अब वो पूरी तरह ठीक हो गई और अपने खाने-पीने का इंतजाम खुद करने में सक्षम हो गई है। वहां उसे सात अन्य ओरांगुटान के साथ रखा गया है।