नवविवाहिताओं के घुटने पर जलते दीपक से दागा जाता है

38
story of mithila festival,shukla paksha,madhubani,bihar

मधुबनी (बिहार)।मिथिलांचल में नवविवाहिताओं का प्रसिद्ध लोक आस्था का पर्व मधुश्रावणी, जिसका शुभारंभ सावन महीने के कृष्ण पक्ष पंचमी से आरंभ होता है और शुक्ल पक्ष के तृतीया तिथि को टेमी दागने (घुटने पर दीपक से दागा जाता है…) के विधि के बाद समापन हो जाता है। इस पर्व में नवविवाहिताओं को घुटने पर दीपक से दागा जाता है। इसकी मान्यता यह है कि जितना बड़ा फफोला होगा, पति की आयु उतनी ही बढ़ेगी। यह पर्व 13 दिनों तक चलती है।

फफोला जितना बड़ा होता है पति की आयु उतनी ही लंबी होती है

– मिथिलानी अंजना शर्मा कहती हैं कि मधुश्रावणी पूजा के अंतिम दिन नवविवाहिताओं का विवाह के बाद एक बार फिर पति द्वारा सिंदूर-दान किया जाता है। इसके बाद टेमी दागने की विधि होती है।

– अध्यापिका सीमा कुमारी कहती हैं कि टेमी दगाय के बाद नवविवाहिताओं के घुटने पर फफोला आ जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह फफोला जितना बड़ा होता है पति की आयु उतनी ही लंबी होती है। यह विधि स्त्री के वीरत्व को दर्शता है।

नवविवाहिताओं में उत्साह

मिथिला के लोक आस्था का पर्व मधुश्रवाणी मंगलवार को संपन्न हो गया। मधुश्रावणी पर्व को लेकर नवविवाहिताओं में भारी उत्साह रहता है। नवविवाहिताएं पति के साथ सुबह से ही सज-धजकर तैयार हो जाती है और पूजा की सामग्री की तैयारी करने लगती है। पूजा संपन्न होने के बाद ही वह अन्न जल ग्रहण करती है। वहीं पति भी उनका इस काम में पूरा हाथ बंटाते हैं।