आजादी की बेला आई – कहे स्वतंत्रता अभी अधूरी है :सुशीला रोहिला

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स्वतंत्रता का आह्वान

आजादी की बेला आई, कहे स्वतंत्रता अभी अधूरी है।
स्वप्न सत्य होने बाकी है, आतंकवाद की डोरी है।
भय का साया मंडराता हर दिन, कश्मीरी भाईयो पर।
सच यही है राखी की शपथ न पूरी है।
जिनके शवों पर पग धर, गुलामी की जंजीर तोड़ी।
वे अब तक निर्दयी बने भले, गम की कालिमा छाई।
होश हवाश उड़ जाते, सीने पर जब चलती गोली है।
महानगरों के फुटपाथो पर जो आंधी-पानी सहते है।
उनसे पूछो जरा स्वतंत्रता के बारे में क्या कहते है।
धर्म के नाते उनका दुख सुनते, यदि तुम्हें लाज आती।
सीमा को लाघ चलो, सभ्यता जहाँ कुचली जाती।
इन्सान बिकता जहाँ, इन्सानियत खरीदी जाती।
सर्वधर्म सिसकिया लेता, शिक्षा व्यापार बन जाती।
रोटी के बदले गोली, निर्वस्त्र को हथियार पहनाए।
सुखे कण्ठों से बेखुदी के नारे लगवाए।
पाक, कराची, कश्मीर पर मातम की काली छाया।
भयभीत चित्तो पर गुलामी का साया।
बस इसलिए तो कहते है आजादी अभी अधूरी है।
अब एक आस चित्त में जगी, कुछ दिनों की मजबूरी है।
वह दिन दूर नहीं नवभारत का निर्माण करे, सागर, गिरी, झरने भी स्वतंत्रता का गीत गाए।
उस सुहावने पर्व हेतु आज से ही कमर कसे।
जो मिला सम्मान करे उसका, खोए हुए का ध्यान करे।
जय भारत
लेखिका – सुशीला रोहिला
सोनीपत हरियाणा ■