निधन के बाद अटलजी की पहली तस्वीर आई सामने

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हेल्थ डेस्क। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार, 16 अगस्त की शाम 5.05 बजे निधन हो गया। 93 साल के अटलजी को दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। उनके पार्थिव शरीर का संलेपन (एम्बॉलमिंग) के बाद कृष्ण मेनन मार्ग स्थित आवास पर लाया गया। सुबह 9 बजे पार्थिव देह को भाजपा मुख्यालय ले जाया जाएगा। दोपहर 1.30 बजे अंतिम यात्रा शुरू होगी, जो राजघाट तक जाएगी। हम बता रहे हैं कि क्या होती है एम्बॉलमिंग और इसकी जरूरत क्यों पड़ती है?

एम्बॉलमिंग की प्रॉसेस

संलेपन का तरल लेप (Embalming Fluid) बनाने के लिए आमतौर पर Formaldehyde, Glutaraldehyde, Methanol और कई तरह के सॉल्वेंट इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें सबसे ज्यादा मात्रा मेथेनॉल की होती है जो 9% से 56% के बीच होती है। ये पूरा लेप शरीर पर लगाया जाता है। इस प्रॉसेस में करीब 2 घंटे का वक्त लग सकता है। कई मामलों में शरीर को अंदर से सड़ने से बचाने के लिए भी नसों में खराब हो चुके खून को निकालकर इस लिक्विड को पंप किया जाता है।

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इसलिए लगाते हैं लेप

एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर के प्रोफेसर वी के पंडित ने बताया कि एम्बॉल्मिंग बॉडी को प्रिजर्व करने के लिए की जाती है। ऐसे में बॉडी में ग्लीसरिन भी लगाई जाती है, ताकि बॉडी की सॉफ्टनेस और शाइनिंग बरकरार रहे। जब किसी डेड बॉडी को लंबे समय तक रखना होती है तब इस लेप का इस्तेमाल किया जाता है। ये लेप चमड़ी में मौजूद प्रोटीन को टूटकर बैक्टीरिया का खाना बनने से रोकता है। इसमें मौजूद डिसइंफेक्टेंट बाकी बैक्टीरिया को भी मार देते हैं। जिसके चलते बॉडी खराब नहीं होती।