डॉक्टर्स भी नहीं जानते थे बीमारी का नाम, दुनिया में सिर्फ 40 लोग हैं इससे पीड़ित

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Mother heartbreaking decision to save her daughter from side effects of a condition

खबर जरा हटके डेस्क/ससेक्स.कभी-कभी मां-बाप को अपने बच्चों की बेहतर जिंदगी के लिए बहुत मुश्किल फैसले लेने पड़ते हैं। इंग्लैंड के ससेक्स की रहने वाली कैरी मैसन भी उन्हीं में से एक हैं। उनकी बेटी मैसी डोजवेल को 7 साल की उम्र से ही पीरियड्स शुरू हो गए और उसे सुनाई देना बंद हो गया। वो दिन रात सिर दर्द से तड़पती बिस्तर पर पड़ी रहती। कोई दवा असर नहीं कर रही थी। इसका एक ही इलाज था ब्रेन की सर्जरी। पर इसमें आंखों की रोशनी जाना तय था। पर कैरी ने बेटी की सुकून भरी जिंदगी के लिए आंखों की रोशनी कुर्बान करने के बारे में भी नहीं सोचा।

डॉक्टर्स समझ ही नहीं पाए बीमारी
कैरी ने बताया कि 2003 में जब मैसी का जन्म हुआ तो उसकी आंखें देखकर ऐसा लगा था कि जैसे वो डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हो, लेकिन रिपोर्ट्स नेगेटिव आईं। इसके बाद कई मौकों पर उसे कई डॉक्टर्स ने देखा, लेकिन सब कुछ नॉर्मल था। पर जब वो 6 साल की हुई और उसके प्राइवेट पार्ट्स पर बाल आने लगे तो स्थिति चौंकाने वाली हो गई। इसके बाद 7 साल की उम्र में ही जब उसके पीरियड्स शुरू हो गए तब स्थिति को समझना मुश्किल हो गया। मैसी इतनी छोटी थी कि उसे पीरियड्स क्या होते हैं, ये समझाना और इसमें कैसे वो अपना ख्याल रखे ये बताना भी मुश्किल था।

ब्रेन में भर गया था फ्लूड
कैरी ने बताया कि ये सब मिहरे सिंड्रोम का असर था, जिसे डॉक्टर्स समझ ही नहीं पा रहे थे। दुनिया में महज 30 से 40 लोग इस तरह के सिंड्रोम से पीड़ित हैं। मैसी पर इसका सबसे बुरा असर देखने को मिला। वो भयानक सिर दर्द से भी जूझने लगी और दवा लेने के बाद भी उसकी स्थिति ऐसी रहती कि बेड से उठना मुश्किल हो जाता। उसके सिर में फ्लूड भर गया था, जिसे एक बार 8 साल की उम्र में निकाला गया था, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। इसके चलते उसके एक कान से भी सुनाई देना बंद हो गया। कैरी ने बताया कि मैं फुलटाइम उसका ख्याल रखती थी लेकिन उसका दर्द मुझसे देखा नहीं जाता था। ऐसे में मैंने उसे दोबारा जिंदगी देने के बारे में सोचा। ताकि वो बिस्तर से उठ सके और बिना सिर दर्द के जिंदगी का मजा ले सके।

दर्द गया लेकिन चली गई आंखों की रोशनी
कैरी ने बताया, दो साल पहले हम उसकी सर्जरी के बारे में सोच ही रहे थे कि इसी दौरान मिहरे सिंड्रोम का पता चला। ये बीमारी इतनी रेयर है कि डॉक्टर्स समझ ही नहीं पा रहे थे कि इसे कैसे ट्रीट किया जाए। मैंने डॉक्टर्स की सलाह पर मैसी के ब्रेन में सर्जरी के जरिए शंट फिट कराने का फैसला लिया। इसमें उसके स्कल का भी कुछ हिस्सा निकाला गया। इसे ब्रेन में प्रेशर कम हुआ और सिर दर्द से छुटाकारा मिला। डॉक्टर्स पहले ही कह चुके थे कि इस प्रोसीजर के चलते मैसी की आंखों की रोशनी चली जाएगी, लेकिन उसका दर्द देखकर मैं इसके लिए भी राजी थी। हुआ भी यही, मैसी के आंखों की रोशनी सर्जरी के दो हफ्ते बाद ही जाने लगी। पर कैरी का कहना है कि उसके दर्द के बारे में सोचकर आज भी मुझे अपने फैसले पर कोई अफसोस नहीं होता, क्योंकि आंखें रहते हुए भी सिर दर्द के चलते वो पहले भी दुनिया नहीं देख पा रही थी।