इस सरकारी बीज का कमाल, एक पौधे पर लग जाते हैं 19 किलो टमाटर

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नई दिल्ली. आपको जानकार हैरानी होगी कि‍ भारतीय वैज्ञानि‍कों ने टमाटर की एक ऐसी कि‍स्‍म तैयार कर ली है, जि‍समें एक पौधे पर 19 कि‍लो तक टमाटर आता है। इस टमाटर की किस्म का नाम अर्का रक्षक (एफ) Arka Rakshak है। कई कि‍सान इसे अपना कर अपना मुनाफा बढ़ा रहे हैं। खास बात ये है कि‍ इसके बीज को कहीं बाहर से नहीं मंगाया गया। इसे भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR) ने तैयार कि‍या है।

कैसे पड़ा ये नाम
भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने उत्‍तन किस्म के इस पौधे से इतनी उपज हासि‍ल की है। इसका नाम अर्का रक्षक इसलि‍ए रखा गया है क्‍योंकि‍ भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान अर्कावथी नदी के किनारे स्थित है। इस समय Arka Rakshak और Arka Samrat कि‍सानों के बीच खासे लोकप्रि‍य हो रहे हैं।

सबसे ज्‍यादा उपज दी
संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक और सब्जी फसल डिवीजन के प्रमुख एटी सदाशिव ने IIHR के यूट्यूब चैनल पर पोस्‍ट कि‍ए गए एक वीडियों में कहा है कि‍ आंकड़ों के मुताबिक टमाटर की ये प्रजाति कर्नाटक में सबसे ज्यादा उपज देने वाली साबित हुई है। यह टमाटर तीन तरह से रोगों से खुद लड़ने में सक्षम है। पत्तियों में लगने वाले कर्ल वायरस, विल्ट जिवाणु और फसल के शुरूआती दिनों में लगने वाले विल्ट जिवाणु से सफलतपूर्वक लड़ने क्षमता इसमें मौजूद है। इसकी खेती में अन्‍य टमाटर के मुकाबले करीब 10 फीसदी कम लागत आती है।

150 दि‍न में तैयार होती है फसल
कर्नाटक में टमाटर का प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 35 टन है, वहीं अर्का रक्षक प्रजाति के टमाटर का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 190 टन तक हुआ है। एक टमाटर औसतन 75 से 80 ग्राम का होता है। इसकी खेती खरीफ और रबी के मौसम में की जा सकती है। इसकी फसल 140-150 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी प्रति एकड़ 40-50 टन पैदावार होती है।

कहां और कैसे मि‍लेगा बीज
आप इसे भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR)  से सीधे मंगा सकते हैं। यहां से आप नकद, बैंक ड्राफ्ट, एनईएफटी व आरटीजीएस के माध्‍यम से पेमेंट कर बीज ले सकते हैं। दूर दराज के इलाकों से पैसे भेजने वालों को बीज भि‍जवा दि‍ए जाते हैं हालांकि‍ उन्‍हें पोस्‍टल चार्जेज अलग से देने होंगे।

यह डायरेक्‍ट लिंक है – http://iihr.res.in/vegetable-seeds यहां बीज की कीमत, उपलब्‍धता व पेमेंट करने का तरीका वि‍स्‍तार से दि‍या गया है।

ई मेल आईडी – seeds@iihr.res.in

सबसे ज्‍यादा उपज दी
संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक और सब्जी फसल डिवीजन के प्रमुख एटी सदाशिव ने IIHR के यूट्यूब चैनल पर पोस्‍ट कि‍ए गए एक वीडियों में कहा है कि‍ आंकड़ों के मुताबिक टमाटर की ये प्रजाति कर्नाटक में सबसे ज्यादा उपज देने वाली साबित हुई है। यह टमाटर तीन तरह से रोगों से खुद लड़ने में सक्षम है। पत्तियों में लगने वाले कर्ल वायरस, विल्ट जिवाणु और फसल के शुरूआती दिनों में लगने वाले विल्ट जिवाणु से सफलतपूर्वक लड़ने क्षमता इसमें मौजूद है। इसकी खेती में अन्‍य टमाटर के मुकाबले करीब 10 फीसदी कम लागत आती है।

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