बिस्तर में आदमखोर पति कि अतरंगी हरकतों से तंग पत्नी ने…..

341
women abuse

प्राकृतिक यौन संबंधों को अपराध घोषित करने वाली धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला सुरक्षित रखने के महज एक दिन बाद ही इससे जुड़ा एक मामला सामने आया है। एक महिला ने अपने पति पर आरोप लगाया है कि शादी के चार सालों के दौरान उसके पति ने उसके साथ जबरदस्ती ‘अप्राकृतिक’ मौखिक (ओरल) सेक्स किया। महिला ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दी है और मांग की है उसके पति को ऐसा करने से रोकने के लिए कड़े प्रावधान लाए जाएं।

कोर्ट ने पति को जारी किया नोटिस

इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस एमएम शांतनागौदर ने महिला के पति को नोटिस जारी किया है। इससे पहले कोर्ट में महिला की वकील अपर्णा भट्ट ने उसके पति पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने जबरदस्ती पीड़िता के साथ मौखिक सेक्स किया, जो ‘प्रकृति के आदेश के खिलाफ सेक्स’ है और जिसे धारा 377 के तहत अपराध के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

धारा- 377 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला रखा गया है सुरक्षित

बता दें कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने धारा-377 की वैधता को चुनौती वाली याचिकाओं पर मंगलवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि पति और पत्नी के बीच सहमति से किए गए मौखिक (ओरल) सेक्स और गुदा (एनल) सेक्स को अप्राकृतिक यौन संबंध या ‘प्रकृति के आदेश के खिलाफ सेक्स’ की श्रेणी में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता।

इस महिला की साल 2002 में हुई थी सगाई जबकि साल 2014 में हुई शादी

गौरतलब है कि धारा-377 की वैधता का मामला पहले से ही जटिल परिस्थिति में है, ऐसे में महिला की ये याचिका मामले को और भी कठिन बना सकती है। पीड़ित महिला ने बताया कि उसकी शादी 2014 में हुई थी, जबकि उसकी सगाई साल 2002 में ही हो गई थी, जब वह महज 15 साल की थी।

जबरदस्ती मौखिक सेक्स का पति पर लगाया आरोप

women abuse
महिला ने शिकायत की है कि उसका डॉक्टर पति अक्सर उसे अपनी इच्छाओं के खिलाफ मौखिक सेक्स करने को मजबूर करता था। महिला ने अपने पति के खिलाफ बलात्कार और अप्राकृतिक सेक्स करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराया था।

महिला ने पति के खिलाफ दर्ज करवाई थी रिपोर्ट लेकिन हाईकोर्ट ने किया था ख़ारिज

तब, गुजरात हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि धारा-375 के तहत वैवाहिक बलात्कार का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही कोर्ट ने धारा-377 के तहत भी महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया था।

क्या है धारा 377

आईपीसी की धारा 377 के अनुसार यदि कोई वयस्‍क स्वेच्छा से किसी पुरुष, महिला या पशु के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध स्थापित करता है तो, वह आजीवन कारावास या 10 वर्ष और जुर्माने से भी दंडित हो सकता है।