अपने आशिकों को यौन सम्बन्ध बनाने के बाद जिन्दा जलवा देती थी

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अगर इतिहास की किताबों के पन्ने पलट कर देखें जाएं तो अफ़्रीकी देश अंगोला की रानी एनजिंगा एमबांदी तेज दिमाग वाली रणनीतिकार और बहादुर योद्धा के रूप में नज़र आयेंगी लेकिन लोग उन्हें एक क्रूर महिला की तरह देखते थे क्योंकि ऐसा कहा जाता था कि रानी एनजिंगा अपने आशिकों के साथ यौन सम्बन्ध बनाने के बाद उन्हें जिंदा जलवा देती थी. बहादुर रानी एनजिंगा एमबांदी ने 17वीं शताब्दी में एक उपनिवेशवाद के खिलाफ विद्रोह किया था. रानी एनजिंगा को क्रूर इसलिए भी कहा जाता था क्योंकि कुछ लोगों का ये मानना था कि उन्होंने अपने भाई को सत्ता के लिए मरवा दिया था. एनजिंगा दक्षिण पश्चिम अफ़्रीकी देश एनदोंगो और मतांबा की रानी थीं.

एनजिंगा को स्थानीय भाषा किमबांदु में एनगोला कहा जाता था. पुर्तगाली लोग इस क्षेत्र को इसी नाम से बुलाते थे और इस क्षेत्र का नाम अंगोला पड़ गया. पुर्तगाली लोगों ने इस क्षेत्र में सोना और चांदी की तलाश में हमला किया था. रानी एनजिंगा एमबांदी का जन्म पुर्तगाली हमले के आठ साल बाद हुआ था. रानी एनजिंगा एमबांदी ने बचपन से ही अपने पिता किंग एमबांदी किलुंजी के साथ मिलकर आक्रमणकारियों के साथ संघर्ष किया था

जब एनजिंगा के पिता की मौत हो गई थी उनके बेटे एनगोला एमबांदी ने उनकी सत्ता संभाली थी. एनगोला एमबांदी ने अपने पिता की तो संभाल ली लेकिन उनके पास अपने पिता और बहन जैसी बुद्धि नहीं थी.

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एनगोला एमबांदी को जब ये एहसास हुआ कि एनजिंगा के लोग उनके खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं उन्होंने एनजिंगा के बेटे को मौत की सज़ा देने का ऐलान कर दिया. राजा एनगोला यूरोपीय आक्रमणकारियों का सामना करने में  खुद को असफल पाया.  जिसके बाद एनगोला एमबांदी ने अपनी बहन एनजिंगा के साथ मिलकर यूरोपीय आक्रमणकारियों का सामना करने के लिए सत्ता का बंटवारा करने का फैसला लिया.

पुर्तगाल के ख़िलाफ़ समझौतों की रणनीति..

एनजिंगा ने पुर्तगाली मिशनरियों से पुर्तगाली भाषा सीखी थी.  एनजिंगा पुर्तगाल गई और वहां जाकर पुर्तगाल के साथ सम्बन्ध अच्छे किये. पुर्तगाली गवर्नर जोआओ कोरिए डे सोउसा के साथ बराबरी की बातचीत के बाद दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि पुर्तगाली सेना एनदोंगो को छोड़कर चली जाएगी.

एनजिंगा ने पुर्तगाल के साथ सम्बन्ध अच्छे बनाने के लिए ईसाई धर्म भी स्वीकार किया और एना डे सूजा नाम धारण किया. उस समय एनजिंगा की उम्र 40 साल थी. इसे देखकर ही पता लग गया कि एनजिंगा एक बेहद प्रतिभाशाली रणनीतिकार भी थीं.

कैसे और कब बनी थी एनजिंगा रानी?

एनजिंगा के भाई ने साल 1624 में किसी छोटे से द्वीप में रहना शुरू कर दिया था और कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई थी. एनजिंगा की भाई की मौत कोलेकर बहुत सी कहानियां बनी थी. कुछ लोगों का कहना था की एनजिंगा ने अपने भाई को अपने बेटे की मौत का बदला लेने के लिए जहर दिलवाया था क्योंकि उसने एनजिंगा के बेटे की हत्या करवाई थी.

वहीँ कुछ लोगों का ये कहना था कि उन्होंने आत्महत्या की थी.  इन सबके बाद भी एनजिंगा एमबांदी में पुर्तागालियों की चुनौतियों का सामना करते हुए एनदोंगों की पहली रानी बनी.  एनजिंगा एमबांदी अफ़्रीका में महिलाओं के साथ शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाती थी.

रानी एनजिंगा अपने आशिकों को जिन्दा जलवा देती थी…

फ्रांसीसी फिलोस्फर ‘दे सादे’ ने एक किताब ‘द फ़िलॉसोफ़ी ऑफ़ द ड्रेसिंग टेबल’ लिखी थी जो इतालवी मिशनरी गिओवनी कावेज़ी की कहानियों पर आधारित थी.  कावेज़ी का दावा था कि एनजिंगा यौन सम्बन्ध बनाने के बाद अपने आशिकों को जिन्दा जलवा देती थी. रानी एनजिंगा को अपने हरम में रहने वाले  पुरुष के साथ सम्बन्ध बनने होता था तो पहले उन्हें आपस में तब तक लड़ना होता था जब किसी की मौत हो जाये और जितनी वाले के साथ रानी सम्बन्ध बनती थी. किसी भी पुरुष के लिए बहुत खतरनाक साबित होता था क्योंकि रानी उसके साथ सम्बन्ध बनाकर उसे जिंदा जलवा देती थी. रानी के हरम को चिबदोस कहा जाता था और यहाँ रहने वाले पुरुषों को महिलाओं के कपड़े पहनाये जाते थे.

ऐसा माना जाता है कि कावेज़ी की कहानियां अलग-अलग लोगों के दावों पर आधारित हैं और इतिहासकारों का ये मानना है कि इस कहानी के और भी बहुत सारे वर्जन हैं.