अगर मां बनने की तैयारी में हैं तो इन पांच चीजों का ध्यान रखें

0
49
Pregnancy, Preparation for Mothers, Researchers, Health News,गर्भावस्था, मां बनने की तैयारी, शोधकर्ताओं, हेल्थ न्यूज,Hindi News, News in Hindi

गर्भावस्था सबसे मुश्किल समय होता है। इस दौरान रखा गया ध्यान मां और बच्चे दोनों को जीवनभर की खुशियां दे जाता है। कुछ बातों का ख्याल रखकर आप इस मुश्किल समय को भी अच्छी यादों में बदल सकते हैं। इसके लिए जरूरी है अच्छा खानपान, निश्चित वजन और पर्याप्त आराम। शोधकर्ताओं की मानें तो तदरुस्त बच्चा और सुरक्षित डेलेवरी के लिए अगर इन पांच चीजों पर विशेष नजर रखें तो आपका यह समय भी खुशनुमा बीतेगा।

तनाव से बचें
इजरायल के वेजमान इंस्टीट्यूट में हुए अध्ययन में बताया गया है कि गर्भवती महिलाओं के ज्यादा तनाव लेने से उनके बच्चों के बड़े होने पर ज्यादा खाने की आदत पड़ जाती है। चूहों पर हुए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि मां के चिंता में रहने से चूहों में कुछ आनुवांशिक बदलाव देखे गए, जो चूहों के परिपक्व होने पर उनमें ज्यादा खाने की आदत को जन्म देते हैं।

सूरज की रोशनी से भागें नहीं
एनआईएच की ओर से हुए अध्ययन में पता चला है कि गर्भधारण के लिए सूरज की रोशनी में रहना जरूरी है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने देखा कि जिन महिलाओं में विटामिन डी कमी थी, उनके मुकाबले जिनमें विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा मिली, उनके गर्भ गिरने के बाद दोबारा गर्भधारण की संभावना ज्यादा पाई गई।

खानपान का ध्यान रखें
गर्भावस्था के दौरान आपने क्या खाया, यह आपको अपने बच्चे में दिखता है। ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी के अध्ययन में मां के खानपान की आदतों और चयापचय का सीधा असर बच्चे के विकास पर पड़ता है। इसलिए, डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्यवर्धक चीजें खाने की सलाह देते हैं।

व्यायाम भी करें
स्पेन के एक अध्ययन में बताया गया है कि गर्भावस्था के दौरान व्यायाम जरूरी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस व्यायाम का फायदा मां और बच्चे दोनों को मिलता है। अक्सर लोग गर्भावस्था में ज्यादा कामकाज से बचने को कहते हैं, लेकिन इस अध्ययन के नतीजे इस भ्रांति को खारिज करते हैं।

वजन न बढ़ने दें
गर्भावस्था से पहले आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) बच्चे के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था से पहले मां के बीएमआई और बच्चे के चयापचय के बीच संबंध देखा। शोधकर्ता यह मानते हैं कि मां के मोटापे की वजह से बच्चे की चयापचय क्रिया प्रभावित होती है। इससे पहले हुए अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था के दौरान बच्चे को होने वाली बीमारी, मसलन सेरेब्रल पाल्सी, मिर्गी और अन्य प्रमुख जन्म दोषों का मोटापे के बीच संबंध पाया।