मोबाइल अचानक बंद हो जाए तो तुरंत पहुंचे बैंक, इस तरह से हो रही ये ठगी

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गैजेट डेस्क। Sim Swap Fraud in India अब सिम स्वैपिंग (Sim SWAP Fraud) के जरिए आम लोगों को ठगा जा रहा है। हाल ही में माहिम (मुंबई, Mumbai) में रहने वाले एक शख्स के साथ सिम स्वैपिंग के जरिए 1 करोड़ 86 लाख रुपए की ठगी की गई। पीड़ित वी शाह को रात 2 बजे अपने मोबाइल नंबर पर 6 मिस कॉल मिले। इसमें से एक में (+44) कोड वाला नंबर था। सुबह उन्होंने जब इन नंबरों पर कॉल किया तो कोई भी नंबर नहीं लगा। बाद में उन्हें पता चला कि उनकी सिम की डीएक्टिवेट हो गई है। मोबाइल कंपनी में उन्होंने बता की तो पता चला कि उनकी रिक्वेस्ट पर ही सिम को डीएक्टिवेट किया गया है।

इसके बाद शाह को शक हुआ और उन्होंने तुंरत अपनी बैंक ब्रांच में जाकर पूछताछ की। तब उन्हें पता चला कि उनके अकाउंट से 1.86 करोड़ रुपए निकाल लिए गए हैं। उनके अकाउंट से मोबाइल नंबर लिंक था। बदमाशों ने सिम स्वैपिंग के जरिए उनके पैसे निकाले। पुलिस का अनुमान है कि, स्कैमर्स ने पहले शाह के यूनिक सिम नंबर को हैकिंग के जरिए एक्सेस किया। दरअसल आज कल साइबर क्रिमिनल फिशिंग, विशिंग और स्किमिंग के अलावा सिम स्वैपिंग के जरिए लोगों को ठग रहे हैं। इसमें ठग यूजर्स का डुप्लीकेट सिम इश्यू करवा लेते हैं। फिर बैंक के साथ रजिस्टर इस नम्बर का इस्तेमाल करके ओटीपी जेनरेट करते हैं और यूजर के खाते से पैसे निकाल लेते हैं।

ऐसे करते हैं ठगी
– ठग सबसे पहले फिशिंग, विशिंग (वॉयस फिशिंग) और स्किमिंग की मदद से यूजर की पर्सनल डिटेल्स इकट्ठा कर लेते हैं।
– फिर वे यूजर को किसी तरह अपने नम्बर से कंपनी के ऑफिशियल नम्बर पर एक मैसेज भेजने को तैयार करते हैं। इस मैसेज में नए सिम कार्ड का नम्बर होता है, जो कि पहले से ही धोखेबाजों के पास होती है।

– मैसेज भेजने कुछ देर बाद ग्राहक का मोबाइल नम्बर ब्लॉक हो जाता है।
– यूजर का मोबाइल नम्बर ब्लॉक होने के बाद वे ग्राहक की फेक आईडी प्रूफ की मदद से उस नम्बर की डुप्लीकेट सिम निकाल लेते हैं।
– फिर वे मोबाइल नम्बर और ओटीपी की मदद से ग्राहक के ऑनलाइन बैंकिंग पॉसवर्ड को बदल देते हैं और फिर इसका इस्तेमाल करके पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं या शॉपिंग कर लेते हैं।

– अगर आपका मोबाइल नम्बर बिना आपकी जानकारी के बंद हो जाता है तो तुरंत कंपनी के कस्टमर केयर पर कॉल करके नम्बर बंद किए जाने के कारण के बारे में जानकारी लें। सिम स्वैपिंग रिक्वेस्ट सामने आने पर उसे रोकने का अनुरोध करें।

– आम तौर पर सिम स्वैपिंग की पूरी प्रकिया में थोड़ा समय लगता है मतलब मैसेज भेजने के कुछ देर बाद ग्राहक का नम्बर बंद होता है। ऐसे में ठग ग्राहक का ध्यान फोन से हटाने के लिए उसे परेशान करते हैं। ताकि वह फोन बंद कर दे। इसलिए ऐसे समय में कभी अपने फोन को साइलेंट या बंद न करें।

– इसके अलावा ऐसे कॉल आने पर अपने बैंक खाते पर भी निगाह रखें और संदिग्ध लेन देन होने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें।

– अपने खातों में मोबाइल नम्बर के साथ-साथ ई-मेल अलर्ट को भी एक्टिव करवाएं ताकि अगर किसी कारण एक बंद हो जाए तो दूसरे की मदद से जानकारी मिल सके।

– इसके साथ ही बैंकिंग ट्रांजेक्शन की जानकारी रेगुलर चेक करते रहें। कोई फ्रॉड ट्रांजेक्शन पाते हैं तो बैंक की हेल्पलाइन पर फोन करके तुरंत ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की सुविधा बंद करवाएं और जितना जल्दी हो सके एफआईआर भी दर्ज करवाएं।


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