इन ऐप्स के जरिए हो रही है आपके पार्टनर की जासूसी!

0
76
टेक न्यूज,जासूसी करने वाले ऐप्स,गूगल,ऐपल,tech news,spy apps,domestic abuse,Apps

नई दिल्ली मार्केट में से हज़ारों ऐप्स उपलब्ध हैं, जिनके ज़रिए घरेलु हिंसा के शिकार लोग गुपचुप तरीके से अपने पार्टनरों की जासूसी करते हैं। इन ऐप्स को इन्स्टॉल करना बेहद आसान है और इनकी मार्केटिंग ऑनलाइन ऐडवर्टाइज़िंग, ब्लॉग्स और विडियोज़ के ज़रिए धड़ल्ले से की जा रही है। यह बात एक रिसर्च में सामने आई है।

शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि इन ऐप्स में न सिर्फ ट्रडिशनल स्पाईवेयर शामिल है, बल्कि इनमें सॉफ्टवेयर को इस तरह से इस्तेमाल किया गया है, जिसकी वजह से मौजूदा ऐंटी-स्पाईवेयर को इन ऐप्स से बचने के लिए इस्तेमाल करना लगभग असंभव हो जाता है।

कुछ ऐप्स ऐसे भी पाए गए, जो अब्यूजर्स पर ही टारगेटेिट थे और उन्हीं के लिए उनकी मार्केटिंग की गई। ऐसा ही एक ऐप है, जिसमें ‘Mobile Spy App for Personal Catch Cheating Spouses’ नाम का वेबपेज है, लेकिन कुछ ऐप्स ऐसे भी थे, जिनकी ऑफिशल वेबसाइट्स सिर्फ एंप्लॉयी या फिर चाइल्ड ट्रैकिंग जैसे उपयोगों पर ही केंद्रित थीं, पर उनमें भी कुछ सर्च टर्म्स का खूब इस्तेमाल पाया गया, जैसे कि ‘track my girlfriend’या फिर ‘how to catch a cheating spouse with his cell phone’.

यूएस की कॉर्नल यूनिवर्सिटी के डॉक्टरल स्टूडेंट राहुल चटर्जी के अनुसार, इस तरह के हज़ारों ऐप्स मार्केट में उपलब्ध हैं। आप उन्हें आसानी से ढूंढ सकते हैं और जो मौजूदा ऐंटी-स्पाईवेयर ऐप्स हैं, वे इन्हें डिटेक्ट भी नहीं कर पाएंगे। इसकी वजह से हिंसा से पीड़ित लोगों को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं होता कि उनकी जासूसी की जा रही है।

शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट गूगल को सौंपी, जिसके बाद गूगल ने अपने प्ले स्टोरी की पॉलिसी में बदलाव किए और नियम कड़े कर दिए ताकि ऐसे ऐप्स को डाउनलोड न किया जा सके। घरेलु हिंसा के शिकार कई लोगों ने ऑनलाइन निगरानी किए जाने के कई मामले गिनाए, जिसकी वजह से अब्यूजर्स उनकी लोकेशन के साथ-साथ उनकी बातचीत को भी सुन लेते हैं और ट्रैक कर लेते हैं। इसकी वजह से कई बार बहुत ही भयावह घटनाएं सामने आई हैं।

ताज्जुब की बात तो यह है कि पीड़ित पक्ष को तब तक खुद को ट्रैक किए जाने का पता नहीं चलता जबतक कि उनके पार्टनर उनकी लोकेशन का पता लगाने के बाद खुद उनके सामने नहीं पहुंच जाते।

गूगल और ऐपल दोनों ही अपने प्लेटफॉर्म से इस तरह के ऐप्स की ब्रिकी की इजाज़त नहीं देते, लेकिन फिर भी जासूसी करने वाले कई ऐप्स अन्य प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह परेशानी इतनी बड़ी है कि इससे जड़ से निपटना आसान नहीं होगा। हालांकि वे इससे निपटने के लिए बेहतर टूल बना रहे हैं, लेकिन इस मामलो को गंभीरता से लेने की ज़रूरत है।