साहब! छोटे-छोटे बच्चे हैं, 5 दिन से पीट रहे पुलिसवाले

72
aajtaklives news in hindi,aajtaklives news,hindi news,hindi news,Latest Weird Stories,Three boys try to kill themselves in barracks

बांसवाड़ा (राजस्थान)। कोतवाली थाने में तीन युवकों ने पुलिस की मारपीट से परेशान होकर खुदकशी करने का प्रयास किया। इनको सोमवार देररात गंभीर हालत में एमजी अस्पताल लाया गया। तीनों युवकों की भारी पुलिस बल के बीच इलाज शुरू किया गया। मौजूद डॉक्टर ने गंभीर केस मानते हुए इमरजेंसी में एक और डॉक्टर को बुलाया। तीनों के शरीर पर चोट के निशान थे। वहीं एक युवक का गला किसी नुकीली चीज से काटने की कोशिश की गई थी। घायल दो युवकों ने मीडिया के सामने खुलासा किया कि पुलिस बिना गिरफ्तार किए उन्हें बंदी बनाकर रखा था और उनसे मारपीट कर रही थी। पुलिस की इन ज्यादतियों से तंग आकर तीनों ने पेंट की चेन आैर नाड़े से खुदकुशी करने की कोशिश की। एक युवक की पीठ, घुटनों और कुल्हों पर खून के थक्के जम चुके थे। पूरे मामले में कोतवाली पुलिस सवालों के घेरे में इसलिए भी है क्योंकि, देररात तक तीनों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस टालमटोल कर करती रही। आखिर रात को कोतवाल शैतानसिंह ने सुरेश नाम के एक युवक को गिरफ्तार करना कबूला लेकिन वह भी किस मामले में वह बता नहीं पाए।

पीट रहे थे, इसलिए मरने की कोशिश की

एक पीड़ित अक्षय ने बताया कि हम तीनों को पुलिस ने बैरक में रखा था। दो साथी पहले थे मुझे 2 दिन से बंधक बनाकर रखा था और पीटा। इससे परेशान होकर पेंट की चेन से गला घोंटने की कोशिश की। घायल युवकों में आशीष नाम का एक और युवक भी शामिल है। हालांकि, उसके बोलने से पहले पुलिस तीनों को हिरासत में ले गई।

मुझे 5 दिन तक बंदी बनाकर रखा, बेरहमी से पीटा 

सुरेश नाम के यवुक के गले में किसी गंभीर चोट के निशान थे। सुरेश ने बताया कि उसका एक्सीडेंट हुआ था, इस दौरान उसकी चेन टूट गई तो उसने उसे उठाकर पेंट की जेब में रख लिया। मौके पर जमा लोगों ने मुझे पीटा और पुलिस के हवाले कर दिया। जब मुझे कोतवाली लाया गया तो चेन जेब से बाहर आ गई। इस पर पुलिस ने मुझे बेरहमी से पीटा और पूछा कि चेन कहा से लाया। मैंने कहा- चेन मेरे ससुर की दी हुई है मुझे मत मारो। लेकिन पुलिस छोड़ देंगे बोलकर मारते रहे। चोरी का दूसरा माल बरामद करने के लिए 5 दिन से मार रहे है। ऐसा कहते हुए सुरेश रोने लगा। वह बोला कि साहेब मेरे छोटे-छोटे बच्चे है।

तीनों शातिर: पुलिस का दावा है कि तीनों शातिर चोर है। अगर ऐसा है तो और अपराधी है तो अपराधियों को सजा मिलनी चाहिए। भास्कर अपराधियों का पक्ष नहीं ले रहा लेकिन कानून के दायरे में। पुलिस को भी यह अधिकार नहीं है कि महज संदेह पर कई दिनों तक बंधक बनाकर किसी को बेरहमी से पीटे।

3 वजह जो उजागर कर रही कोतवाली पुलिस की निर्दयता 
1. कोतवाल शैतानसिंह ने सुरेश नाम के युवक को गिरफ्तार करना कबूला है। अगर ऐसा है तो उसकी गिरफ्तारी किस मामले में की यह क्यों नहीं बताया। सवाल यह भी उठ रहा है बाकी दो युवकों को बिना गिरफ्तारी बताए अंडरवियर में और बैरक में किस आधार पर रखा गया।
2.  तीनों युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है तो सुरेश को 5 दिन से और अक्षय को 2 दिन से बंधक बनाकर रखा गया। कानूनन 24 घंटे में गिरफ्तारी बताना अनिवार्य है।
3. तीनों युवकों का किस मामले में हिरासत में रखा गया पुलिस इस पर सफाई नहीं दे पाई। पुलिस का ये तर्क की तीनों युवकों की एक साथ तबीयत बिगड़ना भी गले नहीं उतरता।

पहले भी बिना गिरफ्तारी बेड़ियों में बंधक बनाकर रखा 
– कोतवाली पुलिस ने इससे पहले भी एक युवक को बिना गिरफ्तारी बताए कई दिन तक न सिर्फ हिरासत में रखा था बल्कि बेडिय़ों से भी बांधा था। जिस युवक को बेडिय़ों के बांधा गया था उसी बेड़ी से प्रोडक्शन वारंट पर आए एक आरोपी को भी बांधा गया था। बावजूद इसके कोतवाली पुलिस इस पूरे मामले में टालमटोल करती रही। भास्कर के खुलासे के बाद इस मामले में जांच चल रही है।

– डॉ. कुलदीप जिंजवाडिया ने कहा, कोतवाली पुलिस तीनों युवकों काे लेकर आई थी। एक युवक के गले में घाव के निशान है। बाकी दो की हालत सामान्य है। इमरजेंसी में डा. राजेंद्र लड्ढा को बुलाकर भी जांच करवाई थी।

मुझे नहीं पता, मैं गश्त पर था 
ड्यूटी ऑफिसर नारायणसिंह ने बताया कि मुझे नहीं पता मैं तो नाइट ड्यूटी होने से फील्ड में था। सूचना मिली तो एमजी आया। तीनों युवक थाने में झगड़े या उनकी तबीयत खराब हुई यह मुझे नहीं पता। हालांकि वह गिरफ्तारी या तीनों युवकों की जानकारी पर ये कहते हुए कुछ भी बोलने से बचते रहे कि यह तो सब अफसर जानते हैं।