साली को 10 दिन तक भूखा-प्यासा रखकर जीजा और उसके दोस्त करते रहे गैंगरेप

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साली को 10 दिन तक भूखा-प्यासा रखकर जीजा और उसके दोस्त करते रहे गैंगरेप

दुर्ग/भिलाई। मां की मौत के बाद से अकेली पड़ी किशोरी के साथ उसका सगे जीजा अपने साथियों के संग 10 दिनों तक अनाचार करता रहा। घटना के बाद आरोपी उसे दुर्ग स्टेशन में अकेला छोड़कर भाग गए। मामले का खुलासा होने के बाद जब पीड़ित ने अपनी आपबीती बताई तो सुनने वालों भी दंग रह गए। नाबालिग को उसका जीजा अपने साथ कानपुर ले गया। जहां जबरदस्ती की, विरोध करने पर मारपीट भी की। अब प्रेग्नेंट हो गई, पुलिस में केस दर्ज है।

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आखिर किसकी नजर लगी इस मासूम को…
मेरी मां दुनिया छोड़कर चली गई। मैं दीदी और जीजा के यहां रहने लगी, क्योंकि मैं भी हंस-खेलकर जिंदगी जी सकूं। लेकिन मुझे क्या पता था िक जीजा और उसके साथी मेरे साथ गंदा काम करेंगे… शुरू से विरोध किया, बात-बात पर मेरे साथ मारपीट भी करते थे…।

आप बीती: नहाने गई थी तो जीजा ने मुझे वहां से उठा लिया, कानपुर ले जाकर किया गंदा काम
मूलतः रायगढ़ निवासी किशोरी अपनी आप बीती सुनाते हुए कहती है, मेरी मां का देहांत हो गया है। देहांत के बाद से परिवार पूरी तरह बिखर गया। फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी। किसी तरह गुजर बसर करके अपना पेट पालने में लगी थी। मेरी इस बेबसी पर दया करने की जगह जीजा ने गलत फायदा उठाना शुरू कर दिया। इसके चलते रायगढ़ में ही रहने वाली बहन के घर रहना गवारा नहीं था। लेकिन मुझे नहीं पता था कि आदत से लाचार जीजा इतना वहशी हो जाएगा कि मुझे अपने साथियों के साथ उठा ले जाएगा। मैं नहाकर निकली थी और वह उठाकर कानपुर ले गया। उस दौरान गाड़ी बिठाकर उसे यूपी के कानपुर में ले गया। जहां सभी हैवान मुझे भूखा-प्यासा रखकर 10 दिन तक ज्यादती करते रहे। इसके बाद उसे ट्रेन बिठाकर फरार गए। इस बीच निर्दयी जीजा 16 नंवबर को मुझे दुर्ग रेलवे स्टेशन स्टेशन छोड़कर भाग गया। तब मैं दुर्ग स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर बैठी। मुझे जीआरपी स्टॉफ ने उठाया। उसके बाद जीाआरपी ने चाइल्ड लाइन को सूचना दी। चाइल्ड लाइन की टीम ने तत्काल सीधे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष पेश किया।

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किशोरी के प्रेग्नेंट होने की जानकारी के भी सीडब्ल्यूसी रही मौन
जानकारी के मुताबिक, नाबालिग के शरीर पर कई जगहों गंभीर चोट के निशान भी थे। इसके बावजूद उसे अधिकारियों ने पुलिस काे सूचना देने की बजाय रायपुर भिजवा दिया। दूसरे दिन 17 नवम्बर को आश्रय गृह के अधिकारियों ने जिला अस्पताल रायपुर में नाबालिग का मेडिकल चेकअप कराया, जिसमें नाबालिग के प्रेग्नेंट होने की बात सामने आई। प्रेग्नेंट और गैंगरेप की जानकारी के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराने की जगह 22 दिनों तक बालिका आश्रय गृह रायपुर में रखा गया। उसके बाद उसने काउंसिलिंग में पूरी घटना बताई। आश्रय गृह से दुर्ग लाकर रायगढ़ भेज दिया गया।

रायपुर में रेप की पुष्टि होने के बाद दुर्ग से लड़की को भिजवा दिया रायगढ़
16 नवंबर को जब जीआरपी ने किशोरी को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सुपुर्द कर दिया था तो उन्होंने मामला रफा दफा करने के लिए उसे रायपुर भिजवा दिया। काउंसलिंग और मेडिकल जांच में किशोरी के साथ रेप और प्रेग्नेंट का खुलासा हुआ। जबकि इस संबंध में महिला बाल विकास अधिकारी अशोक पांडेय ने कहा, पीड़ित से काउंसिलिंग में गैंगरेप जैसी कोई भी बात सामने नहीं आई थी। आने रायपुर भेजने के बाद इसका खुलासा हुआ।

चिंताजनक: जिले में दो महीनों नाबालिग से छेड़छाड़ और अनाचार के केस बढ़ गए
महिलाओं और किशोरियों के छेड़छाड़ और अनाचार के मामलों के आपराधिक आंकड़ों पर गौर किया जाए तो पिछले तीन साल में छेड़छाड़ की घटना में कमी आई है। इसमें भिलाई नगर थाने पाक्सो एक्ट के सबसे ज्यादा 3 मामले दर्ज हुए। जबकि जामुल थाने में 345 के करीब 10 मामले दर्ज हुए हैं

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