मौत से ज्यादा निष्ठुर निकली मां, हाड़ कंपा देने वाली सर्दी सहन न कर पाया मासूम

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पाली (राजस्थान)। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ में अग्रणी रहे पाली जिले में एक बार फिर से शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। सोमवार सुबह जिले के नाडोल गांव से 5 किलोमीटर दूर एक महीने की बच्ची को कंबल में लपेट झाड़ियों में फेंक दिया। सुबह 11 बजे जब बच्ची के रोने की आवाज आई तो ग्रामीणों व पुलिस की मदद से उसे नाडोल अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे पाली रेफर किया गया। पाली में बांगड़ अस्पताल लाते ही उसकी मौत हो गई।

अभी तक बच्ची के निर्दयी माता-पिता के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है। जानकारी के अनुसार, नाडोल-रानी सड़क मार्ग स्थित वरकाणा प्याऊ के पास सोमवार सुबह 11 बजे झाड़ियों से बच्ची के रोने की आवाज आने पर ग्रामीण एकत्रित हो गए थे। इस पर इस नाडोल पुलिस चौकी में इसकी सूचना दी गई। सूचना मिलने पर रानी थानाधिकारी चंदन सिंह भाटी मौके पर पहुंचे और उसे नाडोल अस्पताल ले गए। यहां डॉ. वागाराम पटेल ने बच्ची को भर्ती कर उसका इलाज शुरू किया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं होता देख उसे पाली के बांगड़ अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल पहुंचने के थोड़ी देर बाद ही मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों की माने तो बच्ची का शरीर पूरा ठंडा पड़ा हुआ था और संभवतया ठंड की वजह से उसकी मौत हो गई।

शर्मसार करती इंसानियत की तस्वीर…
6 डिग्री तापमान और कड़ाके की ठंड में माता-पिता बच्ची को एक टी शर्ट व बेबी पेंट में छोड़ गए झाड़ियों में। कड़ाके की ठंड में न तो स्वेटर था न ही उसके शरीर पर गर्म कपड़ा।

रात में ठंड 6 डिग्री होने के चलते मासूम कोल्ड स्ट्रेस का शिकार बन चुकी थी
बांगड़ अस्पताल लाते ही बच्ची ने एक उल्टी की और उसकी मौत हो गई। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आर. के विश्नोई को बुलाया गया, लेकिन जब तक बच्ची दम तोड़ चुकी थी। डॉ. विश्नोई ने बताया कि बच्ची का शरीर पूरी तरह से ठंडा पड़ गया था। ऐसा लग रहा था जैसे बच्ची काफी समय से ठंडे स्थान पर रही हो। हालांकि उन्हाेंने यह संभावना जताई है कि हो सकता है ठंड की वजह से हार्ट व श्वास नलिका पर इसका असर हुआ और उसकी मौत हो गई हो। हालांकि यह तय है कि बच्ची कोल्ड स्ट्रेस की चपेट में थी, यानि उसके शरीर का तापमान 34 डिग्री सेंटीग्रेड से नीचे था, जो उसकी मौत का प्रमुख कारण है।

हाड़ कंपाती सर्दी सहन नहीं कर पाया मासूम का दिल, पाली लाते ही अस्पताल में साथ छोड़ गई सांसें
डॉक्टरों का कहना है कि एक से तीन साल तक के बच्चों का शरीर ठंड को सहन करने लायक नहीं होता है। ऐसे बच्चों को कम से कम 25 से 28 डिग्री का तापमान चाहिए। अन्यथा वे बीमार हो सकते हैं। जंगल में मासूम को फेंकने के कारण रात में 6 डिग्री तापमान होने के कारण उसका दिल चुभती ठंड सहन नहीं कर पाया। उसकी नसों में खून जम गया। इसके चलते उसकी मौत हो गई।

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