मेरे साथ जो दरिंदगी हुई, उसे याद कर कांप उठती हूं

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रांची। झारखंड की बेटियों के साथ काम दिलाने के बहाने हैवानियत का गंदा खेल खेलने का क्रम जारी है। मानव तस्कर गरीबी और लाचारी का फायदा उठाते हुए नाबालिग लड़कियों को दिल्ली ले जा रहे हैं। उनका दैहिक शोषण किया जा रहा। बच्चियों को दिल्ली में रईसों के हाथों बेचा जा रहा, जहां उनसे घरों में नौकरानी का काम तो कराया ही जा रहा है, रेप भी किया जा रहा।

ऐसे हुआ इसका खुलासा

इसका खुलासा एक बार फिर मंगलवार को उस समय हुआ, जहां नई दिल्ली-रांची राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन से झारखंड के विभिन्न जिलों की 15 नाबालिग लड़कियों और एक लड़के को रेस्क्यू कर रांची लाया गया। इन सभी बच्चों को चंडीगढ़ बाल संरक्षण आयोग और शक्तिवाहिनी संस्था ने संयुक्त कार्रवाई कर बरामद किया। अभी इन्हें रांची रेलवे स्टेशन के पास स्थित प्रेमाश्रय में रखा गया है। वहां से बच्चियों को उनके घर का पता लेकर पहुंचाने की पहल शुरू कर दी गई है।

15 साल की लड़की के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं

रेस्क्यू के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि मानव तस्कर प्रभा मुनि, उसका पति रोहित मुनि और बेटी ने गोड्डा की 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। रोहित ने तो कई बार उसके साथ रेप भी किया। गोड्डा की नाबालिग लड़की के साथ  बातचीत की और उनलोगों की व्यथा और पूरे वाकयात की जानकारी ली।

गले में चाकू से वार कर मारने की कोशिश की

– पीड़िता ने बताया, हम सभी लड़कियां गरीब परिवार से हैं। दो जून की रोटी भी ढंग से नसीब नहीं होती थी। इस कारण मजबूरन अच्छी जिंदगी जीने और घर की बेबसी खत्म करने के लिए बाहर जाकर कमाने के बारे में सोचा।

– हमलोगों का मालूम नहीं था कि जीवन संवारने की यह सोच हमारी जिंदगी के लिए अंधेरी कोठरी साबित होगी। मानव तस्करों ने दिल्ली ले जाकर जो किया, उसके बारे में हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी। हमें प्रलोभन देकर वहां बड़े मानव तस्करों के हवाले कर दिया। वहां तस्करों ने सौदा कर हमें नौकरानी बना दिया।

– मेरे साथ जो दरिंदगी हुई, उसे याद कर कांप उठती हूं। मानव तस्कर रोहित मुनि मुझसे रेप करता रहा। इसमें उसकी पत्नी प्रभा मुनि भी साथ देती थी। जब भी विरोध करती, प्रभा, रोहित के साथ-साथ उनकी बेटी दीपशिखा भी मारपीट करती। गर्म आयरन से शरीर के हिस्सों काे दागा जाता।

– घाव के निशान आज भी मौजूद हैं। (रोते हुए कहा) जब उन तीनों को लगा कि उनलोगों को मुझसे आगे खतरा हो सकता है तो एक दिन मेरे गले में चाकू से वार कर हत्या करने की कोशिश की गई। गंभीर स्थिति में मैं कई महीने तक दिल्ली और चंडीगढ़ के अस्पताल में भर्ती रही।

– इस बीच सूचना मिलने पर चंडीगढ़ बाल संरक्षण आयोग की टीम ने मुझसे मुलाकात की और पूरे मामले की जानकारी ली। बातचीत में डॉक्टरों ने टीम को बताया कि मेरा कंडीशन क्रिटिकल है, जिस कारण मुझे अभी झारखंड ले जाना संभव नहीं है। इसके बाद मेरे इलाज समेत अन्य बच्चियों की बरामदगी में चंडीगढ़ आयोग के बीके गोयल और शक्तिवाहिनी ने अहम भूमिका निभाई।

बच्चियों ने कहा- मारपीट होती रही, काम के बदले एक पैसा नहीं दिया
दिल्ली से लाई गईं पीड़ित बच्चियों ने बताया- कई घरों में तो काम कराने वाले ही हमारे साथ रेप करते रहे। मारपीट भी की। काम कराने के एवज में एक पैसा तक नहीं दिया। एक-एक दिन घुटन में बीतता था। कभी हम सोचतीं कि जिंदगी की सबसे बड़ी गलती की, फिर रोने लगतीं। लेकिन वहां सुनने वाला कोई नहीं था। हमें पछतावा के अलावा कुछ नहीं मिला। अब सोचती हूं कि गांव में ही एक रोटी कम खाकर सुकून की जिंदगी जीना सही है। महानगरों में पैसे कमा कर घर की आर्थिक स्थिति सुधारने की ख्वाहिश लेकर घर से बाहर जाना जिंदगी का सबसे बड़ी गलती रही।

एफआईआर में पोक्सो एक्ट समेत अन्य धाराएं लगेंगी

इस मामले में बच्चों के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसमें पोस्को एक्ट समेत अन्य धाराएं लगेंगी। इसके अलावा विक्टिम कंपनसेशन देने, बच्चों को सुरक्षा देने और उनका पुनर्वास कराने की दिशा में हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।

– आरती कुजूर, अध्यक्ष, बाल संरक्षण आयोग