मां ने बेटे और दोस्तों से करवाया गांव की 10वीं की छात्रा से गैंगरेप, बेहोशी की हालत में फेंका

544
aajtaklives hindi news

सागर (एमपी)।मंदसौर, सतना, जयपुर के बाद अब सागर में 10 वीं में पढ़ने वाली अादिवासी छात्रा से गैंगरेप का मामला सामने आया है। मंगलवार को एक महिला की मदद से 4 आरोपियों ने उसे हवस का शिकार बनाया। इसमें आरोपी महिला का बेटा भी शामिल है। शाम को छात्रा को खेत में बने एक कमरे में एक आरोपी के घर ले जाया गया। फिर गैंगरेप किया और देर रात बेहोशी की हालत में आरोपी उसे एक स्कूल के पास फेंककर चले गए। पीड़िता को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शुरुआत में पुलिस इस मामले को दबाने की फिराक में थी। इस कारण पीड़िता का 12 घंटे बाद इलाज शुरु हो सका। महिला सहित पांचों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एसपी सत्यद्रें शुक्ल व पुलिस अधिकारियों ने गांव पहुंचकर घटना की जानकारी ली। ृ

‘12 घंटे तक खेत पर रखा, शाम को मुंह बांधकर गांव लाए, बेहोश होने तक मुझे नोंचते रहे दरिंदे’

– पीड़िता ने बताया, गाव की ममता अहिरवार मंगलवार सुबह 7 बजे मेरे पास आई और बोली की चलो तुम्हें खेत घुमा लाते हैं। मैंने मना किया, लेकिन उसने जबरदस्ती मेरा हाथ पकड़ा और अपने साथ खेत पर बने अपने घर पर ले गई। मुझे अंदर बैठाकर बोली रुकना, मैं आती हूं। बाहर जाकर उसने दरवाजे की कुंडी लगा दी। कुछ देर बाद ममता का बेटा हल्ले अहिरवार और पड़ोस में रहने वाले उसके दोस्त गोपाल अहिरवार, राजेश अहिरवार व प्रवेंद्र पटेल घर की कुंडी खोलकर अंदर घुस आए और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। चारों ने एक के बाद एक दुराचार किया। राजेश शराब के नशे में था। शाम करीब 7 बजे मेरा मुंह बांधकर ये लोग मुझे गांव में राजेश के घर भी ले गए। वहां राजेश और हल्ले ने फिर से ज्यादती की। मुझे तकलीफ की वजह से बेहोशी सी छाने लगी थी। रात में मेरे मुंह पर कपड़ा बांध कर चारों ने मुझे गांव की स्कूल के पास फेंक दिया। मुझे खोजते हुए मेरे माता- पिता वहां पहुंचे और उन्होंने आरोपियों को वहां से भागते हुए देखा।

व्यवस्था की बेशर्मी: 12 घंटे तक इलाज नहीं, डॉक्टर बोले- बताया नहीं रेप हुआ

– गैंगरेप की शिकार आदिवासी छात्रा का देवरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 12 घंटे तक इलाज शुरू नहीं हो सका। जब उसे 108 एंबुलेंस से लाया गया तो ओपीडी पर्ची बनाने में अड़ंगे डाले गए। पैसा जमा करने बाद भी पर्ची नहीं बनाई गई। गौरझामर से पुलिस भी उसके बयान लेने नहीं पहुंची। जब मामले ने तूल पकड़ा तो सुबह करीब 10.30 बजे एसपी सत्येंद्र शुक्ल व तीन थानों की पुलिस स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। इसके बाद पीड़िता को इलाज के लिए सागर रैफर किया गया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

– इस संबंध में जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ व डॉक्टरों से बात की तो उनका तर्क था कि हमें यह नहीं बताया गया था कि लड़की के साथ बलात्कार हुआ है। इसी बात को लेकर स्थानीय नेताओं की स्टाफ से बहसबाजी भी हुई। पीड़िता की दादी ने बताया कि रात में अस्पताल पहुंचे तो यहां ओपीडी में पर्ची नहीं बनाई गई। पूछा कि क्या पुलिस में गईं थीं। मैंने बताया कि हां पुलिस घर आई थी। पर्ची के लिए पैसे नहीं थे, घर से मंगाकर जमा किए। इसके बाद भी रात भर पर्ची नहीं दी।