बेटे की मौत का पल-पल का अपडेट ले रही थी मां, मासूम बोला- अंकल मुझे क्यों मार रहे हो…

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eight year old innocent child killed in gwalior forest

ग्वालियर।पति को लकवा होने के कारण प्रेमी के साथ घर बसाने के लिए एक महिला ने अपनी ही कोख से जन्मे 8 साल के बेटे की हत्या करवा दी। प्रेमी अपने दो दोस्तों के साथ बच्चे को शहर से 110 किमी दूर सबलगढ़ के बीहड़ में ले गया और वहां बच्चे की गला घोंटकर हत्या कर दी। बेटे विनीत की हत्या के आरोप में पुलिस ने महिला और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार कर लिया

मासूम ने रोते हुए कहा- अंकल मुझे क्यों मार रहे हो, मैंने क्या किया है…

– 8 साल के मासूम को जब हत्यारे जंगल में ले गए तो वह भागने की कोशिश करने लगा। दो साथियों ने उसके हाथ-पैर पकड़े और तीसरा गला दबाने लगा। वह रोते हुए बोला कि अंकल मुझे क्यों मार रहे हो, मैंने क्या गलती की है। संदीप (प्रेमी) ने यह कहते हुए गला घोंट दिया कि तेरे कारण हम फंसेंगे। हत्यारों को उस पर जरा भी रहम नहीं आया। जब उसके गले में फंदा लगाया तो वह छटपटाने लगा। उसने संघर्ष भी किया लेकिन आखिर वह हार गया।

– यह बात खुद आरोपियों ने पुलिस को बताई। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा तो उन्होंने बताया कि विनीत को पता नहीं था कि हम उसे हत्या करने ले जा रहे हैं। उसकी मां खुद उसे संदीप के पास छोड़कर गई थी।

– 13 जुलाई को दोपहर में सपना ने बेटे को बाजार जाने का कहकर संदीप जाटव के साथ भेजा था। उसने यह भी कहा था कि पीछे से मैं भी आ रही हूं। मां के भेजने पर विनीत, संदीप के साथ चला गया।

– संदीप ने पुलिस को बताया कि विनीत उन्हें जानता था, इसलिए उसे जिंदा नहीं छोड़ सकते थे। उसे पूरी योजना के साथ जंगल ले गए। जंगल ले जाकर गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद सपना को जानकारी दी कि अब हमारा रास्ता क्लियर हो गया।

क्या था पूरा मामला और कैसे खुला राज…

– सपना ने 14 जुलाई को ग्वालियर के बहोड़ापुर थाने में विनीत के अपहरण का मामला दर्ज कराया था। उसने जेठ और ससुराल के लोगों पर संदेह जताया था। पूछताछ में सपना के जेठ और अन्य परिजन ने बताया कि इस मामले से सपना की भूमिका संदिग्ध है।

– पुलिस ने सपना के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकाली तो पता चला कि उसकी संदीप जाटव से लगातार बात हो रही थी। वह बेटे के मरने की पल-पल की जानकारी संदीप से ले रही थी। संदीप की तलाश की गई तो वह अपने घर से गायब मिला। उसके दोस्तों की मदद से संदीप पकड़ में आया।

– पुलिस ने सपना के अपराध कुबूलने की बात कहकर संदीप से पूछताछ की तो वह टूट गया। उसने पूरा घटनाक्रम बताया।

चप्पल और खिलौना रास्ते में मिले

27 जून को सपना और धर्मेन्द्र की मैरिज एनिवर्सरी थी। विनीत पिता के साथ बाजार गया था और वह खिलौना लेकर आया था। जब मां ने उसे संदीप के साथ भेजा तो वह खिलौना उसके पास ही था। जंगल में जहां विनीत का शव मिला, वहां से उसका खिलौना भी पुलिस ने बरामद किया। उसकी चप्पलें और कपड़ों से परिजनों ने पहचान की। पुलिस जब हत्या के आरोपियों को मौके पर लेकर गई तो वह जंगल में रास्ता भटक गए। विनीत के खिलौने से उन्हें वह जगह याद आई, जहां उसका गला दबाया था।

थाने में बेटे को ढूंढ रही थीं पिता की आंखें, उन्हें पता ही नहीं था कि वह नहीं रहा, पूछ रहे थे- लला कब मिलेगा

– धर्मेन्द्र को 2 साल पहले पैरालाइसिस अटैक पड़ा था। इसके बाद दिमाग में खून का थक्का जम जाने से पहले उनकी याददाश्त चली गई। कुछ महीने पहले याददाश्त आई लेकिन सोचने-समझने की क्षमता कम हो गई। उनका इलाज भी चल रहा था।

– इसका फायदा सपना ने उठाया। वह अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती थी। संदीप के साथ घर बसाने के सपने उसने देखे और इसमें अपने पति, बच्चों तक को भुला दिया।

– उसके जेठ और अन्य ससुरालीजन ने मकान बेचने पर आपत्ति जताई और मकान विनीत के नाम करने पर अड़े थे। इस पर उसने अपने बेटे को ही रास्ते से हटाने का सोच लिया। बेटे को अगवा कर हत्या करवा दी।

– मासूम के पिता को पता ही नहीं था कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। पिता थाने में डबडबाई आंखों से बार-बार यही पूछ रहे थे कि लला कब तक मिल जाएगा। विनीत को उसके पिता प्यार से लला कहते थे।

– पिता की खुद की तबीयत ठीक नहीं रहती लेकिन जब गुमशुदगी के पोस्टर लग रहे थे तो वह भी अपने हाथ से पोस्टर लगा रहे थे।

कभी संदीप को देखती तो कभी रोने लगती थाने में बैठी सपना

सोमवार को सपना बहोड़ापुर थाने के कमरे में बैठी थी। कमरे के एक कोने में संदीप और उसके साथी बैठे थे। थाने में भी वह बार-बार संदीप को देख रही थी। इशारों में कुछ बात कर रही थी। पुलिसकर्मियों के टोकने पर सिर झुका लेती। फिर अचानक रोने लगती और यह दिखाने की कोशिश करती कि उसे अपने किए पर पछतावा है, लेकिन उसके कृत्य को देखते हुए वहां मौजूद पुलिसकर्मी यह मानने को तैयार नहीं थे कि सपना को अपने किए का कोई अफसोस है। वे सपना के रोने को बचाव का नाटक ही मान रहे थे।

पति बीमरा हुआ तो संदीप से बढ़ गईं नजदीकियां

8 साल पहले धर्मेंद्र शर्मा की शादी सपना से हुई थी। धर्मेंद्र एक फैक्टरी में सुपरवाइजर का काम करता था। दो साल पहले धर्मेंद्र को अचानक लकवा हो गया। इस यहीं से सपना ने उससे दूरी बनाना शुरु कर दिया और संदीप जाटव से नजदीकियां बढ़ाने लगी। संदीप ने सपना की ससुराल के पास ही एक कमरा किराए पर ले लिया।

घर की रायफल प्रेमी को दे दी थी

संदीप को एक साल पहले परिजनों ने सपना के घर से पकड़ा था। उसे पकड़कर पुलिस को सौंपा था और चोरी के प्रयास का मामला दर्ज करवाया था। करीब एक महीने पहले घर की रायफल सपना ने संदीप को दे दी। जब परिजनों को यह पता लगा तो रायफल के बारे में पूछा। परिजन एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रहे थे। इस वजह से सपना ने उन्हें अपहरण के मामले में झूठा फंसाने का प्लान बनाया।

मासूम बेटी पूछ रही थी मां को पुलिस कहां ले गई

धर्मेन्द्र का पूरा परिवार बर्बाद हो गया। सपना की एक भूल के कारण बेटा दुनिया से चला गया। धर्मेन्द्र मानसिक रूप से कमजोर हैं।  मासूम 6 साल की खुशबू को कुछ पता ही नहीं कि उसका परिवार बिखर गया। वह बार-बार पूछ रही थी कि मां को पुलिस कहां ले गई।