जज ने कहा- अपनी इच्छा पूर्ति के लिए ये शख्स किसी को मार सकता है

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इस शख्स ने एक साथ किया 5 मर्डरः महिला ने कॉल कर प्रेमी को बुलाया और बनाने लगी संबंध, तभी नींद से उठे एक-एक कर 4 बच्चे…प्रेमी ने सबको दे दी मौत, विरोध किया तो महिला को भी मारा

आरोपी के वकील ने कहा, सर वो अपनी मां का इकलौता बेटा है, कोर्ट ने खारीज की अपील

भिंड (मध्यप्रदेश). शहर के वीरेंद्र नगर इलाके में चार छोटे-छोटे बच्चों और एक महिला की हत्या के मामले में अंकुर उर्फ नीतेश दीक्षित को द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश एमएल राठौर ने दोषी मान लिया। मंगलवार दोपहर 3.40 बजे अंकुर को कोर्ट रूम में लाया गया। डीपीओ प्रवीण दीक्षित ने कहा- चार अबोध बच्चों और एक असहाय महिला की जघन्य तरीके से हत्या की गई है। इसलिए इस प्रकरण को विरल से विरलतम की श्रेणी में रखते हुए दोषी को मृत्युदंड की सजा दी जाए। इस पर अंकुर के वकील ने बचाव करते हुए कहा- यह प्रकरण विरल से विरलतम की श्रेणी में नहीं आता है। सिर्फ हत्या का मामला है। इसलिए दंड में नरमी बरती जाए। लेकिन कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए आरोपी को फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने टिप्पणी की है कि महिला से संबंध होने पर जो पांच लोगों की हत्या कर सकता है, वह अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए किसी को भी मार सकता है, इसलिए उसे जीवित छोड़ना समाज को असुरक्षित करना है। बता दें, मामला 14 मई 2016 का है।

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डीपीओ दीक्षित ने कहा- चार छोटे-छोटे बच्चों के हाथ पैर बांधकर उनके मुंह में कपड़ा ठूंस कर उनका गला रेता गया है। एक असहाय महिला की निर्ममता से हत्या की गई है। अंकुर के बचाव में वकील ने कहा- वह अपनी मां का इकलौता बेटा है। उसके ऊपर पूर्व से कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। इसलिए सहानुभूति से विचार किया जाए। डीपीओ दीक्षित ने सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग देते हुए कहा कि अपराधी की उम्र, उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि आदि के आधार पर उसे मृत्युदंड से नहीं रोक सकते। इसके बाद जज ने अंकुर दीक्षित को मृत्युदंड का आदेश सुनाया।

कोर्ट की टिप्पणी: आरोपी का यह आपराधिक कृत्य विरलतम की श्रेणी में आता है
”जो व्यक्ति केवल एक महिला के साथ संबंध होने के कारण चार छोटे-छोटे बच्चों एवं रीना की निर्ममतापूर्वक हत्या कर सकता है, वह व्यक्ति भविष्य में अपनी इच्छा की पूर्ति न होने पर किसी भी व्यक्ति को मार सकता है। उसमें सुधार होने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे व्यक्ति को समाज में जीवित छोड़ना अन्य व्यक्तियों की जान एवं समाज को असुरक्षित करना है। उक्त पांच व्यक्तियों की जघन्य रूप से हत्या की गई, जिससे पूरा शहर एवं आसपास के लोग दंग रह गए। यदि आरोपी को कारावास से दंडित किया गया तो निश्चित ही समाज एवं पीड़ितों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा और इस प्रकार के घिनौने कृत्य किए जाने के लिए अपराधी प्रोत्साहित होंगे। अत: इस अपराध की पृष्ठभूमि में आजीवन कारावास का दंडादेश अपर्याप्त प्रतीत होता है और उससे न्याय की मंशा पूर्ण नहीं होती, क्योंकि आरोपी का यह आपराधिक कृत्य विरलतम की श्रेणी में आता है।”

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बच्चों को नींद की गोली देकर सुला देती थी, एक बच्चे ने देख लिया तो एक के बाद एक पांचों को मार डाला
14 मई, 2016 को शहर के वीरेंद्र नगर में रामबाबू शुक्ला के घर के कमरे में पलंग पर बहू रीना, जमीन पर नातिन छवि, महिला व रीना की भतीजी अंबिका की लाश पड़ी थी। इनके नाक से झाग आ रहा था। गले कटे हुए थे। दूसरे में रूम में उनके साले राजकुमार के बेटे गोलू की लाश पड़ी थी। उसके भी हाथ पैर बंधे थे। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो किचिन के सिंक में ग्लास में नशीला पदार्थ होने का संदेह हुआ। एफएसएल अधिकारी ने भी घटनास्थल से फिंगर प्रिंट उठाए। मृतिका के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई। सामने आया कि उसकी बात जिस नंबर पर सबसे ज्यादा हुई वह अंकुर उपयोग कर रहा था। इसके बाद अंकुर से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि वह मृतका रीना शुक्ला के मकान में किराए से रहने वाली रोली भदौरिया के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने जाता था। इसी दौरान मृतिका से उसके संबंध बन गए थे। 13-14 मई की रात भी वह मृतिका के घर गया था। अंकुर ने नर्सिंग कोर्स किया है, इसलिए उसने रीना को पहले नींद की गोलियां दी जो उसके आने से पहले रीना बच्चों को खिलाकर सुला देती थी। घटना वाली रात को भी रीना ने अंकुर को मिस कॉल देकर बुलाया था। जब वह रीना के घर पहुंचा और संबंध बना रहा था तभी गोलू ने दोनों को देख लिया। इसके बाद अंकुर ने गोलू की हत्या कर दी, तभी चिल्लाने की आवाज सुनकर लड़कियां जागने लगीं तो एक के बाद एक उनकी भी हत्या करता गया। यह सब देखकर रीना विरोद कर रही थी तो अंकुर ने उसका भी गला रेत कर मार डाला।

तीन महीने तक किसी वकील ने नहीं लिया था केस
इस घटना से पूरे शहर ही नहीं बल्कि प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। इस घटना से समाज में इतना व्यापक आक्रोश था कि जिला न्यायालय के अधिवक्ताओं ने आरोपी अंकुर दीक्षित की पैरवी करने से इंकार कर दिया। करीब ढाई से तीन महीने तक आरोपी के बचाव में कोई वकील नहीं आया। ऐसे में न्यायालय ने आरोपी अंकुर के लिए विधिक सहायता कार्यालय से अधिवक्ता की नियुक्ति की।

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