खूंटी में हुए गैंगरेप में पादरी के शामिल होने के पुख्ता सबूत: झारखंड पुलिस

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अपर पुलिस महानिदेशक आर के मलिक ने बताया कि पुलिस ने अभी तक इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की है.

नई दिल्ली: झारखंड के खूंटी में हुए गैंगरेप कांड में हर बीतते दिन के साथ नए खुलासे हो रहे हैं. मामले की जांच में जुटी पुलिस के अनुसार इस मामले में पादरी अल्फांसो आईंद के शामिल रहने को लेकर पर्याप्त सबूत हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार पादरी को फंसाए जाने के आरोप गलत हैं. गौरतलब है कि इस घटना में पादरी की भूमिका होने का स्थानीय लोग शुरू से विरोध कर रहे हैं. उनके अनुसार इस पूरे मामले में पादरी को जानबूझकर फंसाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि सोमवार को झारखंड पुलिस ने स्थानीय लोगों के इन तमाम दावों को गलत बता दिया है. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस मामले की अभी तक की जांच में जो बात सामने आई उससे यह साफ है कि पादरी इस पूरे मामले में शामिल रहा है. पुलिस के अधिकारी ने बताया कि इस मामले में पीड़ित लड़कियों ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने बयान में पादरी को दोषी बताया है.
तीन आरोपियों के शामिल होने की आशंका
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झारखंड पुलिस के प्रवक्ता अपर पुलिस महानिदेशक आर के मलिक ने बताया कि पुलिस ने अभी तक इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की है. गिरफ्तार लोगों में फादर अल्फांसो भी शामिल हैं. पुलिस के अनुसार पिछले मंगलवार को खूंटी में हुई गैंगरेप की इस घटना में कम से कम सात लोगों ने पांच युवतियों का अपहरण कर उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया था. पुलिस के अनुसार आरोपियों ने इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया था,जिसे बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर डाल दिया. झारखंड पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस धर्म या जाति के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं करती है, वह संविधान के दायरे में कानून के अनुसार कार्रवाई करती है. और इस मामले में भी हम ऐसा ही कर रहे हैं. अभी तक की जांच में जो सामने आया है और पीड़िता ने अपने बयान जिन आरोपियों का नाम बताया है पुलिस ने उन्हें ही गिरफ्तार किया है.

यह पूछे जाने पर कि ईसाई मिशनरी पुलिस पर जानबूझ कर पादरी को फंसाने का आरोप लगा रही है, तो मलिक ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह झूठ और बेबुनियाद है. क्योंकि पुलिस के पास प्रमाण हैं कि पादरी अल्फांसो ने ही कोचांग के मिशनरी स्कूल में नुक्कड़ नाटक दल को बुलाया था और फिर जब अपराधी वहां पहुंच करनुक्कड़ नाटक दल का हथियारों के बल पर अपहरण करने लगे तो पादरी ने अपनी नन को उन्हें छोड़ने को कहा और नुक्कड़ नाटक दल की आदिवासी लड़कियों को उनके साथ दो घंटे के लिए जाने को कहा.