जानिए हलाला हुल्ला और खुल्ला के बारे में आखिर क्या होता है “हल्ला” और “खुल्ला”

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तीन तलाक़ मुसलमान समाज में तलाक़ का वो जरिया है, जिसमे मुस्लिम आदमी अपनी बीवी को सिर्फ तीन बार ‘तलाक़’ कहकर अपनी शादी किसी भी क्षण तोड़ सकता है। इस नियम से होने वाले तलाक़ स्थिर होते हैं, शादी ख़त्म हो जाती है। वहीं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मुताबिक तीन तलाक का कतई ये मतलब नहीं कि एक ही बार में तलाक, तलाक, तलाक बोल दो और रिश्ता खत्म। बजाए इसके तीन तलाक होने में 3 महीने या कुछ ज्यादा वक्त लग जाता है।

अगर किसी महिला और पुरुष के रिश्ते इतने बिगड़ चुके हैं कि उनमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं रह गई है तो वे काजी और गवाहों के सामने पुरुष महिला को पहला तलाक देता है। इसके बाद दोनों करीब 40 दिन साथ गुजारते हैं पर शारीरिक संबंध नहीं बनाते। शरिया के मुताबिक अगर एक पुरुष ने औरत को तलाक दे दिया है तो वो उसी औरत से दोबारा तब तक शादी नहीं कर सकता जब तक औरत किसी दूसरे पुरुष से शादी कर अपने नए पति के साथ शारीरिक संबंध न बना ले और उसके बाद अपने नए पति से तलाक न ले ले।

औरत की दूसरी शादी को ‘निकाह हलाला’ कहते हैं। वैसे तो ये हालात जिसमें पहला पति फिर से अपनी बीवी से शादी करना चाहे ये किसी बड़े इत्तेफाक के चलते ही बन सकती है अक्सर होता ये है कि तीन तलाक की आसानी के चलते अक्सर बिना सोचे-समझे मर्द तीन बार तलाक-तलाक-तलाक बोल देते हैं। बाद में जब उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है तो वे अपना संबंध फिर से उसी औरत से जोड़ना चाहते हैं।

ऐसे में ये परिस्थिति अक्सर देखने को मिल जाती है पर फिर से संबंध जोड़ने से पहले निकाह हलाला जरूरी होता है। वैसे इस्लाम के हिसाब से भी जानबूझ कर या प्लान बना कर किसी और मर्द से शादी करना और फिर उससे सिर्फ इस लिए तलाक लेना ताकि पहले शौहर से निकाह जायज हो सके यह साजिश नाजायज है। मौलवी को मिलाकर किसी ऐसे इंसान को तय कर लिया जाता है जो निकाह के साथ ही औरत को तलाक दे देगा।

इस प्रक्रिया को ही हुल्ला कहते हैं। यानी हलाला होने की पूरी प्रक्रिया ही ‘हुल्ला’ कहलाती है। वो इंसान जो औरत के साथ शादी करके बिना संबंध स्थापित किए तलाक दे देने के लिए राजी होता है। उसे तहलीली कहा जाता है। ये निकाह के साथ ही औरत को तलाक दे देता है ताकि वो अपने पहले शौहर से शादी कर सके। शरिया के मुताबिक अगर सिर्फ बीवी तलाक चाहे तो उसे शौहर से तलाक मांगना होगा क्योंकि वो खुद तलाक नहीं दे सकती।

अगर शौहर तलाक मांगने के बावजूद भी तलाक नहीं देता तो बीवी काजी के पास जाए और उससे शौहर से तलाक दिलवाने के लिए कहे। इस्लाम ने काजी को यह हक दे रखा है कि वो उनका रिश्ता खत्म करने का ऐलान कर दे जिससे उनका तलाक हो जाएगा। इसे ही ‘खुला’ कहा जाता है।