इन्हें निकालने वाले अफसर बोले- घर से इतनी बदबू आ रही थी, कि खड़ा होना हो गया था मुश्किल

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गंदगी से भरे एक फ्लैट से निकाले गए 4 मासूम बच्चे, न कभी डॉक्टर के पास गए और न कभी स्कूल का मुंह देखा, कचरे के डिब्बे में पड़े सड़ चुके खाने पर हैं जिंदा

इन्हें निकालने वाले अफसर बोले- घर से इतनी बदबू आ रही थी, कि खड़ा होना हो गया था मुश्किल

मॉस्को. रूस में पुलिस ने गंदगी से भरे एक फ्लैट से 4 बच्चों को बहुत ही खराब कंडीशन में निकाला है। इनमें तीन लड़के और एक लड़की है। इनके जन्म का रजिस्ट्रेशन तक नहीं हुआ है और न ही इन्होंने आज तक स्कूल की शक्ल देखी है। पब्लिक डस्टबिन के कचरे के ढेर से बचे हुए खाने के सामान से ही इनका पेट पल रहा था। इन्हें बात करना तक नहीं आता। ये इशारों में एक दूसरे से बात करते हैं। पड़ोसियों ने इस परिवार को लेकर अथॉरिटी को अलर्ट किया, जिसके बाद इन्हें बाहर निकाला गया। इन्हें निकालने वाले अफसरों का कहना है कि फ्लैट से इतनी बदबू आ रही थी वहां खड़ा तक होना मुश्किल हो गया था।

गंदगी से भरे फ्लैट में रह रहे थे बच्चे
– चारों बच्चे को नॉर्थ मॉस्को के माइटिश्ची में एक फ्लैट से निकाला गया है। चारों बच्चे अपना मां और दादी के साथ रह रहे थे। इनमें सबसे बड़ी लड़की की उम्र 8 साल और सबसे छोटे लड़के की उम्र 2 साल है।
– अथॉरिटी को इनकी डेट ऑफ बर्थ का भी पता नहीं है क्योंकि जन्म के बाद इनका रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया गया है। सिर्फ 8 साल की बच्ची सोफिया का रजिस्ट्रेशन हुआ है।
– इन्हें जन्म से लेकर अब तक कभी डॉक्टर को नहीं दिखाया गया और न ही इन्होंने किंडरगार्टन या स्कूल की ही शक्ल देखी है। ये गंदगी से पटे फ्लैट में बहुत ही बुरी स्थिति में रह रहे थे।
– बच्चे को निकालने वाले पुलिस अफसर के मुताबिक, अपार्टमेंट से आ रही बदबू भयानक थी। घर में बच्चे जिस पॉटी का इस्तेमाल करते है, उसे भी महीनों से साफ तक नहीं किया गया था।

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8 साल की बच्ची चम्मच भी नहीं पहचानती
– अफसर के मुताबिक, घर में बच्चों के खाने के लिए सिर्फ ब्रेड और सड़े हुए सेब मिले। बच्चों की नजर में खाने में ब्रेड ही सबसे स्वादिष्ट खाना है, क्योंकि इसके अलावा उन्होंने कुछ खाया ही नहीं।
– 8 साल की बच्ची को भी एल्फाबेट्स और रंगों तक का ज्ञान नहीं है। वो उम्र में 8 साल की हो गई है, लेकिन उसका विकास 4 साल के बच्चे से भी कम है। फिर भी वो घर के छोटे बच्चों के लिए सपोर्ट और प्यार का सबसे बड़ा जरिया है।
– इन्हें न तो बातचीत करने आती है और न ही इन्हें हाइजीन के बारे में बताया गया है। वो पानी तक से डरते हैं। उन्हें घर में इस्तेमाल होने वाले चम्मच और फोक तक का नाम नहीं पाता था।

पड़ोसियों ने किया अलर्ट
– पड़ोसियों ने इस फैमिली को लेकर अथॉरिटी को अलर्ट किया। उन्होंने बताया कि घर की बूढ़ी महिला रोज परिवार के लिए कचरे के डिब्बों से खाना जुटाती है। इसके बाद इन्हें निकाला गया। वहीं, निकलाने जाने के बाद बच्चों की मां का कहना है कि उसके पास बच्चों के रजिस्ट्रेशन, उन्हें डॉक्टर के पास ले जाने और स्कूल भेजने का टाइम नहीं है। अथॉरिटी के अफसरों के मुताबिक, बच्चों की मां को बच्चों की अनदेखी करने पर 3 साल जेल की सजा हो सकती है।

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