शनिदेव ने नहीं मानी रावण की बात और बन गया मेघनाद की मृत्यु का योग

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रिलिजन डेस्कशुक्रवार, 19 अक्टूबर को दशहरा है। इस दिन देशभर में बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। त्रेतायुग श्रीराम ने रावण का वध किया था। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार रावण और शनिदेव से जुड़ी एक लोक कथा काफी प्रचलित है। जानिए ये कथा…

प्रचलित कथाओं के अनुसार जब रावण के पुत्र मेघनाद का जन्म होने वाला था, तब रावण ने सभी ग्रहों को शुभ और सर्वश्रेष्ठ स्थिति में रहने का आदेश दिया था। उस समय शनि के अलावा शेष सभी ग्रह रावण की मनचाही स्थिति में आ गए थे। रावण ये बात जानता था कि शनि आयु के देवता हैं और वे आसानी से मेघनाद के लिए शुभ स्थिति निर्मित नहीं करेंगे। शनि ने अंतिम समय पर ऐसी स्थिति निर्मित कर दी थी, जिसके प्रभाव से मेघनाद लक्ष्मण के हाथों मारा गया था।

मेघनाद के लिए रावण की थी ये इच्छा

जब रावण और मंदोदरी के पुत्र मेघनाद का जन्म होने वाला था। तब रावण चाहता था कि उसका पुत्र अजेय हो, जिसे कोई भी देवी-देवता हरा न सके, रावण चाहता था कि उसका पुत्र दीर्घायु भी हो, उसकी मृत्यु हजारों वर्षों बाद ही हो। उसका पुत्र परम तेजस्वी, पराक्रमी, कुशल यौद्धा, ज्ञानी हो।

रावण था ज्योतिष का ज्ञाता

रावण प्रकाण्ड पंडित और ज्योतिष का जानकार था। इसी कारण मेघनाद के जन्म के समय उसने ज्योतिष के अनुसार सभी ग्रहों और नक्षत्रों को ऐसी स्थिति में बने रहने का आदेश दिया कि उसके पुत्र में वह सभी गुण आ जाए जो वह चाहता है।

रावण का प्रभाव इतना था कि सभी ग्रह-नक्षत्र, देवी-देवता उससे डरते थे। इसी वजह से मेघनाद के जन्म के समय सभी ग्रह वैसी ही राशियों में स्थित हो गए जैसा रावण चाहता था। रावण ये बात जानता था कि शनि देव न्यायाधीश हैं और आयु के देवता हैं। शनि इतनी आसानी से रावण की बात नहीं मानेंगे। अत: रावण ने बल प्रयोग करते हुए शनि को भी ऐसी स्थिति में रखा, जिससे मेघनाद की आयु वृद्धि हो सके।

मेघनाद के जन्म के समय शनि ने नजरें कर ली थीं तिरछी

शनि न्यायाधीश हैं, अत: रावण की मनचाही स्थिति में रहते हुए भी उन्होंने ठीक मेघनाद के जन्म के समय अपनी नजरें तिरछी कर ली थीं। शनि की तिरछी नजरों के कारण ही मेघनाद अल्पायु हो गया। जब रावण को इस बात का अहसास हुआ तो वह शनि पर अत्यंत क्रोधित हो गया। क्रोधवश रावण ने शनिदेव के पैरों पर गदा से प्रहार कर दिया। इसी प्रहार की वजह से शनि देव लंगड़े हो गए। तब से शनि की चाल धीमी हो गई।

मेघनाद था पराक्रमी और शक्तिशाली

शनि के अलावा शेष सभी ग्रहों की शुभ स्थिति के कारण मेघनाद बहुत पराक्रमी और शक्तिशाली था। रावण पुत्र ने देवराज इंद्र को भी परास्त कर दिया था। इसी वजह से मेघनाद का एक नाम इंद्रजीत भी पड़ा। शनि की तिरछी नजरों के कारण मेघनाद अल्पायु हो गया था। श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध में लक्ष्मण के हाथों मेघनाद मारा गया।