पानी नहीं दूध डालने पर भरता है घड़ा, चमत्कार नहीं तो क्या है?

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sheetla mata temple

राजस्थान का नाम आते ही दिमाग में किलों और महलों का चित्र उभरने लगता है। लेकिन फिलहाल हम यहां किसी किले या महल की बात नहीं करेंगे। बल्कि हम बात करेंगे एक ऐसे मंदिर की जिसमें एक दैवीय घड़ा रखा है। दैवीय इसलिए क्योंकि इस घड़े में कितना भी पानी डाल दो, यह हमेशा खाली ही रहता है। आगे जानिए, क्यों विज्ञान भी हैरान है इस घड़े के पानी पर…

ऐतिहासिक मंदिर और चमत्कारी घड़ा
sheetla mata temple
राजस्थान के पाली जिले में स्थित है शीतला माता का मंदिर। इस मंदिर में माता की मूर्ति के आगे जमीन में एक घड़ा गढ़ा हुआ है। कहते हैं, इस घड़े में कितना भी पानी डाल दो यह कभी भरता नहीं है।

कितना गहरा है यह घड़ा?
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जमीन में गढ़ा हुआ यह कुंडनुमा घड़ा मात्र आधा फीट गहरा और आधा फीट चौड़ा है। जानकारी के मुताबिक, इस घड़े में 50 लाख लीटर तक पानी डाला जा चुका है, फिर भी यह घड़ा खाली का खाली है।

साल में दो बार ही भरा जाता है घड़ा
sheetla mata temple
इस घड़े के मुंह को साल में केवल दो बार ही खोला जाता है और तभी इसमें पानी भरा जाता है। एक बार शीतला अष्टमी पर और एक बार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को इस घड़े में गांव और आस-पास के क्षेत्र के श्रद्धालुओं द्वारा पानी भरा जाता है। इन दोनों दिन यहां पर मेला भी लगता है।

इतना पुराना है यह मंदिर और घड़ा
sheetla mata temple
मान्यता है कि यह मंदिर करीब 800 साल पुराना है। मंदिर के निर्माण के समय से ही इस घड़े में पानी भरने की प्रथा चली आ रही है। कहते हैं कई बार वैज्ञानिकों द्वारा यह जानने की कोशिश की जा चुकी है कि आखिर यह पानी जाता कहां है? लेकिन परिणाम में कुछ नहीं मिला।

राक्षस पीता है मटके का पानी
sheetla mata temple
इस मंदिर और घड़े को लेकर भक्त एक कहानी बताते हैं, कहते हैं कि करीब 800 साल पहले गांव में एक बाबरा नाम का राक्षस आ गया, इसने गांव में आतंक मचा रखा था। दुखी गांववालों ने शीतला माता का ध्यान किया। तब माता ने प्रकट होकर राक्षस का वध कर दिया। अंतिम इच्छा के रूप में राक्षस ने मां से वरदान मांगा कि मेरी आत्मा की तृप्ति के लिए हर साल मुझे पानी पिलाया जाए। माता ने उसकी इच्छा पूरी करते हुए तथास्तु कहा। बस तभी से माता के मंदिर में इस घड़े की स्थापना कर साल में दो बार पानी चढ़ाने की प्रथा चली आ रही है।

इस तरह भर जाता है घड़ा
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जो घड़ा पानी के सैकड़ों कलश गटकने के बाद भी खाली रहता है, वह पुरोहितजी द्वारा केवल एक 1 कलश दूध डालने से भर जाता है। हर बार पानी भरने के बाद पुरोहितजी एक कलश दूध इस घड़े में अर्पित करते हैं और फिर इस घड़े का मुंह बंद कर दिया जाता है।