6 महीने पहले हुई थी शादी, पत्नी ने कहा- कोई इस तरह छोड़कर जाता है क्या…

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अम्बाला।जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए लास नायक विक्रमजीत सिंह का पार्थिव शरीर लेकर काफिला गांव में पहुंचा। पूरा वातावरण भारत माता की जय, विक्रमजीत सिंह अमर रहे, पाकिस्तान मुर्दाबाद और बोले सो निहाल-सतश्री अकाल के गगनभेदी जयघोषों से गूंज उठा। शहीद विक्रमजीत सिंह के छोटे भाई मोनू सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी। शहीद विक्रम की शादी 15 जनवरी को हुई थी। पत्नी ने कहा- कोई इस तरह छोड़कर जाता है क्या…। अब मैं किसके सहारे जिंदा रहूंगी। कौन मुझे फोन करेगा। किससे मैं घंटो बात करूंगी। यह कहते-कहते पत्नी बेहोश हो गई।

फूलों से सजी सेना की गाड़ी में तिरंगे में लिपटा था शहीद का पार्थिव शरीर

– शहीद विक्रमजीत का पार्थिव शरीर बुधवार सायं 6 बजे एयरफोर्स स्टेशन अम्बाला पहुंचा था। रात को पार्थिव शरीर सेना अस्पताल के मोर्चरी हाउस में रखा गया। गुरुवार सुबह 8 बजे फूलों से सजी सेना की गाड़ी में तिरंगे में लिपटे शहीद के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव ले जाया गया।

– शहीद का पार्थिव शरीर उनके घर ले जाया गया जहां परिजनों ने अंतिम दर्शन किए। मेजर सलीम सैय्यद की अगुवाई में सेना के पाइपर बैंड के साथ पार्थिव शरीर को गांव में गुरुद्वारा साहिब ले जाया गया और वहां से श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार किया गया।

दादा भी कर चुके हैं सेना में सेवा

डीईईओ विक्रमजीत सिंह एक साधारण किसान परिवार से संबंधित थे। उनके पिता बलजिंद्र सिंह ने कड़ी मेहनत और चुनौतियों का सामना करते हुए परिवार का पालन-पोषण किया। शहीद के दादा करतार सिंह सेना में सेवा कर चुके हैं और उन्होंने दोनों पौत्रों विक्रमजीत सिंह व मोनू सिंह को सेना में जाने के लिए प्ररेित किया। विक्रमजीत सिंह 5 वर्ष पूर्व सेना में भर्ती हुए थे और इसी वर्ष 15 जनवरी को यमुनानगर जिला से संबंधित हरप्रीत कौर से उनकी शादी हुई थी। उनके छोटे भाई मोनू सिंह भी सेना में हैं और असम में तैनात हैं।