स्मृति शेष: न मैं चुप हूं न गाता हूं…

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जो कल थे वे आज नहीं है
जो आज हैं वे कल नहीं होंगे
होने न होने का ये क्रम ऐसे ही चलता रहेगा….
हम हैं, हम रहेंगे ! ये भ्रम भी सदा पलता रहेगा….!!

25 दिसंबर 1924 को जन्मा राजनीति का शिखर प्रकाश पुंज 16 अगस्त 2018 को अंतत: दुनिया से रुखसत हो गया। देश के तीन बार प्रधानमंत्री रहे अटल जी की उम्र 93 साल थी। व्यक्तित्व ऐसा था कि विरोधी भी दिल से तारीफ करते थे। प्रधाानमंत्री के अलावा हिन्दी कवि, पत्रकार व प्रखर वक्ता रहे अटल जी ने 1980 में भाजपा की स्थापना कर देश को कांग्रेस का विकल्प दिया। जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। 24 दलों की गठबंधन सरकार चलाकर 81 मंत्रियों को अपनी राजनीतिक कुशलता से साधा। उनके नेतृत्व को कभी किसी दल ने आनाकानी नहीं की।

आओ फिर से दिया जलाएं
भरी दुपहरी में अंधियारा
सूरज परछाई से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें-
बुझी हुई बाती सुलगाएँ।
आओ फिर से दिया जलांएं…

1996 में पहली बार पीएम बनने के तुरंत बाद पोखरण परमाणु विस्फोट के जरिए देश की शक्ति को विश्व पटल पर रखा। कवि हृदय अटल ने नदी और सड़कों को जोड़ने की योजनाएं देश को दीं। संसद में अपनी वाकपटुता से विरोधियों को नेस्तनाबूत करने वाले अटल हमारे बीच अब नहीं है लेकिन उनकी कविताएं और ओजस्वी भाषण हमारे अंदर राजनैतिक शुचिता की अलख जगाते रहेंगे।

पावों के नीचे अंगारे…

बाधायें आती हैं आयें
घिरें प्रलय की घोर घटायें,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालायें,
निज हाथों में हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।

भारतीय जनता पार्टी के 93 वर्षीय दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी को किडनी ट्रैक्ट इंफेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, पेशाब आने में दिक्कत और सीने में जकड़न की शिकायत के बाद 11 जून को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली (एम्स) में भर्ती कराया गया था। जहां उन्होंने गुरुवार 16 अगस्त को अंतिम सांसें लीं।

न मैं चुप हूंं न गाता हूं…

अटल जी ने कई कविताएं लिखी हैं। उनके निधन के बाद हम इस कविता को विशेष तौर पर अपने पाठकों के समक्ष रख रहे हैं।

न मैं चुप हूं न गाता हूं

सवेरा है मगर पूरब दिशा में
घिर रहे बादल
रूई से धुंधलके में
मील के पत्थर पड़े घायल
ठिठके पांव
ओझल गांव
जड़ता है न गतिमयता

स्वयं को दूसरों की दृष्टि से
मैं देख पाता हूं
न मैं चुप हूं न गाता हूं

बिखरे नीड़…

समय की सदर सांसों ने
चिनारों को झुलस डाला,
मगर हिमपात को देती
चुनौती एक दुर्ममाला,

बिखरे नीड़,
विहंसे चीड़,
आँसू हैं न मुस्कानें,
हिमानी झील के तट पर
अकेला गुनगुनाता हूं।
न मैं चुप हूं न गाता हूं

अटल जी एक ऐसे नेता रहे जो देश के 6 शहरों से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। चार राज्यों से चुनाव लड़ा और जीता। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से आप लगा सकते हैं कि विरोधी नेता भी उनका दिल से सम्मान करते थे।