मां के बार-बार पूछने पर भी किसी ने कुछ नहीं बताया तो वह हो गई बेहोश

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पाकिस्तान की गोलीबारी में जवान शहीद, 2 दिन बाद होली पर आना था घर, लेकिन उससे पहले आ गई शहादत की खबर…4 दिन आगे बढ़ गई थी छुट्टी

पिता फौजी…मैं भी फौजी ही बनूंगा, इसी जुनून से 4 वर्ष पहले सेना में भर्ती हुआ कर्मजीत

मोगा (पंजाब) पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन कर की गई गोलीबारी में मोगा जिले के गांव जनेर वासी फौजी कर्मजीत सिंह शहीद हो गया। 16 मार्च को छुट्टी अचानक रद होने के चलते उसे 20 मार्च को छुट्टी आना था, लेकिन सोमवार की सुबह जम्मू सेक्टर के केरी, बटल और नत्थू टिब्बा में पाकिस्तान द्वारा सीजफायर का उल्लंघन करते हुए की गई गोलीबारी में सिपाही कर्मजीत सिंह के शहीद होने की खबर आई। शहीद के पिता द्वारा अपनी पत्नी कुलवंत कौर से बेटे की शहादत की बात को छुपाया गया था, लेकिन शाम पांच बजे घर में एकत्रित हुए गांववासियों और रिश्तेदारों की आंखों से बहते आंसू देख शहीद की माता को पता चल गया।

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कर्मजीत सिंह का जन्म 15 नवंबर 1994 को हुआ था। वह चार साल पहले सेना में 18 जम्मू कश्मीर राइफल में सिपाही के तौर पर भर्ती हुआ था। जबकि उसके पिता अवतार सिंह फौज से 1996 में 16 सिख रेजिमेंट से रिटायर्ड हो चुके हैं। जबकि ताया दिलबारा सिंह रिटायर्ड सूबेदार हैं, वह अगस्त 2005 को फौज से रिटायर्ड हुए थे। कर्मजीत सिंह फौज में भर्ती होने से पहले तीन साल तक गांव के लिए कबड्डी खेलता था। इस दौरान उसने दाईं बाजू पर टैटू की शक्ल में अपना नाम लिखवाया था। बाद में फौज में भर्ती होने की सोची, लेकिन बाजू पर टैटू देख उसे रिजेक्ट कर दिया गया था। इसके बाद उसने टैटू को तेजाब से साफ करवाया था। इसके बाद भर्ती हो गया था।

कर्मजीत के साथ सेना में तैनात गांव के ही दोस्त ने दी शहादत की सूचना
शहीद के पिता पूर्व फौजी अवतार सिंह ने बताया कि उसके बेटे को 16 मार्च को छुट्टी पर आना था। लेकिन किसी कारण वश उसके सीनियर अधिकारियों ने छुट्टी रद करते हुए पोस्ट पर भेज दिया था, और उसे 20 मार्च को छुट्टी लेकर घर आना था। सोमवार की सुबह उन्हीं के गांव का दूसरा फौजी गुरतेज सिंह जोकि रिश्तेदार भी है, वह कर्मजीत के साथ एक ही बटालियन में तैनात है। उसने सुबह अपनी माता रानी को फोन कर कर्मजीत सिंह के शहीद होने की सूचना दी थी। साथ ही उसने मां को अपनी कसम दी थी कि इस बारे में उसके परिवार को अभी कुछ न बताए। वह फिर फोन करेगा उसके बाद सूचित करें। इसी बीच सुबह साढ़े दस बजे उनको यूनिट से फोन आया कि उनका बेटा शहीद हो गया है। जैसे ही खबर घर पहुंची और धीरे-धीरे पूरे गांव में खबर फैल गई तथा गांव में मातम छा गया। इसके बाद पूरा गांव शहीद के घर परिवार को सांत्वना देने पहुंचा। वही, डीसी संदीप हंस से बात करने पर पूछा गया कि गांव जनेर में शहीद के घर सुबह साढ़े दस बजे मामले की सूचना आ गई थी। लेकिन प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी शहीद के घर नहीं पहुंचा तो डीसी ने कहा कि पांच बजे उनकी शहीद कर्मजीत सिंह की यूनिट में बात हुई है। वहां से शहादत की जानकारी मिली है। प्रशासन अपनी जिम्मेवारी गंभीरता से निभाएगा। इसके चंद मिनटों बाद ही धर्मकोट के एसडीएम नरेंद्र सिंह शहीद के घर पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी।

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