नहीं रहे 1971 युद्ध के हीरो अवति, 71 की जंग में पाकिस्तान के गिराए थे 3 जहाज

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मुंबई। भारतीय नौसेना के वाइस एडमिरल (रिटायर) एमपी अवति नहीं रहे। वे 91 साल के थे। भारत-पाकिस्तान के बीच हुई 1971 की जंग में एमपी अवति का बड़ा योगदान रहा था। उनके नेतृत्व वाली ईस्टर्न फ्लीट नेवल यूनिट ने ही जंग में पाकिस्तान के 3 शिप गिराए थे। एमपी अवति इस यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर थे। इसके अलावा 71 की ही लड़ाई का उनका एक और किस्सा बड़ा चर्चित है।

पाकिस्तान के अफसरों को सरेंडर करने पर कर दिया था मजबूर
18 दिसंबर 1971 को कैप्टन स्वराज प्रकाश ने एमपी अवति को बांग्लादेश (उस वक्त पूर्वी पाकिस्तान) के चटगांव चलने के निर्देश दिए। उस वक्त चटगांव में स्थिति काफी खराब थी। ये हिस्सा तब तक भारतीय सेना के नियंत्रण से दूर ही था। ज्यों ही स्वराज प्रकाश और एमपी अवति चटगांव पहुंचे, उन्हें तमाम महिलाओं ने घेर लिया। ये महिलाएं इनसे मदद करने और वहां से रेस्क्यू कराने की गुहार लगा रही थीं। दोनों ने महिलाओं को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। साथ ही पाकिस्तान के 2 सीनियर अफसरों को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया। दोनों पाक अफसरों ने अवति के सामने अपनी बंदूक रखकर आत्मसमर्पण किया। .38 कैलिबर की वो दोनों रिवॉल्वर तबसे भारतीय सेना के पास ही धरोहर के तौर पर रखी थीं। इसी साल सितंबर में अवति के हाथों ही वो दोनों बंदूकें नेशनल डिफेंस एकेडमी को सौंपी गई थीं।

71 की लड़ाई में उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया था
71 की लड़ाई में अदम्य साहस दिखाने के लिए उन्हें वीर चक्र से भी सम्मानित किया गया। एमपी अवति 1945 से नौसेना का हिस्सा थे। तब उन्हें रॉयल इंडियन नेवी (आरआईएन) के लिए चुना गया था। उन्होंने ब्रिटेन के रॉयल नेवल कॉलेज और नेवल स्पेशलिस्ट स्कूल से ट्रेनिंग ली थी। मार्च 1950 में वे भारतीय नौसेना में सर्विस के लिए लौटे और 1983 तक इसका हिस्सा रहे। 1952 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने भारतीय नौसेना को उनका ध्वज सौंपा था, तब सेना की तरफ से ध्वज लेने वाले प्रतिनिधिमंडल में भी एमपी अवति शामिल थे। उन्हें सेना में सिग्नल कम्युनिकेशन यानी बेस से आ रहे संकेतों को समझकर उस हिसाब से कार्यवाही करने में माहिर माना जाता था। वाइस एडमिरल अवति को परम विशिष्ट सेना मेडल से भी सम्मानित किया गया। 1982 में वे एशियन गेम्स आयोजन समिति में भी शामिल रहे।