आलोक वर्मा को क्यों नहीं दिया गया अपना पक्ष रखने का मौका ? ये है इस सवाल का जवाब

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नेशनल डेस्क. आलोक वर्मा को सीबीआई डायरेक्टर पद से हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग आलोक वर्मा को हटाए जाने की आलोचना कर रहे हैं तो कुछ इसे सही ठहरा रहे हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने फेसबुक पर दो पोस्ट लिखी। पहली पोस्ट में उन्होंने सलेक्शन कमेटी के सदस्य रहे जस्टिस सीकरी के बारे में लिखा। दूसरी पोस्ट में उन्होंने फैसले के बाद जस्टिस सीकरी से फोन पर हुई बातचीत का जिक्र किया। बता दें कि सलेक्शन कमेट में पीएम मोदी, जस्टिस सीकरी और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे थे।

काटजू ने क्या लिखा : मार्कंडेय काटजू ने लिखा “कल मैंने जस्टिस सीकरी को लेकर एक पोस्ट लिखी थी। वो उन तीन लोगों की सलेक्शन कमेटी में थे, जिन्होंने आलोक वर्मा को सीबीआई पद से हटाने का फैसला किया। कई लोगों ने मेरी उस पोस्ट पर कमेंट कर पूछा कि फैसला लेने से पहले आलोक वर्मा को अपना पक्ष रखने का मौका क्यों नहीं दिया गया। इसलिए मैंने आज सुबह जस्टिस सीकरी को फोन किया और यही सवाल पूछा। इसके अलावा इस पोस्ट को लिखने की परमीशन भी मांगी। उन्होंने जो कहा वो ये है”

1. सीवीसी को वर्मा के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच में पहली बार देखने में कुछ साक्ष्य और निष्कर्ष मिले थे।
2. सीवीसी ने वर्मा को अपने प्रथम दृष्टया निष्कर्षों को दर्ज करने से पहले सुनवाई का मौका दिया था।
3. इन साक्ष्यों और उन पर आधारित निष्कर्षों के बाद जस्टिस सीकरी का मत था कि जब तक अलोक वर्मा पर लगे आरोपों की जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक उन्हें सीबीआई के डायरेक्टर के पद से हटा दिया जाए। उनका तबादला उनकी रैंक के समान की ही किसी दूसरी रैंक पर कर दिया जाए।

4. वर्मा को बर्खास्त नहीं किया गया है जैसा कई लोगों को लग रहा है। उनको निलंबित भी नहीं किया गया है। बस समान तनख्वाह और सुविधाओं वाले पद पर तबादला किया गया है।
5. जहां तक वर्मा को सुनवाई का मौका न दिए जाने का सवाल है। ये एक स्थापित सिद्धांत है कि किसी आरोपी को सुनवाई का मौका दिए बिना निलंबित किया जा सकता है, और निलंबित होने के बाद भी जांच होते रहना बहुत सामान्य सी बात है। बिना सुनवाई का मौका दिए गए बर्खास्तगी नहीं की जा सकती।

6. वर्मा को न निलंबित किया गया है और न बर्खास्त किया गया है। बस उनका समान रैंक की पोस्ट का ट्रांसफर किया गया है।

काटजू की पहली पोस्ट क्या था, जिसके बाद दूसरी पोस्ट लिखी :
आलोक वर्मा को पद से हटाए जाने के बाद काटजू ने कहा था कि “आलोक वर्मा को सीबीआई डायरेक्टर पद से हटा दिया गया है, जिसका फैसला पीएम मोदी की अध्ययक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी ने किया। पीएम मोदी और जस्टिस सीकरी ने उन्हें हटाने का फैसला लिया, जबकि कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके फैसले का विरोध किया। इस फैसले के बाद मेरे पास कई फोन आएं, और लोगों ने पूछा कि मेरा इसपर क्या कहना है। मैं जस्टिस सीकरी को बहुत अच्छे से जानता हूं क्योंकि मैं दिल्ली हाइकोर्ट में उनका चीफ जस्टिस था। मैं उनकी ईमानदारी की तारीफ सकता हूं। उन्होंने बिना किसी सबूत के अलोक वर्मा के खिलाफ फैसला नहीं लिया होगा। मुझे नहीं पता कि वो क्या सबूत हैं, पर मैं जस्टिस सीकरी को जानता हूं और अपनी जानकारी से कह सकता हूं कि वो किसी से प्रभावित नहीं हो सकते हैं। उनके ऊपर किसी भी तरह के आरोप लगाना गलत है।”


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